वन विभाग की 10 लाख की योजना कागजों में दफन
खबर वर्ल्ड न्यूज-राकेश पांडेय-जगदलपुर। बस्तर जिले के बड़े आरापुर स्थित सफेद चंदन वन पर अब अस्तित्व का संकट गहराता जा रहा है। कभी हजारों चंदन वृक्षों के लिए पहचाने जाने वाला यह क्षेत्र आज धीरे-धीरे इतिहास बनने की कगार पर पहुंच चुका है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, यहां पहले 2 हजार से अधिक सफेद चंदन के पेड़ मौजूद थे, लेकिन अब मुश्किल से 200 वृक्ष ही बचे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से सक्रिय चंदन तस्करों ने जंगल और गांव के आस-पास लगे अधिकांश पेड़ों को काट डाला। तस्करों ने केवल जंगल क्षेत्र ही नहीं, बल्कि आरापुर बस्ती, डोंगरीपारा, शिव मंदिर परिसर और रेलवे लाइन किनारे लगे चंदन वृक्षों को भी नहीं छोड़ा। लगातार हो रही अवैध कटाई के कारण अब यह धरोहर समाप्त होने के मुहाने पर खड़ी दिखाई दे रही है।
मिली जानकारी के अनुसार करीब 15 वर्ष पहले वन विभाग ने चंदन वन की सुरक्षा के लिए लगभग 10 लाख रुपये की योजना तैयार की थी। इस योजना में तारबाड़, सोलर लाइट और सुरक्षा व्यवस्था जैसी सुविधाएं शामिल थीं, ताकि तस्करी पर रोक लगाई जा सके। ग्रामीणों का कहना है कि यह योजना केवल कागजों तक सीमित रह गई और जमीनी स्तर पर कोई काम शुरू नहीं हो पाया। यदि समय रहते सुरक्षा व्यवस्था लागू कर दी जाती तो आज यह स्थिति पैदा नहीं होती। वन विभाग की कथित लापरवाही और निगरानी की कमी के कारण तस्करों का नेटवर्क लगातार सक्रिय बना रहा।
चंदन वन को बचाने के लिए ग्रामीणों ने अपने स्तर पर भी प्रयास किए। गांव के लोगों ने समिति बनाकर निगरानी शुरू की और कई बार तस्करों को पकड़कर पुलिस के हवाले भी किया। बावजूद इसके, स्थायी सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कार्रवाई नहीं होने से अवैध कटाई रुक नहीं सकी। ग्रामीणों का कहना है कि तस्कर रात के अंधेरे में पेड़ों को काटकर आसानी से फरार हो जाते हैं। स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों ने प्रशासन से तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो आने वाली पीढ़ियां केवल कहानियों में ही बस्तर के चंदन वन के बारे में सुन पाएंगी।


