khabarworld24.com – नई दिल्ली: भारत के तेजी से विकसित होते शैक्षणिक परिदृश्य में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी अब भी एक गंभीर चुनौती बनी हुई है। 2023-24 के आंकड़ों के अनुसार, देश के मात्र 57.2% स्कूलों में काम करने योग्य कंप्यूटर उपलब्ध हैं और केवल 53.9% स्कूलों में इंटरनेट की सुविधा है। यह तथ्य स्कूली शिक्षा के एकमात्र राष्ट्रीय स्तर के सार्वजनिक डेटाबेस, एकीकृत जिला सूचना प्रणाली (यूडीआईएस) के आंकड़ों से सामने आया है। ये आंकड़े डिजिटल डिवाइड के गहरे होते असर को भी उजागर करते हैं, जो शिक्षा के स्तर पर व्यापक असमानता को दर्शाता है।
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी:
देशभर के स्कूलों में कंप्यूटर और इंटरनेट जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी, शिक्षा के क्षेत्र में डिजिटल प्रगति के लिए गंभीर बाधा बनी हुई है।
- कंप्यूटर: 57.2% स्कूलों में ही काम करने योग्य कंप्यूटर हैं।
- इंटरनेट: मात्र 53.9% स्कूलों में इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध है, जो डिजिटल लर्निंग के लिए अपर्याप्त है।
शिक्षा के स्तरों में असमानता:
शिक्षा की गुणवत्ता और सुविधाओं में राज्य स्तर पर काफी अंतर देखने को मिल रहा है।
- प्राइमरी से सेकेंडरी तक की शिक्षा: 98.1% छात्र फाउंडेशन स्तर से प्राइमरी तक पहुंचते हैं, लेकिन मिडिल और सेकेंडरी स्तर पर स्कूल छोड़ने की दर बढ़ जाती है। मिडिल स्कूल में ड्रॉपआउट रेट 5.2% से बढ़कर सेकेंडरी स्तर पर दोगुनी हो गई है।
- छात्र-शिक्षक अनुपात: 30:1 का आदर्श छात्र-शिक्षक अनुपात कई राज्यों में बाधित हो रहा है। झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में यह अनुपात सही नहीं है, जबकि दिल्ली और चंडीगढ़ में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के अनुरूप यह अनुपात है।
नामांकन में 37 लाख की गिरावट:
2023-24 में देशभर के स्कूलों में नामांकन की संख्या में 37 लाख छात्रों की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे कुल नामांकित छात्रों की संख्या घटकर 24.8 करोड़ हो गई है।
यह गिरावट शिक्षा क्षेत्र के लिए चिंता का विषय है और शिक्षा के प्रति छात्रों की रुचि को बनाए रखने की दिशा में चुनौती पेश करती है।
मध्य और उच्च स्तर पर गिरावट:
- मिडिल से सेकेंडरी स्तर पर केवल 83.3% छात्र ही पहुंच पाते हैं।
- कई राज्य, जैसे झारखंड, बिहार, और पश्चिम बंगाल में छात्र-शिक्षक अनुपात आदर्श से बहुत अधिक है, जिससे छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
असमानता और चुनौतीपूर्ण स्थिति:
देश के विभिन्न हिस्सों में बुनियादी ढांचे की असमानता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
- बुनियादी ढांचा: असम, ओडिशा, और कर्नाटक जैसे राज्यों में स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं की कमी है, जिससे छात्र-शिक्षक अनुपात में गिरावट हो रही है।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति: दिल्ली और चंडीगढ़ में पीटीआर (छात्र-शिक्षक अनुपात) एनईपी मानदंडों के अनुसार है, जबकि अन्य राज्यों में इस दिशा में प्रगति की आवश्यकता है।
स्कूल छोड़ने की दर:
माध्यमिक स्तर तक स्कूल छोड़ने की दर 5.2% से बढ़कर दोगुनी हो गई है, जो देश के शैक्षिक सुधारों की दिशा में एक गंभीर बाधा है। इस स्थिति से निपटने के लिए स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं और शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने की आवश्यकता है।
निष्कर्ष:
भारत के स्कूलों में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी और नामांकन में गिरावट शिक्षा के क्षेत्र में गंभीर चुनौतियों का संकेत देती है। डिजिटल डिवाइड को पाटने और स्कूल छोड़ने की दर को कम करने के लिए बुनियादी सुविधाओं और शिक्षकों की संख्या में वृद्धि करना आवश्यक है।
खबर वर्ल्ड24-बालकृष्ण साहू-छत्तीसगढ़

