नई दिल्ली। खेत-खलिहान और जंगल के आसपास कई तरह की देसी जंगली सब्जियां होती है। इन्हीं में से एक है करेला जैसा दिखने वाला ककोड़ा। जिसे कई इलाकों में काकरोल या जंगली करेला भी कहा जाता है। यह बेल पर उगता है और ग्रामीण क्षेत्रों में इसे बड़े चाव से खाया जाता है। ककोड़े की सब्जी आलू, प्याज और मसालों के साथ बनाई जाती है। साथ ही इसका स्वाद जितना लोगों को अच्छा लगता है ये उतना ही सेहत के लिये भी फायदेमंद है।
ककोड़े में फाइबर समेत कई पोषक तत्व पाए जाते है। इसलिए इसे सामान्य संतुलित आहार का हिस्सा बनाया जा सकता है। इसमें प्रोटीन, आयरन, जिंक और एंटीऑक्सीडेंट जैसे पोषक तत्वों की मौजूदगी बताई जाती है। अगर डायबिटीज जैसी बीमारी में दवाएं चल रही है तो डॉक्टर की सलाह के बिना उन्हें बंद या कम नहीं करना चाहिए। डॉक्टर मनीष खेडेकर ने ककोड़े के पोषण और इसके सेवन से जुड़े कई पहलुओं के बारे में जानकारी दी।
डॉक्टर मनीष खेडेकर के अनुसार ककोड़ा पोषण के लिहाज से अच्छी मौसमी सब्जी हो सकता है। इसमें फाइबर, प्रोटीन, आयरन, जिंक और एंटीऑक्सीडेंट जैसे पोषक तत्व पाए जाते है। फाइबर वाला भोजन पाचन तंत्र को सामान्य रूप से बेहतर तरीके से काम करने में मदद करता है और पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस करा सकता है। यही वजह है कि इस देसी सब्जी को दूसरी मौसमी सब्जियों, दाल और अनाज के साथ संतुलित भोजन में शामिल किया जा सकता है।
ककोड़े को डायबिटीज के लिए फायदेमंद बताया जाता है। इसमें मौजूद कुछ वनस्पति यौगिकों पर शोध और पारंपरिक उपयोग का उल्लेख मिलता है। लेकिन इसे डायबिटीज की दवा का विकल्प नहीं माना जा सकता। डायबिटीज के मरीज इसे सामान्य सब्जी के तौर पर खा सकते हैं, लेकिन ब्लड शुगर को नियंत्रित करने के लिए डॉक्टर की सलाह, दवा, नियमित जांच और संतुलित आहार जरूरी है। केवल ककोड़ा खाने से ब्लड शुगर नियंत्रित होने की गारंटी नहीं है।
ककोड़े में फाइबर पाया जाता है। भोजन में पर्याप्त फाइबर होने से पाचन तंत्र को सामान्य रूप से काम करने में मदद मिलती है। इससे पेट साफ रहने और कब्ज जैसी समस्या से बचाव में मदद मिल सकती है। हालांकि, हर व्यक्ति के शरीर पर भोजन का असर अलग हो सकता है। इसलिए ज्यादा मात्रा में खाने के बजाय संतुलित मात्रा में इसका सेवन करना बेहतर है।
कम कैलोरी वाली सब्जियों को संतुलित डाइट में शामिल करने से वजन नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है। ककोड़ा भी ऐसी मौसमी सब्जियों में शामिल किया जा सकता है। इसमें मौजूद फाइबर पेट को कुछ समय तक भरा हुआ रखने में मदद करता है, जिससे बार-बार खाने की इच्छा कम हो सकती है। लेकिन सिर्फ ककोड़ा खाने से वजन कम नहीं होता। वजन नियंत्रित रखने के लिए पूरे खान-पान, शारीरिक गतिविधि और जीवनशैली पर ध्यान देना जरूरी है।
ककोड़े में आयरन और जिंक जैसे खनिज भी पाए जाते है। आयरन शरीर में हीमोग्लोबिन बनाने के लिए जरूरी पोषक तत्व है, जबकि जिंक शरीर की कई सामान्य जैविक प्रक्रियाओं में भूमिका निभाता है। इसलिए पोषण के लिहाज से ककोड़े को मौसमी सब्जियों की तरह डाइट में शामिल किया जा सकता है। हालांकि, अगर किसी व्यक्ति में एनीमिया या आयरन की कमी है तो केवल ककोड़े पर निर्भर रहना सही नहीं है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह और जांच के अनुसार उपचार लेना जरूरी है।
ककोड़े और इससे जुड़ी वनस्पतियों का पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में भी उल्लेख मिलता है। इसकी जड़ और दूसरे हिस्सों के विभिन्न पारंपरिक उपयोग बताए जाते है। हालांकि किसी बीमारी जैसे बवासीर, बुखार या पेशाब संबंधी समस्या के इलाज के लिए इसकी जड़ या किसी घरेलू नुस्खे का खुद से इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
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