खबर वर्ल्ड न्यूज-पंडरिया। तालाब पाटकर जमीन बेचने से जुड़े मामले में समाचार प्रकाशित करने के बाद पत्रकार के साथ गाली-गलौज,अभद्रता और जान से मारने की कथित धमकी के मामले में पंडरिया पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। शिकायत के करीब एक सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद न तो घटनास्थल पर लगे CCTV कैमरे की फुटेज खंगाली गई और न ही कथित आरोपी का बयान लिए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस की इस सुस्ती को लेकर पत्रकारों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। प्रेस क्लब पंडरिया के कोषाध्यक्ष एवं पत्रकार नंदकिशोर उर्फ नरेंद्र तिवारी ने 10 सितंबर की रात महामाया मंदिर के सामने हुई घटना को लेकर थाना पंडरिया में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार,समाचार को लेकर बंटी ठाकुर उर्फ हेमंत ठाकुर ने कथित रूप से पत्रकार के साथ गाली-गलौज करते हुए मारपीट और जान से मारने की धमकी दी। घटना के बाद पत्रकार ने पुलिस से मामले की जांच,कानूनी कार्रवाई और सुरक्षा की मांग की थी।
पुलिस को दी गई महत्वपूर्ण जानकारी, फिर भी CCTV जांच से दूरी
पीड़ित पत्रकार का कहना है कि 15 सितंबर को पुलिस के समक्ष उन्होंने अपना बयान दर्ज कराया और स्पष्ट रूप से बताया कि महामाया मंदिर के सामने CCTV कैमरा लगा हुआ है तथा वह चालू स्थिति में है। मंदिर में नियमित पूजा-पाठ करने वाले पुजारी ने भी कैमरा चालू होने की जानकारी दी है। पीड़ित के अनुसार,कैमरे से संबंधित रिकॉर्ड पुजारी के मोबाइल में भी मौजूद है। इसके बावजूद अब तक पुलिस द्वारा घटनास्थल पर जाकर CCTV फुटेज देखने अथवा उसे सुरक्षित कराने की कार्रवाई नहीं की गई है।
पीड़ित ने अब पुलिस अधीक्षक को सोशल मीडिया के माध्यम से शिकायत भेजकर पूरे मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने SP से आग्रह किया है कि CCTV फुटेज की तत्काल जांच कराई जाए,ताकि घटना की वास्तविकता सामने आ सके।
आरोपी का बयान नहीं,जांच की दिशा पर उठ रहे सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब घटनास्थल की पहचान स्पष्ट है,CCTV कैमरा मौजूद है और पीड़ित ने अपने बयान में इसकी जानकारी भी पुलिस को दे दी है,तो अब तक फुटेज क्यों नहीं देखी गई? शिकायत के बाद कथित आरोपी का बयान लिया गया या नहीं,इसे लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। यदि CCTV फुटेज उपलब्ध है तो उसकी जांच मामले की सच्चाई सामने लाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
पत्रकारों में बढ़ता आक्रोश
प्रेस क्लब पंडरिया ने मामले में निष्पक्ष और त्वरित जांच की मांग करते हुए कहा है कि पत्रकारों का काम जनसमस्याओं,भ्रष्टाचार और क्षेत्र में हो रही अनियमितताओं को जनता और प्रशासन के सामने लाना है। यदि किसी समाचार से नाराज होकर पत्रकार को धमकाया जाता है और शिकायत के बाद भी कार्रवाई में देरी होती है,तो इससे पत्रकारों के मन में असुरक्षा की भावना पैदा होना स्वाभाविक है।प्रेस क्लब ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए CCTV फुटेज तत्काल सुरक्षित कराई जाए, संबंधित लोगों के बयान लिए जाएं और जांच के आधार पर जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाए,उसके विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाए। क्लब का कहना है कि पत्रकारों को निर्भीक होकर जनहित के मुद्दे उठाने के लिए सुरक्षित वातावरण मिलना चाहिए।
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