खबर वर्ल्ड न्यूज-राकेश पांडेय-जगदलपुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस के संयुक्त महासचिव उमाशंकर शुक्ला जारी प्रेस विज्ञप्ति में उन्हाेने कहा कि बस्तर संभाग मुख्यालय नगर निगम क्षेत्र जगदलपुर शहर में लगातार हो रही बिजली कटौती ने जनता की परेशानी बढ़ा दी है। निगम क्षेत्र में लगातार हो रही बिजली कटौती की समस्याओं से निगम के महापौर संजय पांडे को कोई सरोकार नहीं निगम की सरकार अपने में मस्त है, वहीं जगदलपुर के विधायक अस्वस्थ है। इसके बाद पूरी एसा प्रतीत हाेता है कि बिजली की व्यवस्था को देखने वाला कोई भी नहीं है। आज शनिवार काे बगैर किसी सूचना के शहर में सुबह से शाम तक बिजली के गुल रहने से इसकी किसी ने भी सुध लेना तक उचित नहीं समझा। ऐसा प्रतीत होता है कि जगदलपुर के भाजपा के जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता ने पूरे प्रशासनिक अमले को ही निष्क्रिय और नाकारा बना दिया है। जिसके परिणाम स्वरूप जिला प्रशासन के मुखिया कलेक्टर को भी इस विकराल हो चुकी समस्या की सुध लेने की आवश्यकता महसूस नहीं होती है।
उन्हाेने कहा कि शहरी क्षेत्र में रोजाना दो से चार बार तक बिजली गुल की समस्या से लोगों की परेशानी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि, व्यापार रोजगार और अन्य सभी काे रोजाना कितना नुकसान उठाना पड़ रहा है। यहां यह भी बताना आवश्यक है कि यह समस्या शहरी क्षेत्र में ही नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में इससे भी बढ़कर समस्या विकराल रूप ले चुकी है। हालात यह है कि ग्रामीण इलाकों में बिना बारिश और तेज हवा के भी रोजाना 6 से 8 घंटे तक बिजली कटौती रहती है। लाइट अगर कभी आ भी जाए तो दिनभर बिजली का आना-जाना जारी रहता है। लाेगाें काे सबसे ज्यादा दिक्कत सुबह के समय होती है, जब लोगों को पानी भरने, बच्चों को स्कूल भेजने और दैनिक कार्यों के लिए बिजली की सबसे अधिक जरूरत होती है। लगातार हो रही इस इस बिजली गुल से जिला प्रशासन के मुखिया कलेक्टर को संज्ञान लेना चाहिए लेकिन वह भी माैन साधे में बैठे हुए हैं।
उमाशंकर शुक्ला ने कहा कि बगैर सूचना के बिजली की व्यवस्था को बंद करने का अधिकार विद्युत विभाग को किसने दिया है। इसकी जानकारी के लिए विद्युत विभाग के शिकायत नंबर से लेकर अधिकारियों तक के नंबर पर फोन करने पर कोई भी फोन उठाकर चर्चा करने के लिए भी तैयार नहीं है। आज शनिवार को शहर की बिजली सुबह से लेकर शाम तक क्यों गुल रही इसके कारण की जानकारी तक उपभोक्ताओं को पता ही नही हाेने के बावजूद इसका खामियाजा भुगतने के लिए बाध्य हाेना पड़ रहा है।
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