सावन संकष्टी चतुर्थी को गजानन संकष्टी चतुर्थी भी कहते हैं। सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को गजानन संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखते हैं और विघ्नहर्ता श्री गणेश जी की पूजा करते हैं। इस बार संकष्टी चतुर्थी पर सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है, लेकिन पूरे दिन पंचक भी रहेगा। हालांकि इसका व्रत और पूजा पर कोई दुष्प्रभाव नहीं होगा। इस दिन व्रत तभी पूर्ण होगा, जब चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाएगा। चंद्रोदय के लिए व्रती को काफी प्रतीक्षा करनी पड़ती है।
गजानन संकष्टी चतुर्थी 2026 तारीख
वैदिक पंचांग को देखें तो इस बार सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 1 अगस्त को रात में 11 बजकर 7 मिनट पर शुरू होगी। यह तिथि अगले दिन 2 अगस्त को रात 11 बजकर 15 मिनट तक मान्य रहेगी। उदयातिथि और चंद्रोदय समय के आधार पर गजानन संकष्टी चतुर्थी यानि सावन संकष्टी चतुर्थी 2 अगस्त रविवार को है।
गजानन संकष्टी चतुर्थी 2026 मुहूर्त
गजानन संकष्टी चतुर्थी के अवसर पर ब्रह्म मुहूर्त प्रात:काल में 04:19 ए एम से 05:01 ए एम तक है, वहीं अभीजित मुहूर्त दोपहर 12:00 पी एम से लेकर दोपहर 12:54 पी एम तक रहेगा। जो लोग व्रत रखेंगे, वे गणेश जी की पूजा सुबह में 07:24 ए एम से लेकर दोपहर 12:27 पी एम के बीच कभी भी कर सकते हैं।
इस शुभ समय में चर-सामान्य मुहूर्त सुबह 07:24 ए एम से 09:05 ए एम तक है, वहीं लाभ-उन्नति मुहूर्त सुबह 09:05 ए एम से 10:46 ए एम तक है, जबकि अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त सुबह 10:46 ए एम से दोपहर 12:27 पी एम तक है।
सर्वार्थ सिद्धि योग में गजानन संकष्टी चतुर्थी
गजानन संकष्टी चतुर्थी पर सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। यह शुभ फलदायी योग रात में 09 बजकर 37 मिनट पर बनेगा और अगले दिन 3 अगस्त को सुबह 05 बजकर 44 मिनट तक रहेगा। इस योग में किए गए कार्य की सफल होने की संभावना अधिक रहती है।
चतुर्थी को प्रात:काल में अतिगण्ड योग बनेगा, जो रात 10 बजकर 30 मिनट तक रहेगा, उसके बाद से सुकर्मा योग का निर्माण होगा। उस दिन पूर्व भाद्रपद नक्षत्र प्रात:काल से लेकर रात 09 बजकर 37 मिनट तक है, फिर उत्तर भाद्रपद नक्षत्र है।
गजानन संकष्टी चतुर्थी 2026 चंद्रोदय
गजानन संकष्टी चतुर्थी के दिन चांद रात में 09 बजकर 24 मिनट पर निकलेगा। कृष्ण पक्ष में इस समय चंद्रोदय के लिए लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ती है।
संकष्टी चतुर्थी का महत्व
गजानन संकष्टी चतुर्थी के दिन लोग व्रत रखकर गणेश जी के गजानन स्वरूप की पूजा करते हैं। जो इस व्रत को विधि विधान से करता है, उसके संकट दूर होते हैं। गणपति कृपा से उसके कष्ट मिटते हैं और सुख की प्राप्ति होती है। जीवन में शुभता बढ़ती है।
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