चातुर्मास का दूसरा महीना कहलाता है सावन। सावन की शुरुआत 30 जुलाई 2026 से होगी। मार्कंडेय ऋषि ने श्रावण महीने में ही कठिन तपस्या कर शिवजी को प्रसन्न किया, कहते हैं जिससे मृत्यु यानी काल के देवता यमराज भी नतमस्तक हो गए थे।
माना जाता है कि हर साल सावन में भगवान शिव अपने ससुराल आते हैं। इस महीने में की गई शिव साधना यम के कष्टों से मुक्ति दिलाने में सहायक होती है। सावन का हर दिन बहुत खास होता है, लेकिन सावन शिवरात्रि का दिन महाशिवरात्रि के समान पुण्यफलदायी है। सावन शिवरात्रि 11 अगस्त 2026 को है। इस दिन रात्रि काल में शिव साधना, जलाभिषेक आदि का पुण्य सालभर मिलता है।
सावन शिवरात्रि तिथि 2026
सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 11 अगस्त को सुबह 4.54 पर सुरू होगी और अगले दिन 12 अगस्ते को सुबह 1.52 पर समाप्त होगी। इसी दिन कांवड़िए शिव जी पर जल चढ़ाते हैं और कांवड़ यात्रा का समापन होता है।
सावन शिवरात्रि पर जल चढ़ाने का मुहूर्त
निशिता काल पूजा समय – सुबह 12:05 – सुबह 12:48, 12 अगस्त
सावन शिवरात्रि पर चार प्रहर मुहूर्त
प्रथम प्रहर पूजा मुहूर्त – शाम 07:04 – रात 09:45
दूसरा प्रहर पूजा मुहूर्त -रात 09:45 – देर रात 12:26
तीसरा प्रहर पूजा मुहूर्त – देर रात 12:26 – सुबह 03:07
चौथा प्रहर पूजा मुहूर्त – सुबह 03:07 – सुबह 05:49
सावन का पुराणों में महत्व
द्वादशस्वपि मासेषु श्रावणो मेऽतिवल्लभ:। श्रवणार्हं यन्माहात्म्यं तेनासौ श्रवणो मत: ।। श्रवणर्क्षं पौर्णमास्यां ततोऽपि श्रावण: स्मृत:। यस्य श्रवणमात्रेण सिद्धिद: श्रावणोऽप्यत: ।।
भगवान शिव कहते हैं कि, सभी महीनों में मुझे श्रावण अत्यंत प्रिय है इसकी महिमा सुनने योग्य ह। इसलिए इसे श्रावण कहा जाता है। इस महीने में पूर्णिमा पर श्रवण नक्षत्र होता है इस कारण भी इसे श्रावण कहा जाता है। इस महीने की महिमा को सुनने से ही सिद्धि मिलती है, इसलिए भी इसे श्रावण कहा गया है।
सावन शिवरात्रि पर किन चीजों के करें पूजा
* दूध और जल- शिवलिंग पर कच्चा दूध और गंगाजल अर्पित करना बहुत शुभ होता है। इससे शरीर और मन दोनों शुद्ध होते हैं।
* शहद- भगवान शिव को मीठा पसंद नहीं है लेकिन रुद्राभिषेक में शहद का प्रयोग करने से वाणी और रिश्तों में मिठास आती है।
* चावल (अक्षत)- बिना टूटे हुए सफेद चावल शिव पूजा में विशेष महत्व रखते हैं।
* बिल्व पत्र- शिव जी को बिल्व पत्र अत्यंत प्रिय हैं। तीन पत्तियों वाला बिल्व पत्र जरूर चढ़ाएं।
* सफ़ेद फूल- शिव जी को सफेद रंग के फूल विशेष रूप से पसंद हैं, जैसे कनेर या आक का फूल।
* घी और दही- पंचामृत में इनका उपयोग किया जाता है। यह शिवलिंग पर रुद्राभिषेक के लिए बहुत पवित्र माना गया है।
* फल और सूखे मेवे- खासकर नारियल, किशमिश और खजूर भगवान को अर्पित किए जा सकते हैं।
* गुड़- गुड़ या गुड़ से बने पकवान भी शिव जी को अर्पित किए जा सकते हैं।
* पंचामृत- दूध, दही, घी, शहद और शक्कर मिलाकर तैयार किया गया पंचामृत शिव पूजा में विशेष स्थान रखता है।
सावन शिवरात्रि भोग
हलवा, खीर, बेल का फल, फलों का रस, मालपुआ, भोग, गन्ने का रस, भांग, धतूरा आदि का भोग लगाया जाता है।
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। यहां यह बताना जरूरी है कि K.W.N.S. किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।
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