खबर वर्ल्ड न्यूज-राकेश पांडेय-दंतेवाड़ा। जिले में डीजल संकट और प्रशासन के नए नियमों ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। खुले में ड्रम, बोतल और जरीकेन में पेट्रोल-डीजल बिक्री पर रोक लगने के बाद दूर-दराज के गांवों से किसान ट्रैक्टर लेकर पेट्रोल पंप पहुंचने को मजबूर हैं। हालात ऐसे हैं कि 50 किलोमीटर दूर से आने-जाने में ही ट्रैक्टर का 10 लीटर से अधिक डीजल खर्च हो रहा है, जबकि पंपों में एक बार में सिर्फ 20 लीटर डीजल ही दिया जा रहा है। इससे खेती-किसानी का काम बुरी तरह प्रभावित होने लगा है।
आज साेमवार को अरनपुर और बुरगुम क्षेत्र से किसान ट्रैक्टर लेकर दंतेवाड़ा पहुंचे। किसान महेश और हूंगा ने बताया कि जरीकेन में डीजल नहीं मिलने से खेतों की जुताई बंद होने की स्थिति बन गई है। किसानों का कहना है कि गांव-गांव के लोग हर बार एसडीएम से अनुमति लेने नहीं जा सकते। ऐसे में प्रशासन को किसानों के लिए अलग व्यवस्था करनी चाहिए। किसानों ने आरोप लगाया कि एक तरफ छोटे किसानों को डीजल के लिए परेशान किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ बड़ी कंपनियों को आवश्यक कार्य का हवाला देकर रात के अंधेरे में टैंकरों से हजारों लीटर डीजल उपलब्ध कराया जा रहा है। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो जिले भर के किसान कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन करेंगे।
विदित हाे कि पेट्रोल-डीजल की कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने सख्त आदेश जारी किया है। इसके तहत अब प्रदेशभर के पेट्रोल पंपों में खुले रूप में डीजल-पेट्रोल बेचना प्रतिबंधित कर दिया गया है। प्रशासनिक निर्देशों के अनुसार केवल वाहनों की टंकियों में ही ईंधन भरा जा सकेगा। नियम उल्लंघन पर एफआईआर और कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
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