अक्षय तृतीया 19 अप्रैल को है या 20 अप्रैल को? दरअसल अक्षय तृतीया वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को होता है। इस बार अक्षय तृतीया के लिए वैशाख शुक्ल तृतीया तिथि 19 अप्रैल को 10:49 एएम से प्रारंभ हो रही है और 20 अप्रैल को 7:49 एएम तक है। उदयातिथि के आधार पर तृतीया तिथि 20 अप्रैल को है, जबकि तृतीया तिथि 19 अप्रैल को शुरू हो रही है। ऐसे में कन्फ्यूजन है कि अक्षय तृतीया 19 अप्रैल को मनाएं या फिर 20 अप्रैल को?
अक्षय तृतीया 19 अप्रैल या 20 अप्रैल?
कई व्रतों में उदयातिथि की मान्यता है। जिसके अनुसार सूर्योदय के समय जो तिथि होगी, उस आधार पर व्रत या त्योहार मनाते हैं। लेकिन कुछ व्रत, पर्व और त्योहारों में यह नियम नहीं लागू होता है। इसमें तिथि के प्रारंभ और समापन के बीच कई नियमों का पालन होता है, उस आधार पर पर्व या त्योहार का दिन तय होता है।
अक्षय तृतीया उदयातिथि के अनुसार 20 अप्रैल को होनी चाहिए, लेकिन उस दिन तृतीया तिथि सुबह में ही खत्म हो जा रही है। ऐसे में लोग खरीदारी और पूजा पाठ कब करेंगे। इसमें बहुत कम समय प्राप्त होगा।
दूसरी बात यह है कि शास्त्रों के अनुसार, जब वैशाख शुक्त तृतीया तिथि दोपहर से पूर्व प्रारंभ हो जाए और मध्याह्नव्यापिनी मुहूर्त प्राप्त हो तो उस दिन ही अक्षय तृतीया मनानी चाहिए। ऐसे में 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया की तिथि दोपहर से पूर्व 10:49 एएम पर शुरू हो रही है और इस दिन ही मध्याह्नव्यापिनी मुहूर्त मिल रहा है। इस वजह से अक्षय तृतीया 19 अप्रैल रविवार को मनाई जाएगी। अक्षय तृतीया को अखा तीज के नाम से भी जानते हैं।
अक्षय तृतीया 2026 मुहूर्त
अक्षय तृतीया के दिन पूजा के लिए शुभ मुहूर्त 01 घंटा 32 मिनट का है। इस दिन आप सुबह में 10:49 बजे से लेकर दोपहर 12:20 बजे के बीच पूजा पाठ कर सकते हैं।
अक्षय तृतीया पर सोना खरीदने का शुभ समय
इस साल अक्षय तृतीया पर आप 19 अप्रैल को सुबह 10:49 बजे से लेकर 20 अप्रैल को सुबह 7:49 बजे के बीच कभी भी सोना खरीद सकते हैं।
इस साल की अक्षय तृतीया है विशेष
इस बार की अक्षय तृतीया विशेष है। इस दिन अक्षय तृतीया के साथ नर-नारायण जयंती, हयग्रीव जयंती, परशुराम जयंती मनाई जाएगी और गौरी पूजा भी की जाएगी।
अक्षय तृतीया का महत्व क्या है?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन आप जो भी शुभ कार्य करते हैं, उसका अक्षय पुण्य फल प्राप्त होता है। इस दिन भगवान विष्णु के घोड़े के सिर वाले अवतार हयग्रीव की उत्पत्ति हुई थी, वहीं इस तिथि को भगवान विष्णु के अवतार भगवान परशुराम का जन्म हुआ था। इस तिथि को भगवान विष्णु का नर-नारायण अवतार हुआ था। अक्षय तृतीया के दिन सतयुग का समापन और त्रेता युग का शुभारंभ हुआ था। अक्षय तृतीया को स्नान और दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
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