आज अनंग त्रयोदशी है। चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को अनंग त्रयोदशी के नाम से जाना जाता है। ये दिन शिव-पार्वती के अलावा प्रेम, सौंदर्य के प्रतीक कामदेव और रति को समर्पित है। वैवाहिक जीवन में सुख, मधुरता पाने के लिए साथ ही लव मैरिज की चाहत रखने वालों के लिए ये दिन बहुत महत्वपूर्ण है।
अनंग त्रयोदशी क्या है ?
अनंग त्रयोदशी प्रेम, संयम और आध्यात्मिक शक्ति के संतुलन का प्रतीक है। पुराणों के अनुसार “अनंग” शब्द का अर्थ है शरीर रहित। कामदेव को अनंग भी कहा जाता है, यह नाम कामदेव को तब मिला जब वे भगवान शिव के क्रोध से भस्म हो गए थे। इसके बाद
सुबह पूजा मुहूर्त – सुबह 9.20 – रात 10.53
शाम पूजा मुहूर्त – शाम 6.38 – रात 8.57
शिव संग क्यों होती है कामदेव और रति की पूजा
इस दिन व्रत कर शिव पार्वत, कामदेव और रति की पूजा करने से कई लाभ मिलते हैं। दांपत्य जीवन में भौतिक और आध्यात्मिक प्रेम दोनों का आशीर्वाद मिलता है। शिवजी की कृपा से ही कामदेव को पुनर्जीवन मिला इसलिए इस दिन इन देवताओं की पूजा होती है।
* व्यक्ति का व्यक्तित्व प्रभावशाली बनता है।
* पति-पत्नी के बीच प्रेम, आकर्षण और आपसी समझ बढ़ती है। वैवाहिक जीवन में चल रही समस्याएं दूर होती हैं।
* जो लोग प्रेम संबंध या विवाह में बाधाओं का सामना कर रहे हैं, उन्हें इस व्रत से विशेष लाभ मिलता है।
अनंग त्रयोदशी पूजा विधि
* अनंग त्रयोदशी पर शाम को शिव जी की पूजा करें, उन्हें सफेद फूल चढ़ाएं और ऊं ऊमा महेश्वराय नम मंत्र का जाप करें।
* कामदेव और रति का ध्यान करते हुए शिवलिंग पर सुगंधित इत्र, चंदन, फल और मिठाइयां अर्पित करते हुए सुखद दांपत्य जीवन या सफल प्रेम संबंध की कामना करे।
* ‘ॐ कामदेवाय: विदमहे पुष्पबाणाय धीमहि तन्नो अनंग: प्रचोदयात’ का स्फटिक की माला से अधिक से अधिक जाप करना चाहिए।
अनंग त्रयोदशी की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार तारकासुर नाम का राक्षस था जिसे यह वरदान दिया गया था कि उसकी मृत्यु भगवान शिव के पुत्र के हाथों ही होगी। तारकासुर ने खूब आतंक फैलाया हुआ था। सभी देवी देवता उसके आतंक से परेशान आ गए थे। उसके आतंक से बचने के लिए सभी कामदेव के पास पहुंचे और उनसे आग्रह कर कहा कि वह तपस्या में लीन भगवान शिव की तपस्या भंग कर दें।
कामदेव ने सभी का आग्रह स्वीकार किया और उन्होंने भगवान शिव की तपस्या भंग कर दी लेकिन, उन्हें महादेव के क्रोध का सामना करना पड़ा। महादेव ने कामदेव को भस्म कर दिया। यह सब देखकर कामदेव की पत्नी से भगवान शिव से आग्रह किया की वह कामदेव को पुन: जीवित कर दें।
भगवान शिव ने रति का आग्रह स्वीकार किया और कामदेव को पुनर्जीवित तो किया लेकिन उन्हें शरीर नहीं लौटा पाए। इसके बाद भगवान शिव ने कामदेव को दो वरदान दिए।
भगवान शिव के वरदान के अनुसार, उन्होंने कामदेव से कहा की तुम द्वापरयुग में भगवान कृष्ण के पुत्र के रूप में जन्म लेंगे इसके बाद उनके विवाह देवी रति से ही होगा। भगवान शिव ने कामदेव को दूसरे वरदान में कहा कि श्री कृष्ण के पुत्र के रूप में जन्म लेने तक कामदेव को बिना अंगों के रहना होगा।
जिस वजह से उनका एक नाम अनंग भी कहलाया जाएगा। उस दिन त्रयोदशी तिथि थी इसलिए उसी दिन से ऐसे अनंग त्रयोदशी के रुप में मनाया जाने लगा।
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। यहां यह बताना जरूरी है कि K.W.N.S. किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।
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