पनौती शब्द को आमतौर पर बुरी किस्मत से जोड़ा जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं शनि की छोटी पनौती और बड़ी पनौती क्या है। इसका प्रयोग हम किसके लिए करते हैं और ये वरदान है या अभिशाप ?
शनि की पनौती
आमतौर पर पनौती शब्द का नाम सुनकर लोग इसे नकारात्मक रूप से ही देखते हैं। जबकि ज्योतिष में पनौती शब्द का संबंध शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से जोड़ा जाता है।
शनि की साढ़ेसाती को बड़ी पनौती और ढैय्या को छोटी पनौती कहा जाता है।शनि की बड़ी पनौती का प्रभाव किसी राशि पर लगभग साढ़ेसात वर्षों तक रहता है। वहीं छोटी पनौती का प्रभाव ढाई वर्ष तक रहता है।
सामान्य रूप से पनौती का अर्थ खराब, अशुभ, अनलकी या काम बिगाड़ने वाला होता है। ऐसे में शनि की पनौती लोगों के लिए वरदान है या अभिशाप, आइए जानते हैं।
ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास के अनुसार, शनि की पनौती यानी साढ़ेसाती और ढैय्या भी राशियों के लिए शुभ नहीं मानी जाती है। लेकिन शनि की पनौती को अभिशाप कहना सही नहीं होगा।
शनि की पनौती का समय व्यक्ति को संयम, अनुशासन और धैर्य सिखाता है और कई बार तो व्यक्ति को मजबूत भी बनाता है।
शनि की बहन होने कारण ज्योतिष में भद्रा को भी पनौती कहा जाता है। क्योंकि भद्रा शुभ कार्यों में अड़चन डालती है। इसलिए हिंदू धर्म में भद्राकाल में कोई शुभ काम नहीं किए जाते हैं।
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