खबर वर्ल्ड न्यूज-राकेश पांडेय-कांकेर। जिले के खेत-मैदानों में इन दिनों कांसी के फूल नजर आ रहे हैं, जो बारिश के बाद शीत ऋतु के आगमन का संदेश के साथ ज्यादातर कांसी फूल खेत की मेड़ और नदियों के किनारे लहराते नजर आ रहे हैं। फूलों ने सरंगपाल में महानदी के किनारे सफेद चादर से ढंक दिया है। महानदी के अलावा हटकुल नदी के किनारे कांसी फूल अपनी सुंदरता बढ़ा रहे हैं। यहां से गुजरने वाला हर कोई एक बार रुककर कांसी फूलों को अपने कैमरे में जरूर कैद कर रहा है।
आयुर्वेद डॉ. अरविंद मिश्रा ने बताया कि कांसी फूल को संस्कृत में कांस कहते हैं। यह पंचतृण मूल्य वाली पांच प्रकार की घासों कुष, कांस, षर, दर्भ, इच्छु में प्रमुख है। कांसी फूल विशेषकर ज्यादा पानी वाली जगहों पर मिलते हैं। मूत्रविकार, पथरी की समस्या में इसे उपयोगी माना गया है। पेशाब में जलन होने पर इसका इस्तेमाल करने से समस्या से निजात मिलती है। कांसी में फाइबर होता है, जिससे यह पाइल्स और चर्मरोग में भी लाभदायक है। आयुर्वेद में कांस के फूलों की रुई से बने तकिये का इस्तेमाल करने से सिरदर्द और गर्दन दर्द में आराम मिलता है। इसकी जड़ों का रस पथरी में फायदेमंद है। कांस के फूल का उपयोग पेट की जलन को शांत करने में मदद करता है। औषधीय गुणों की वजह से इसका उपयोग त्वचा संबंधी समस्याओं में भी किया जा सकता है।
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