नई दिल्ली। आलू हमारे रोजमर्रा के भोजन का अहम हिस्सा है। इसे सब्जियों, स्नैक्स और विभिन्न व्यंजनों में बड़े चाव से खाया जाता है। लेकिन अक्सर घर में रखे आलू लंबे समय तक पड़े रहने पर अंकुरित होने लगते हैं। इन आलुओं के अंदर से जड़ जैसी निकल आती है। ऐसा आलू खाना अमृत है या जहर, जानिए सच्चाई…
आलू अंकुरित क्यों होता है?
आलू को लंबे समय तक नमी या गर्माहट वाले स्थान पर रखने से उसमें अंकुर निकलने लगते हैं। यह अंकुर उसके अंदर मौजूद शर्करा और पोषक तत्वों का उपयोग करके बढ़ता है। जैसे-जैसे अंकुर निकलता है, आलू के अंदर एक जहरीला तत्व सोलानाइन (Solanine) बनने लगता है, जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक होता है।
अंकुरित आलू खाने के क्या खतरे हैं?
सोलानाइन का अधिक मात्रा में सेवन शरीर में विषाक्तता फैला सकता है। इसके लक्षणों में डायरिया, उल्टी, पेट दर्द, सिरदर्द, कमजोरी और चक्कर आना शामिल हैं। गंभीर मामलों में यह तंत्रिका तंत्र पर भी असर डाल सकता है और जानलेवा स्थिति पैदा कर सकता है।
क्या अंकुरित आलू को खाया जा सकता है?
राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया की पांच साल अनुभवी चिकित्साधिकारी डॉ वंदना उपाध्याय ने कहा कि, //यदि आलू केवल हल्का अंकुरित है और उस पर हरे धब्बे नहीं हैं, तो उसका उपयोग किया जा सकता है, लेकिन अंकुर और आस-पास का हिस्सा काटकर फेंक देना चाहिए//।
नुकसानदायक
इसके साथ ही, पकाने से पहले उसे अच्छी तरह छीलकर धोना जरूरी है। लेकिन अगर आलू पर ज्यादा हरे धब्बे हैं, उसमें बदबू आ रही है या वह बहुत नरम हो गया है, तो उसे बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
कैसे बचाएं आलू को अंकुरित होने से?
आलू को ठंडी, सूखी और हवादार जगह पर रखें। इसे कभी भी फ्रिज में न रखें, क्योंकि वहां नमी अधिक होने से अंकुर निकलने की संभावना बढ़ जाती है। साथ ही, आलू को प्याज के साथ न रखें, क्योंकि प्याज से निकलने वाली गैसें भी अंकुरण की प्रक्रिया को तेज कर देती हैं।
अंकुरित आलू फेकना ही सही
अंकुरित आलू का सेवन सेहत के लिए जोखिम भरा हो सकता है। हल्का अंकुरित आलू सावधानी से खाया जा सकता है, लेकिन यदि उसमें अधिक सोलानाइन विकसित हो गया है, तो उसे फेंकना ही बेहतर है। सेहत को खतरे में डालकर जोखिम उठाना समझदारी नहीं है।
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