छत्तीसगढ़ के 25 वर्षों के विकास यात्रा पर जोर
खबर वर्ल्ड न्यूज-राकेश पांडेय-जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के आदिवासी समाज की सांस्कृतिक धरोहर को समर्पित नवाखानी जोहार भेंट कार्यक्रम आज बस्तर संभाग के मुख्यालय जगदलपुर स्थित वन विद्यालय में धूमधाम से आयोजित हुआ। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विशेष रूप से शिरकत की और इसे ‘गौरव का क्षण’ करार दिया। कार्यक्रम में सैकड़ों आदिवासी बंधुओं ने भाग लिया, जहां पारंपरिक नृत्य, लोकगीत और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ राज्य के 25 वर्षों की रजत जयंती, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के शताब्दी वर्ष और आदिवासी उत्थान की योजनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।
मुख्यमंत्री साय ने संबोधन में कहा कि यह कार्यक्रम न केवल सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है, बल्कि आदिवासी समाज को संगठित करने का माध्यम भी बनेगा। उन्होंने बताया कि नवाखानी जोहार भेंट के बाद उन्होंने बस्तर संभागीय धुरवा समाज भवन और महारा समाज भवन का लोकार्पण किया। इन भवनों का निर्माण आदिवासी समुदायों के सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों के लिए किया गया है, जिससे समाज के विभिन्न वर्गों को एक मंच मिलेगा। “इससे निश्चित रूप से समाज को संगठित होने में सफलता मिलेगी और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित रखने में मदद मिलेगी,” उन्होंने कहा।
अटल बिहारी वाजपेयी की विरासत: छत्तीसगढ़ निर्माण से आदिवासी सशक्तिकरण तक
कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण में मुख्यमंत्री ने भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी को याद किया। उन्होंने बताया कि वाजपेयी जी ने 32 फीसदी जनजातीय आबादी वाले छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण 1 नवंबर 2000 को किया था, ताकि आदिवासी समाज का समग्र विकास हो सके। 2025 में राज्य के 25 वर्ष पूरे होने पर रजत जयंती वर्ष के रूप में पूरे प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए साय ने कहा, “यह वर्ष वाजपेयी जी का शताब्दी वर्ष भी है, इसलिए सरकार ने इसे ‘अटल निर्माण वर्ष’ घोषित किया है।”
आंकड़ों के आधार पर मुख्यमंत्री ने वाजपेयी सरकार की योगदान पर जोर दिया। 2011 की जनगणना के अनुसार छत्तीसगढ़ की कुल जनसंख्या 2.55 करोड़ थी, जिसमें लगभग 78 लाख (30.62%) आदिवासी थे। अनुमानित आंकड़ों के अनुसार 2025 तक राज्य की जनसंख्या बढ़कर करीब 3.02 करोड़ हो चुकी है, जिसमें आदिवासी आबादी लगभग 92 लाख (30%) है। वाजपेयी जी ने प्रधानमंत्री रहते आदिवासी समुदाय को प्रतिनिधित्व देने के लिए आदिम जाति विकास मंत्रालय का गठन किया, जो पहले कभी नहीं हुआ था। इससे आदिवासी कल्याण योजनाओं को अलग से प्राथमिकता मिली।
भाजपा सरकार की पहल: प्राधिकरणों से आदिवासी क्षेत्रों में क्रांति
मुख्यमंत्री ने भाजपा सरकार की आदिवासी कल्याण नीतियों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह के नेतृत्व में 2000 के दशक में सरगुजा और बस्तर के लिए अलग-अलग विकास प्राधिकरण गठित किए गए। इन प्राधिकरणों ने सरकारी योजनाओं से परे उन कार्यों को पूरा किया जो आदिवासी क्षेत्रों की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप थे।
- बस्तर विकास प्राधिकरण की उपलब्धियां: गठन के बाद से इस प्राधिकरण ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विस्तार किया। 2025 तक बस्तर में कुल 52,000 करोड़ रुपये के निवेश से औद्योगिक विकास हुआ है, जिसमें फार्मा, टेक्सटाइल, आईटी और एयरोस्पेस सेक्टर शामिल हैं। कौशल विकास योजना के तहत 90,000 से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया, जिससे 39,000 से अधिक को रोजगार मिला। तेंदूपत्ता संग्राहकों की दर 4,000 रुपये से बढ़ाकर 5,500 रुपये प्रति बोरा की गई। पर्यटन को उद्योग का दर्जा देकर होटल, ईको-टूरिज्म और वेलनेस प्रोजेक्ट्स पर 45% तक सब्सिडी दी गई, जिससे नक्सल प्रभावित परिवारों और एससी/एसटी उद्यमियों को विशेष लाभ हुआ।
- सरगुजा विकास प्राधिकरण की उपलब्धियां: इस प्राधिकरण ने सरगुजा के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा और सिंचाई पर फोकस किया। हालांकि विशिष्ट आंकड़े सीमित हैं, लेकिन राज्य स्तर पर इन प्राधिकरणों ने मिलकर 20 वर्षों में आदिवासी क्षेत्रों में 15,000 किलोमीटर से अधिक सड़कें, 500 से अधिक स्वास्थ्य केंद्र और 1,000 स्कूलों का निर्माण सुनिश्चित किया। सरगुजा जिले में 2025 तक जनसंख्या अनुमानित 2.5 लाख आदिवासियों की है, जहां प्राधिकरण ने वन उत्पादों के माध्यम से 50,000 परिवारों को आय स्रोत प्रदान किया।
धरती आबा उत्कर्ष योजना: मोदी सरकार का आदिवासी उत्थान का नया अध्याय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ (DAJGUA) का विशेष उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह योजना आदिवासियों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का माध्यम है। 2 अक्टूबर 2024 को महात्मा गांधी जयंती पर झारखंड के हजारीबाग से शुरू हुई इस योजना का कुल बजट 79,156 करोड़ रुपये है, जिसमें केंद्र का हिस्सा 56,333 करोड़ और राज्यों का 22,823 करोड़ है।
यह अभियान 30 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 549 जिलों और 2,911 ब्लॉकों में 63,843 गांवों को कवर करेगा, जिससे 5 करोड़ से अधिक आदिवासियों को लाभ मिलेगा। छत्तीसगढ़ में यह योजना बस्तर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका और बुनियादी ढांचे पर केंद्रित है। 17 मंत्रालयों के माध्यम से 25 योजनाओं का एकीकरण कर सामाजिक अंतराल को समाप्त किया जा रहा है। 2025 में 15 जून से 30 जून तक जागरूकता और लाभ सत्यापन अभियान चलाया गया, जिसमें छत्तीसगढ़ के 92 लाख आदिवासियों में से 20 लाख से अधिक को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचा। योजना के तहत विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTG) के लिए पेंशन, बीमा और रोजगार योजनाएं प्राथमिकता में हैं।
आदिवासी समाज का संकल्प: विकास और संस्कृति का संतुलन
कार्यक्रम का समापन मुख्यमंत्री के आह्वान पर हुआ, जिसमें उन्होंने कहा, “आदिवासी समाज की जड़ें जंगल-जमीन से जुड़ी हैं, लेकिन आधुनिक विकास से हमें अलग नहीं होना चाहिए। धरती आबा योजना और प्राधिकरणों के माध्यम से हम यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई आदिवासी पीछे न छूटे।” कार्यक्रम में केंद्रीय आदिवासी मामलों के मंत्री अर्जुन मुंडा के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे, जिन्होंने ठाकुर जोहारनी की शुभकामनाएं दीं।
यह आयोजन छत्तीसगढ़ के आदिवासी समाज के लिए एक मील का पत्थर साबित हुआ, जहां सांस्कृतिक उत्सव के साथ विकास की योजनाओं का बीज बोया गया। राज्य सरकार ने घोषणा की कि रजत जयंती वर्ष में 100 ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि आदिवासी गौरव को नई ऊंचाइयों पर ले जाया जा सके।


