खबर वर्ल्ड न्यूज-राकेश पांडेय-जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में आयोजित होने वाले जगप्रसिद्ध बस्तर दशहरा महोत्सव को इस वर्ष एक नई ऊंचाई मिलने जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बस्तर दशहरा एवं मुरिया दरबार में भाग लेने का निमंत्रण स्वीकार कर लिया है। वे 4 अक्टूबर 2025 को बस्तर पहुंचेंगे और इस ऐतिहासिक आयोजन में शिरकत करेंगे। यह जानकारी बस्तर दशहरा समिति के अध्यक्ष एवं बस्तर सांसद महेश कश्यप ने दी है। नई दिल्ली में आयोजित एक औपचारिक मुलाकात में सांसद कश्यप के नेतृत्व में मांझी, चालकी एवं मेबरिन प्रतिनिधिमंडल ने गृह मंत्री को निमंत्रण पत्र सौंपा, साथ ही मां दंतेश्वरी की पवित्र तस्वीर भेंट की। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सहित पूरे मंत्रीमंडल के भी महोत्सव में शामिल होने की पुष्टि हो चुकी है, जिससे इस वर्ष का दशहरा और भी भव्य एवं राष्ट्रीय स्तर का बनने की संभावना है।
बस्तर दशहरा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि आदिवासी संस्कृति, लोक परंपराओं और सामाजिक एकता का अनुपम संगम भी है। यह महोत्सव दुनिया का सबसे लंबा दशहरा उत्सव माना जाता है, जो सामान्यतः 75 दिनों तक चलता है। इसकी शुरुआत श्रावण अमावस्या (जुलाई-अगस्त) से होती है और विजयादशमी (अक्टूबर) तक जारी रहती है। 2024 में यह 77 दिनों तक मनाया गया था, जबकि कुछ विशेष वर्षों में यह अवधि 107 दिनों तक विस्तारित हो चुकी है। महोत्सव की शुरुआत 15वीं शताब्दी में बस्तर के राजा पुरुषोत्तम देव द्वारा की गई थी, जो लगभग 600 वर्ष पुरानी परंपरा का हिस्सा है। यह रावण वध की पारंपरिक कथा से अलग है, जहां मुख्य फोकस मां दंतेश्वरी की शक्ति उपासना और स्थानीय देवी-देवताओं के सम्मान पर होता है। पूरे बस्तर संभाग से सैकड़ों देवी-देवता एकत्र होकर ‘देवी का विवाह’ और ‘रथ यात्रा’ जैसे अनूठे अनुष्ठानों में भाग लेते हैं।
मुरिया दरबार इस महोत्सव का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो आदिवासी समुदाय की प्राचीन ‘संसद’ के रूप में जाना जाता है। यह दरबार बस्तर की सामाजिक संरचना और शासन व्यवस्था का जीवंत प्रतीक है, जहां जनता की आवाज सीधे राजपरिवार तक पहुंचती है। मुरिया दरबार में युवा आदिवासी (मुरिया) राजा के समक्ष अपनी मांगें, शिकायतें और सुझाव रखते हैं, जो लोकतांत्रिक मूल्यों की मिसाल है। 2024 में संपन्न मुरिया दरबार में हजारों आदिवासियों ने भाग लिया था, और इसकी परंपरा आज भी बस्तर की सांस्कृतिक गरिमा को बनाए रखती है। अमित शाह की उपस्थिति से यह दरबार न केवल राष्ट्रीय ध्यान का केंद्र बनेगा, बल्कि नक्सलवाद मुक्त बस्तर की प्रगति को भी रेखांकित करेगा। गृह मंत्री ने ट्वीट कर कहा, “नक्सलवाद से मुक्ति की ओर अग्रसर बस्तर अपने त्योहारों को शांति और उत्साह के साथ मना रहा है।”
आंकड़ों के लिहाज से बस्तर दशहरा छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण इंजन है। पिछले वर्षों में बस्तर क्षेत्र में पर्यटकों की संख्या में जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई है। 2020 में महज 20,950 पर्यटक पहुंचे थे, जो 2023 तक बढ़कर 1.76 लाख से अधिक हो गई। 2021 में यह संख्या 92,000 थी, जबकि 2023 में 2 लाख का आंकड़ा पार कर लिया गया। दशहरा महोत्सव के दौरान यह संख्या और दोगुनी हो जाती है, क्योंकि यहां से ओडिशा, आंध्र प्रदेश, बंगाल और महाराष्ट्र से हजारों पर्यटक आते हैं। 2024 के महोत्सव में अनुमानित 3 लाख से अधिक पर्यटकों ने भाग लिया, जिससे स्थानीय होटलों, रिसॉर्ट्स और हस्तशिल्प बाजारों को लाखों रुपये का लाभ हुआ। इस वर्ष के लिए बजट 1.5 करोड़ रुपये आवंटित किया गया है, जो 2022 के 86 लाख रुपये से काफी अधिक है। यह बजट रस्मों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और पर्यटक सुविधाओं पर खर्च होगा। इसके अलावा, दशहरा वन में वृक्षारोपण जैसे पर्यावरणीय प्रयास भी शामिल हैं, जो महोत्सव की स्थिरता को मजबूत बनाते हैं।
बस्तर दशहरा न केवल सांस्कृतिक धरोहर है, बल्कि पर्यटन विकास का माध्यम भी। केंद्रीय गृह मंत्री की भागीदारी से इसकी अंतरराष्ट्रीय पहचान और मजबूत होगी, जिससे आने वाले वर्षों में पर्यटकों की संख्या 5 लाख तक पहुंचने की संभावना है। समिति ने सभी तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए हैं, ताकि यह महोत्सव बस्तर की एकता और समृद्धि का संदेश दुनिया तक पहुंचाए। अधिक जानकारी के लिए बस्तर दशहरा समिति से संपर्क करें।


