वोटर लिस्ट अनियमितताओं पर केंद्रित जनजागरण अभियान
खबर वर्ल्ड न्यूज-रायपुर। छत्तीसगढ़ में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) द्वारा आयोजित तीन दिवसीय ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ वोटर अधिकार रैली का आज भिलाई में धूमधाम से समापन हो गया। यह रैली न केवल राज्य की राजनीति को गरमा देने वाली साबित हुई, बल्कि वोटर लिस्ट में कथित अनियमितताओं और चुनावी धांधली के खिलाफ जनता को जागरूक करने का एक मजबूत मंच बनी। रैली में प्रदेश प्रभारी एवं ऑल इंडिया कांग्रेस कमिटी (AICC) महासचिव सचिन पायलट के नेतृत्व में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, विपक्ष के नेता चरणदास महंत, पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव समेत वरिष्ठ नेता सक्रिय रहे। अनुमानित आंकड़ों के अनुसार, इस अभियान में कुल 5 लाख से अधिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों ने भाग लिया, जो राज्य के 11 जिलों में फैली सभाओं और मार्चों में शामिल हुए।
रैली का शुभारंभ 16 सितंबर को रायगढ़ से हुआ था, जहां सचिन पायलट ने झारसुगुड़ा एयरपोर्ट पर पहुंचने के बाद दोपहर 4 बजे सिग्नेचर अभियान और पदयात्रा का उद्घाटन किया। पहले दिन कोरबा में शाम 7:30 बजे रैली और सिग्नेचर कैंपेन आयोजित की गई, जहां स्थानीय स्तर पर 10,000 से अधिक लोगों ने भाग लिया। दूसरे दिन (17 सितंबर) का मार्ग रतनपुर (बिलासपुर) से शुरू होकर तखतपुर, मुंगेली, बेमेतरा होते हुए राजनांदगांव पहुंचा। प्रत्येक स्टॉप पर आयोजित सभाओं में औसतन 15,000-20,000 श्रोताओं ने हिस्सा लिया, जहां वोट चोरी के मुद्दे पर जोरदार बहस हुई। तीसरे और अंतिम दिन (18 सितंबर) रैली ने राजनांदगांव (सुबह 11 बजे), दुर्ग (दोपहर 12:30 बजे) और भिलाई (दोपहर 2:45 बजे) को कवर किया। भिलाई के समापन समारोह में 50,000 से अधिक लोगों की उपस्थिति दर्ज की गई, जहां मशाल जुलूस, मोटरसाइकिल रैली और सार्वजनिक सभाओं के माध्यम से ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ का नारा गूंजा। कुल मिलाकर, यह 530 किलोमीटर लंबी पदयात्रा राज्य के ग्रामीण और शहरी इलाकों को जोड़ने वाली साबित हुई।
कांग्रेस का यह अभियान मुख्य रूप से 2023 विधानसभा चुनावों में कथित वोटर लिस्ट अनियमितताओं पर केंद्रित रहा। पार्टी नेताओं ने दावा किया कि भाजपा सरकार और निर्वाचन आयोग (EC) ने डिजिटल वोटर लिस्ट्स राजनीतिक दलों को उपलब्ध नहीं कराईं, जिससे चुनावी धांधली संभव हुई। राहुल गांधी द्वारा पेश किए गए ‘प्रमाणों’ का हवाला देते हुए कांग्रेस ने कहा कि राज्य में 2.3 करोड़ पंजीकृत वोटरों में से कम से कम 5-7 लाख नामों में फर्जी एंट्रीज या हेराफेरी पाई गई, जो खासकर नक्सल प्रभावित और आदिवासी बहुल जिलों में ज्यादा थी। उदाहरण के तौर पर, राजनांदगांव और दुर्ग जैसे जिलों में 20,000 से अधिक ‘डुप्लिकेट वोटर आईडी’ की शिकायतें दर्ज की गईं, जबकि बेमेतरा में 15% वोटर लिस्ट में नाम कटौती के मामले सामने आए। पार्टी के अनुसार, इन अनियमितताओं ने 35 विधानसभा सीटों पर परिणाम प्रभावित किए, जहां कांग्रेस को 1-2% मार्जिन से हार का सामना करना पड़ा। पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने समापन सभा में कहा, “यह जनआंदोलन वोटर के अधिकारों की रक्षा के लिए है। हम EC से मांग करेंगे कि अगले चुनावों से पहले पूर्ण ऑडिट हो।”
इसके जवाब में, भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को ‘राजनीतिक स्टंट’ करार दिया। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी को ‘मतगणना की प्रक्रिया’ का ज्ञान ही नहीं है, और वोटर लिस्ट में बोगस एंट्रीज कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा ही की गईं। भाजपा ने दावा किया कि 2023 चुनावों में EC द्वारा 1.5 लाख से अधिक संदिग्ध वोटर नाम हटाए गए, जिनमें से 60% कांग्रेस प्रभावित क्षेत्रों से थे। पार्टी ने कल से ‘सफाई अभियान’ शुरू करने की घोषणा की, जिसमें सड़क मार्च के जरिए कांग्रेस के ‘झूठे प्रचार’ का खंडन किया जाएगा।
रैली के दौरान सिग्नेचर कैंपेन में राज्यभर से 2 लाख से अधिक हस्ताक्षर एकत्र किए गए, जो EC को सौंपे जाएंगे। यह अभियान न केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित रहा, बल्कि मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे पड़ोसी राज्यों में भी समान शिकायतों को जोड़ता है, जहां कांग्रेस ने 27 विधानसभा सीटों पर ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह रैली आगामी लोकसभा उपचुनावों से पहले कांग्रेस की रणनीति का हिस्सा है, जो युवा और आदिवासी वोट बैंक को मजबूत करने पर फोकस कर रही है।
कांग्रेस नेताओं ने समापन पर कहा कि यह यात्रा समाप्त नहीं हुई, बल्कि एक बड़े आंदोलन की शुरुआत है। आने वाले दिनों में राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन और कानूनी लड़ाई जारी रहेगी। वहीं, भाजपा की ओर से चेतावनी दी गई कि ‘अराजकता फैलाने वालों’ के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। यह घटना छत्तीसगढ़ की राजनीति में नए सिरे से बहस छेड़ने वाली साबित हो रही है, जहां लोकतंत्र की मजबूती पर सवाल उठ रहे हैं।


