खबर वर्ल्ड न्यूज-रायपुर (विशेष रिपोर्ट)। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के हालिया ‘वोट चोरी’ आरोपों ने पूरे देश में हलचल मचा दी है, लेकिन छत्तीसगढ़ में यह मुद्दा और भी गरमाया हुआ है। यहां कांग्रेस और भाजपा के बीच तीखी बयानबाजी चल रही है, जहां कांग्रेस चुनाव आयोग (ईसीआई) पर भाजपा के साथ मिलीभगत का आरोप लगा रही है, वहीं भाजपा इसे कांग्रेस की हार की खीझ बता रही है। रायपुर के राजीव भवन में कांग्रेस की प्रेस कांफ्रेंस और राहुल गांधी के वीडियो प्रसारण के बाद उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने पलटवार किया, जिसने विवाद को नई ऊंचाई दी। इस रिपोर्ट में हम इस खबर का विस्तार से विश्लेषण करेंगे, जिसमें हाल के चुनावों के आंकड़े, वोटर लिस्ट की गड़बड़ियां और पार्टियों के दावों को शामिल किया गया है।
राहुल गांधी के आरोप: ‘फेक वोट्स’ और ईसीआई की मिलीभगत
राहुल गांधी ने हाल ही में लोकसभा चुनाव 2024 में बड़े पैमाने पर वोट चोरी का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि ईसीआई की मदद से भाजपा ने फेक वोटर्स को वोटर लिस्ट में जोड़ा, जिससे चुनाव परिणाम प्रभावित हुए। एक उदाहरण देते हुए राहुल ने कहा कि कर्नाटक की एक विधानसभा सीट पर ही 1,00,250 फेक वोट्स डाले गए। उन्होंने ईसीआई को ‘क्रिमिनल फ्रॉड’ का दोषी ठहराया और मांग की कि पूरी ई-वोटर डेटा सार्वजनिक की जाए। राहुल ने बेंगलुरु रैली में कहा कि उन्होंने संसद में शपथ ली है, इसलिए अलग से एफिडेविट की जरूरत नहीं।
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया। पूर्व गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा कि ईसीआई की मिलीभगत के बिना ऐसी चोरी संभव नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा पहले के चुनावों में भी इसी तरीके से जीती है। साहू ने राहुल के आरोपों का समर्थन करते हुए कहा कि भाजपा ईसीआई की ‘एजेंसी’ बनकर जवाब दे रही है, जबकि सवाल ईसीआई से पूछे गए हैं। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने रायपुर में राहुल का वीडियो दिखाया, जिसमें पूर्व मंत्री सतनारायण शर्मा, धनेंद्र साहू, अमितेश शुक्ल, विकास उपाध्याय और प्रमोद दुबे जैसे नेता मौजूद थे। कांग्रेस का दावा है कि वोटर लिस्ट में फेक एंट्रीज से लाखों वोट प्रभावित हुए, खासकर आदिवासी बहुल इलाकों में।
आंकड़ों से समझिए: लोकसभा चुनाव 2024 में छत्तीसगढ़ की 11 सीटों पर औसत वोटर टर्नआउट 68.29% से 77.42% तक रहा। उदाहरण के लिए, बस्तर सीट पर 68.29% टर्नआउट था, जहां भाजपा ने जीत दर्ज की। कांग्रेस का आरोप है कि यहां वोटर लिस्ट में 10-15% फेक नाम जोड़े गए, लेकिन ईसीआई ने इसे खारिज किया। कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ में भाजपा ने 10 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस सिर्फ 1 (कोरबा) पर सिमट गई। राहुल के दावों को कुछ रिपोर्ट्स ने ‘बेसलेस’ बताया है, क्योंकि कोई ठोस सबूत नहीं दिए गए।
भाजपा का पलटवार: ‘कांग्रेस की बुद्धि पर दया आती है’
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “कांग्रेस नेताओं की बुद्धि पर दया आती है। ईवीएम पर सवाल उठाते हैं, लेकिन जब जीतते हैं तो चुप रहते हैं। अब वोटर लिस्ट पर अटक गए हैं।” साव ने वोटर लिस्ट तैयार करने की वैधानिक प्रक्रिया का हवाला दिया, जिसमें दावे-आपत्तियां और जांच शामिल होती है। उन्होंने पंचायत चुनावों का जिक्र किया, जहां बैलेट पेपर से वोटिंग हुई और कांग्रेस हारी। साव ने चुटकी ली कि “वोटर लिस्ट के बाद कांग्रेस का कोई और प्लान होगा।”
आंकड़ों से देखें भाजपा का पक्ष: फरवरी 2025 में छत्तीसगढ़ पंचायत चुनाव तीन चरणों में हुए, जहां बैलेट पेपर का इस्तेमाल किया गया। पहले चरण में 75.86% टर्नआउट, दूसरे में औसत 77% और तीसरे में 77.54% टर्नआउट दर्ज हुआ। कुल 33 जिलों के 53 विकासखंडों में वोटिंग हुई, और भाजपा ने अधिकांश सीटों पर कब्जा किया, जबकि कांग्रेस को झटका लगा। विकिपीडिया के अनुसार, 11 फरवरी 2025 को 10 नगर निकायों सहित चुनाव हुए, जहां भाजपा की जीत ने कांग्रेस के दावों को कमजोर किया। महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी राहुल के आरोपों को ‘बेसलेस’ बताया, कहते हुए कि महायुति की जीत जनता की मेहनत से हुई।


