नई दिल्ली। कनेर का फूल केवल सुंदरता का प्रतीक नहीं है, बल्कि आयुर्वेद में एक महत्वपूर्ण औषधि के रूप में भी जाना जाता है। कनेर के फूलों को पीसकर त्वचा पर लगाने से फोड़े-फुंसी, दाने और संक्रमण से राहत मिलती है। इसमें एंटीबैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो त्वचा की सूजन को कम करने में मदद करते हैं।
गांव में साधारण सा दिखने वाला यह फूल कई बीमारियों के लिए रामबाण औषधि के रूप में काम करता है। इस फूल को कनेर का फूल कहा जाता है।
कनेर जो अपनी खूबसूरती के साथ-साथ औषधीय गुणों के लिए भी जाना जाता है। यह पीले, गुलाबी और सफेद रंगों में पाया जाता है और इसे भगवान शिव को अर्पित करने की परंपरा भी है।
आयुर्वेदिक आचार्य देवेंद्र कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि कनेर का वैज्ञानिक नाम Nerium oleander है ।इसमें फ्लेवोनोइड्स, ग्लाइकोसाइड्स, टैनिन्स और एंटीऑक्सीडेंट्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
कनेर के फूलों को पीसकर त्वचा पर लगाने से फोड़े-फुंसी, दाने और संक्रमण से राहत मिलती है। इसमें एंटीबैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं।
बवासीर की समस्या में कनेर के फूलों का सेवन फायदेमंद साबित होता है। इसके फूलों का रस सूजन और दर्द को कम करने में मदद करता है।
कनेर के फूलों का तेल या पेस्ट जोड़ो और मांसपेशियों के दर्द में लगाने से सूजन कम होती है और दर्द से छुटकारा मिलता है।
कनेर के फूलों से बना तेल बालों की जड़ों को मजबूत करता है और डैंड्रफ को दूर करने में सहायक होता है। बल्कि आयुर्वेद में एक महत्वपूर्ण औषधि के रूप में भी जाना जाता है।
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