सनातन धर्म में जीवन के कर्मों को गहराई से समझाया गया है। अच्छे कर्म करने पर आपको अच्छे फल की प्राप्ति होती है, लेकिन गलत कर्म करने पर आपको उसका फल पाप के रूप में भुगतना पड़ता है।
पाप को 3 श्रेणियों में बांटा गया है। इसमें कायिक, वाचिक और मानसिक पाप शामिल है। सनातन धर्म में 10 अलग-अलग पाप करने पर अलग तरह की सजा दी जाती है। ऐसे में जानते हैं सनातन धर्म के अनुसार 10 तरह के पाप कौन-कौन से हैं?
कायिक पाप क्या है?
पाप की सबसे पहली श्रेणी कायिक है। कायिक पाप का मतलब जो पाप शरीर द्वारा किए गए हो। इसमें चोरी करना, हत्या करना, हिंसा करना और परस्त्रीगमन यानी पराई स्त्री के साथ संबंध स्थापित करना शामिल है।
कायिक पाप (शरीर से किए गए पाप)
चोरी करना यानी किसी दूसरे की वस्तु बिना अनुमति के लेना।
किसी की हत्या करना या शारीरिक हानि पहुंचाना।
किसी भी पराई स्त्री के साथ शारीरिक संबंध बनाना।
हिंदू धर्म के 10 पाप: कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलतियां? जानें गंभीर परिणाम!
वाचिक पाप क्या है?
पाप की दूसरी श्रेणी वाचिक है। वाचिक पाप का मतलब वाणी से किए गए पाप। इस तरह के पाप में किसी के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करना, निंदा करना, व्यर्थ की बात करना और झूठ बोलना शामिल है।
वाचिक पाप (वाणी से किए गए पाप)
किसी के प्रति अपशब्दों का प्रयोग करना।
दूसरों की बुराई करना भी वाचिक पाप है।
बिना कारण के बातें करना।
जानबूझकर या बार-बार झूठ बोलना।
पाप की तीसरी श्रेणी क्या है?
पाप की तीसरी श्रेणी मानसिक पाप है। जिसमें मन से पाप किया जाता है। मानसिक पाप में दूसरों के धन की लालसा रखना, दूसरों का गलत सोचना और मिथ्या दुराग्रह करना शामिल है।
मानसिक पाप (मन से किए गए पाप)
दूसरों के धन पर लालच या ईर्ष्या करना।
किसी के लिए बुरा सोचना या चाहना।
गलत तरह की बातों पर अड़े रहना है।
हिंदू धर्म शास्त्रों के मुताबिक इन पापों से हमेशा बचने की सलाह दी जाती है। इसके साथ ही ये आत्मिक शुद्धि और मृत्यु के पश्चात मोक्ष के लिए भी जरूरी है। हालांकि इन सबसे जरूरी बात इस तरह के कर्म से दूर रहने पर आत्मिक शांति का एहसास होता है।
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है। यहां यह बताना जरूरी है कि K.W.N.S. किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।
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