खबर वर्ल्ड न्यूज-कबीरधाम। कबीरधाम जिले में पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, जहां एक शासकीय शिक्षिका के घर से ₹35 लाख की नकदी चोरी होने के मामले में असली आरोपी को छोड़कर पुलिस ने उसके दो दोस्तों को अवैध हिरासत, मारपीट, और जबरन वसूली का शिकार बना दिया। यह मामला अब राज्य स्तर पर सुर्खियों में है, जहां “इंस्पेक्टर राज” के तहत न्याय प्रणाली के दुरुपयोग और पुलिसिया गुंडागर्दी के आरोप लग रहे हैं।
शासकीय शिक्षिका सूरसरी उमरे, जो कबीरधाम में पदस्थ हैं, उनके पुत्र दिव्यांशु उमरे ने घर में रखी ₹35 लाख की नकदी चुपचाप निकाल ली और कथित तौर पर दोस्तों के साथ मौज-मस्ती में खर्च कर दी। जब मामला सामने आया, तो आश्चर्यजनक रूप से पुलिस ने दिव्यांशु पर कड़ी कार्रवाई करने के बजाय शिवा श्रीवास (रानी डेहरा) और ओमप्रकाश साहू (रबेली) को निशाना बनाया।
थाने में छह घंटे तक अवैध हिरासत और मारपीट:
20 मई 2025 को दोपहर 2:30 बजे से रात 10:00 बजे तक दोनों युवकों को बिना किसी प्राथमिकी के हिरासत में रखा गया। आरोप है कि:
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थाने में बर्बरतापूर्वक मारपीट की गई।
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₹31 लाख शिक्षिका को लौटाने और ₹2 लाख थाने में देने का दबाव बनाया गया।
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ओमप्रकाश की कार (CG 09 JS 5167) को भी यह कहकर कब्जे में ले लिया गया कि वह चोरी की राशि से खरीदी गई है, जबकि युवक ने खरीदी का पूरा वैध विवरण पुलिस को प्रस्तुत किया।
शिकायतकर्ताओं को ही बना दिया आरोपी:
31 मई और 1 जून को पीड़ित युवकों ने मुख्यमंत्री, डीजीपी, आईजी और एसपी को विस्तृत शिकायत सौंपी, जिसमें:
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बैंक स्टेटमेंट,
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जब्त की गई गाड़ी की तस्वीरें,
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और RTI आवेदन में थाना परिसर की CCTV फुटेज की प्रति की मांग की गई थी।
इसके बाद 5 जून 2025 को, पुलिस ने झल्लाकर उल्टे शिवा और ओमप्रकाश पर ही झूठी FIR दर्ज कर दी, जिससे यह प्रतीत होता है कि सच्चाई दबाने के लिए पुलिस ‘शिकायतकर्ता को ही अपराधी’ बना रही है।
असली सवाल जो अब उठ रहे हैं:
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₹35 लाख की नकदी एक शासकीय शिक्षिका और उसके पिता के पास कहां से आई?
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इतनी बड़ी रकम नगद घर में रखना क्या आयकर और लोक सेवा नियमों का उल्लंघन नहीं है?
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क्या पुलिस जानबूझकर शिक्षिका और उसके पुत्र को बचाने के लिए दोस्तों को टारगेट कर रही है?
प्रशासन और सरकार से मांगें:
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निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कमेटी गठित की जाए।
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मारपीट में शामिल पुलिसकर्मियों पर तत्काल निलंबन और FIR दर्ज की जाए।
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थाने की CCTV फुटेज सार्वजनिक की जाए।
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शिकायतकर्ताओं को सुरक्षा और न्याय मिले।
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शासकीय सेवक के पास नगद ₹35 लाख मिलने की जांच आयकर और EOW से कराई जाए।


