Khabarworld24.com -भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से नाराज़गी के चलते राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) ने दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के लिए शुक्रवार को 30 सीटों पर अपने उम्मीदवारों का ऐलान किया है। राकांपा प्रमुख अजित पवार की अगुवाई में पार्टी ने यह कदम उठाया, जिसमें 13 उम्मीदवार अल्पसंख्यक समुदाय से हैं। यह फैसला भाजपा द्वारा महाराष्ट्र के इस प्रमुख सहयोगी दल को नजरअंदाज करने के बाद लिया गया है, जबकि बिहार में जनता दल यूनाइटेड (जदयू) और लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) (रामविलास) को एक-एक सीटें दी गईं।
राकांपा का दिल्ली में स्वतंत्र चुनाव लड़ने का निर्णय
दिल्ली चुनाव में भाजपा से गठबंधन न होने के कारण राकांपा ने अकेले चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया है। पार्टी ने दिल्ली में उन 30 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं, जहां उसे अपनी रणनीतिक जीत की संभावना नजर आती है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि “हमने जिन क्षेत्रों में अल्पसंख्यक समुदायों की संख्या अधिक है और हमारी पार्टी की पहचान है, वहां से उम्मीदवार उतारे हैं। इसमें दिल्ली के कई अहम इलाके शामिल हैं।”
अल्पसंख्यक समुदाय को दिया खास महत्व
राकांपा द्वारा घोषित 30 उम्मीदवारों में से 13 अल्पसंख्यक समुदाय से आते हैं, जो कि कुल उम्मीदवारों का करीब 43% है। पार्टी का मानना है कि अल्पसंख्यक वोटों को साधकर वह दिल्ली चुनाव में एक मजबूत दावेदारी पेश कर सकती है। अल्पसंख्यक समुदाय के लिए पार्टी का विशेष ध्यान इस बात का संकेत है कि वे इस समुदाय के मतदाताओं की समस्याओं और मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की योजना बना रही है।
भाजपा से असंतोष
राकांपा ने भाजपा पर आरोप लगाया है कि उसने महाराष्ट्र में अपने प्रमुख सहयोगी को नजरअंदाज किया, जबकि बिहार में जदयू और लोजपा (रामविलास) को सीटें दी गईं। राकांपा नेताओं का मानना है कि भाजपा का यह रवैया उसके लिए एक स्पष्ट संदेश था कि राष्ट्रीय स्तर पर वह उनके साथ गठबंधन को प्राथमिकता नहीं देती। इस नाराजगी के कारण ही पार्टी ने दिल्ली में अपने दम पर चुनाव लड़ने का फैसला किया।
आगामी चुनावों में असर
राकांपा के इस फैसले का असर आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा और राकांपा के बीच संबंधों पर भी पड़ सकता है। दिल्ली जैसे महत्वपूर्ण चुनावी क्षेत्र में एनसीपी का स्वतंत्र चुनाव लड़ना भाजपा के लिए चुनौती बन सकता है। वहीं, राकांपा के इस निर्णय से विपक्षी दलों को भी एक नया सहयोगी मिल सकता है, जो अल्पसंख्यक वोट बैंक में अपनी पकड़ रखता है।
राकांपा की रणनीति
राकांपा इस चुनाव में दिल्ली के अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों और उन इलाकों पर ध्यान केंद्रित कर रही है जहां पार्टी को समर्थन मिलने की संभावना है। पार्टी के कार्यकर्ताओं ने विभिन्न इलाकों में प्रचार शुरू कर दिया है और अल्पसंख्यक समुदायों के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की कोशिश कर रहे हैं। इसके साथ ही राकांपा ने स्थानीय मुद्दों जैसे पानी, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा पर भी फोकस किया है, जो दिल्ली के मतदाताओं के लिए अहम हैं।
निष्कर्ष
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में एनसीपी का अकेले चुनाव लड़ना और अल्पसंख्यक समुदायों पर विशेष ध्यान देना चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। भाजपा से अलग होकर अपनी राह चुनने का यह फैसला राकांपा के लिए एक बड़ा राजनीतिक जोखिम हो सकता है, लेकिन पार्टी का मानना है कि इसे अल्पसंख्यक और अन्य समुदायों का व्यापक समर्थन मिल सकता है।
आंकड़े
- कुल उम्मीदवार: 30
- अल्पसंख्यक समुदाय से उम्मीदवार: 13 (43%)
- गठबंधन में शामिल दल: कोई नहीं
बालकृष्ण साहू – सोर्स विभिन्न आर्टिकल्स

