khabarworld24.com -आंखें हमारी सबसे महत्वपूर्ण इंद्रियों में से एक हैं, लेकिन तेजी से बदलते डिजिटल युग में हम अनजाने में कई ऐसी आदतें अपना लेते हैं जो आंखों की सेहत को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकती हैं। हाल के अध्ययनों के अनुसार, बुरी आदतों का लगातार पालन करना आंखों की दृष्टि पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इन आदतों में सुधार नहीं किया गया, तो दृष्टि संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। यहां कुछ आम आदतों और उनके प्रभाव के साथ वैज्ञानिक आंकड़े प्रस्तुत किए जा रहे हैं।
1. स्क्रीन के सामने ज्यादा समय बिताना:
आधुनिक जीवनशैली में औसतन एक व्यक्ति 7-8 घंटे से ज्यादा समय डिजिटल स्क्रीन के सामने बिताता है। एक अध्ययन में पाया गया कि 60% से अधिक लोगों को डिजिटल आई स्ट्रेन या ड्राई आई सिंड्रोम की शिकायत होती है। स्क्रीन पर लंबे समय तक काम करने से आंखों की थकान, जलन, धुंधलापन और दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। भारत में हाल ही में हुए एक सर्वे में 30% से अधिक युवा वर्ग ने माना कि उनके पास दिनभर में आंखों को आराम देने के लिए समय नहीं होता।
2. अंधेरे में स्क्रीन देखना:
कम रोशनी में मोबाइल, लैपटॉप या टीवी देखना आंखों पर अतिरिक्त दबाव डालता है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी की रिपोर्ट के अनुसार, लंबे समय तक ऐसा करने से आंखों की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। इससे दृष्टि में अस्थायी धुंधलापन और सिरदर्द की समस्या उत्पन्न हो सकती है। इसके साथ ही, लगातार ऐसा करने से आंखों के अंदरूनी हिस्से पर तनाव पड़ता है, जिससे दीर्घकालिक दृष्टि हानि का खतरा बढ़ जाता है।
3. पर्याप्त नींद न लेना:
नींद की कमी से न सिर्फ शरीर बल्कि आंखों पर भी बुरा असर पड़ता है। नींद की कमी से आंखों में सूजन, लालिमा और थकान की समस्या हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रति रात 7-8 घंटे की नींद आंखों की सेहत के लिए आवश्यक है। नेशनल स्लीप फाउंडेशन की रिपोर्ट के अनुसार, 35% से अधिक लोग पर्याप्त नींद नहीं ले पाते, जिससे उनकी आंखों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
4. आंखों को बार-बार मलना:
कई लोग आदतन आंखों को मलते हैं, खासकर तब जब उनमें खुजली या जलन महसूस होती है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अनुसार, बार-बार आंखों को मलने से आंखों के चारों ओर की नाजुक त्वचा को नुकसान पहुंचता है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। यह विशेष रूप से उन लोगों में अधिक पाया गया है जो धूल और प्रदूषण वाले क्षेत्रों में काम करते हैं।
5. धूप में बिना सनग्लासेस के रहना:
सूरज की अल्ट्रावायलेट (UV) किरणें आंखों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं। बिना UV सुरक्षा के लंबे समय तक धूप में रहने से मोतियाबिंद, आंखों के काले धब्बे, और आंखों में अन्य विकार हो सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, भारत में हर साल लगभग 20 लाख से अधिक लोग UV किरणों के कारण होने वाले आंखों के रोगों से प्रभावित होते हैं।
6. अस्वस्थ आहार:
आंखों की सेहत के लिए विटामिन ए, सी, ई और ओमेगा-3 फैटी एसिड्स आवश्यक होते हैं। एक रिपोर्ट में बताया गया है कि भारतीयों में विटामिन ए की कमी के कारण 10% से अधिक आबादी दृष्टि संबंधित समस्याओं का सामना कर रही है। हरी पत्तेदार सब्जियां, गाजर, और मछली का सेवन आंखों के लिए बेहद फायदेमंद होता है।
विशेषज्ञों के सुझाव:
- स्क्रीन टाइम कम करें: 20-20-20 नियम अपनाएं, यानी हर 20 मिनट बाद 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखें।
- नींद पूरी लें: प्रति रात 7-8 घंटे की नींद आंखों की स्वस्थ दृष्टि के लिए अनिवार्य है।
- संतुलित आहार लें: हरी सब्जियों और विटामिन युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करें।
- सनग्लासेस का प्रयोग करें: धूप में UV सुरक्षा वाले चश्मे पहनना जरूरी है।
- आंखों की नियमित जांच कराएं: साल में कम से कम एक बार आंखों की जांच करानी चाहिए।
निष्कर्ष:
आंखों की सेहत को नजरअंदाज करना भविष्य में गंभीर दृष्टि हानि का कारण बन सकता है। इन सामान्य आदतों में सुधार लाकर आप अपनी दृष्टि को स्वस्थ और सुरक्षित रख सकते हैं। जागरूकता और सही आदतें ही आपके आंखों की दीर्घकालिक सुरक्षा का आधार बन सकती हैं।
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