खबर वर्ल्ड24-व्यास पाठक – छत्तीसगढ़ का राजस्व राज्य की आर्थिक स्थिति का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें विभिन्न स्रोतों से आय होती है, जैसे टैक्स, राज्य के खनिज संसाधन, औद्योगिकीकरण, और केंद्र से मिलने वाली अनुदान राशि। 2024 तक, राज्य के कुल राजस्व के मुख्य स्त्रोत निम्नलिखित हैं:
1. केंद्र से अनुदान और करों में हिस्सा:
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1. केंद्र सरकार से अनुदान
यह राशि केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं, परियोजनाओं, और विशेष सहायता के तहत प्रदान की जाती है।
मुख्य अनुदान क्षेत्र:
- केंद्रीय प्रायोजित योजनाएं (Centrally Sponsored Schemes):
इनमें प्रमुख योजनाएं जैसे मनरेगा, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, जल जीवन मिशन, और स्वच्छ भारत मिशन शामिल हैं। - सामाजिक कल्याण योजनाएं:
शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, और कृषि क्षेत्र के लिए विशेष अनुदान। - आपदा राहत कोष (Disaster Relief Fund):
प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए सहायता।
अनुमानित अनुदान राशि (2023-24):
- लगभग ₹15,000-₹18,000 करोड़।
(यह राशि राज्य की जरूरतों और केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं के अनुसार हर साल बदलती रहती है।)
2. केंद्र से करों में हिस्सेदारी
केंद्र सरकार द्वारा वसूले गए करों में से संविधान के अनुसार राज्यों को हिस्सा दिया जाता है।
प्रमुख कर स्रोत:
- आयकर (Income Tax):
व्यक्तियों और कॉर्पोरेट्स द्वारा चुकाया गया कर। - कॉर्पोरेट टैक्स (Corporate Tax):
कंपनियों के मुनाफे पर लागू कर। - सीमा शुल्क (Customs Duty):
आयातित और निर्यातित वस्तुओं पर कर। - उत्पाद शुल्क (Excise Duty):
वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन और बिक्री पर कर। - केंद्रीय GST (CGST):
वस्तु एवं सेवा कर का केंद्रीय हिस्सा।
अनुमानित कर हिस्सेदारी (2023-24):
- लगभग ₹12,000-₹15,000 करोड़।
(यह राशि राज्यों की जनसंख्या, कर संग्रह क्षमता, और वित्त आयोग की सिफारिशों पर आधारित होती है।)
कुल राजस्व योगदान
केंद्र से छत्तीसगढ़ को अनुमानित ₹27,000-₹33,000 करोड़ का राजस्व प्राप्त होता है।
- इसमें अनुदान और करों में हिस्सेदारी दोनों शामिल हैं।
- यह राज्य के कुल राजस्व का लगभग 50-60% हो सकता है, जो राज्य की विकास परियोजनाओं और कल्याणकारी योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण योगदान देता है।
नोट: केंद्र से मिलने वाला यह राजस्व हर साल वित्त आयोग की सिफारिशों और बजटीय आवंटन के आधार पर बदल सकता है।
- केंद्रीय प्रायोजित योजनाएं (Centrally Sponsored Schemes):
2. राज्य जीएसटी (SGST):
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छत्तीसगढ़ में राज्य जीएसटी (SGST) का संग्रह राज्य की राजस्व प्राप्ति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। 2023-24 में, छत्तीसगढ़ का अनुमानित SGST संग्रह लगभग ₹20,000 करोड़ था। आइए इस संग्रह को विस्तार से समझते हैं:
SGST क्या है?
- राज्य जीएसटी (SGST) वह कर है जो राज्य सरकार वस्तुओं और सेवाओं की बिक्री पर वसूलती है।
- यह केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए GST के तहत राज्यों को दी गई स्वायत्तता का हिस्सा है।
- SGST का मुख्य हिस्सा राज्य के भीतर की आपूर्ति से संबंधित होता है।
SGST संग्रह के प्रमुख स्रोत:
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खुदरा व्यापार (Retail Trade):
- खुदरा बिक्री जैसे कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, किराना और दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर SGST लगाया जाता है।
- खुदरा क्षेत्र छत्तीसगढ़ के SGST संग्रह में सबसे बड़ा योगदानकर्ता है।
- अनुमानित योगदान: ₹6,000-₹7,000 करोड़।
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निर्माण (Construction Sector):
- निर्माण और रियल एस्टेट क्षेत्र पर भी SGST लागू होता है, जिसमें आवासीय और व्यावसायिक भवन निर्माण शामिल हैं।
- इस क्षेत्र का SGST संग्रह में महत्वपूर्ण योगदान है।
- अनुमानित योगदान: ₹4,000-₹5,000 करोड़।
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परिवहन (Transportation):
- परिवहन सेवाओं, माल ढुलाई, और लॉजिस्टिक्स पर GST लागू होता है।
- छत्तीसगढ़ में खनिज और कृषि उत्पादों की ढुलाई के चलते परिवहन क्षेत्र से SGST का अच्छा संग्रह होता है।
- अनुमानित योगदान: ₹3,000-₹4,000 करोड़।
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सेवा क्षेत्र (Service Sector):
- होटल, रेस्तरां, आईटी सेवाएं, बैंकिंग, और वित्तीय सेवाओं पर SGST लागू होता है।
- सेवा क्षेत्र छत्तीसगढ़ में तेजी से बढ़ रहा है और SGST संग्रह का एक प्रमुख स्रोत है।
- अनुमानित योगदान: ₹5,000-₹6,000 करोड़।
3. वैट और पेट्रोलियम उत्पादों से आय:
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छत्तीसगढ़ में वैट (VAT) और पेट्रोलियम उत्पादों से आय का बड़ा हिस्सा राज्य सरकार के राजस्व में योगदान देता है। इसे निम्नलिखित विवरण के साथ समझा जा सकता है:
1. पेट्रोल और डीजल पर वैट (VAT):
- मुख्य राजस्व स्रोत:
पेट्रोल और डीजल पर लगाए गए वैट से छत्तीसगढ़ सरकार को सबसे अधिक राजस्व मिलता है। - वसूली का अनुमान:
2023-24 में पेट्रोल और डीजल से वैट के जरिए राज्य ने लगभग ₹5,000 करोड़ का राजस्व अर्जित किया। - कर संरचना:
- पेट्रोल और डीजल पर राज्य वैट की दर केंद्र के कर (उत्पाद शुल्क और सेस) से अलग होती है।
- यह दर समय-समय पर राज्य सरकार की नीति के अनुसार घटाई या बढ़ाई जाती है।
- पेट्रोलियम उत्पादों की खपत:
पेट्रोल और डीजल का उपयोग परिवहन और कृषि क्षेत्र में अधिक होता है, जिससे इनके कर संग्रह में वृद्धि होती है।
2. तंबाकू उत्पादों (गुटखा, बीड़ी, सिगरेट):
- उच्च कर दर:
तंबाकू उत्पादों पर 28% GST के अतिरिक्त राज्य वैट और सेस भी लगाया जाता है। - राजस्व अनुमान:
तंबाकू और गुटखा जैसे उत्पादों से सालाना लगभग ₹500-₹700 करोड़ का राजस्व प्राप्त होता है।
3. अन्य उत्पादों पर वैट और सेस:
- शराब और तंबाकू के अलावा, राज्य वैट अन्य उत्पादों, जैसे गैर-आवश्यक वस्तुओं और विलासिता के सामान, पर भी लगाया जाता है।
- इनमें इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद, फर्नीचर, और उपभोक्ता वस्तुएं शामिल हो सकती हैं।
- मुख्य राजस्व स्रोत:
4. खनिज संसाधनों से आय:
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छत्तीसगढ़ को खनिज संसाधनों से होने वाली आय का बड़ा हिस्सा खनिज रॉयल्टी, नीलामी शुल्क, और अन्य लेवी से प्राप्त होता है। राज्य की खनिज समृद्धि और उनके उपयोग की वजह से यह एक महत्वपूर्ण राजस्व स्रोत है। आइए इस पर विस्तार से चर्चा करें:
खनिजों से आय के प्रमुख स्रोत:
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खनिज रॉयल्टी:
खनिजों के उत्पादन और खनन पर राज्य सरकार खनिज रॉयल्टी लगाती है। यह राशि केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित दरों के आधार पर वसूली जाती है।- मुख्य खनिज:
- कोयला (Coal): छत्तीसगढ़ भारत में कोयले का सबसे बड़ा उत्पादक है।
- लौह अयस्क (Iron Ore): प्रमुख उत्पादन क्षेत्र बस्तर और दंतेवाड़ा हैं।
- बॉक्साइट (Bauxite): एल्युमिनियम उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण।
- डोलोमाइट और चूना पत्थर: सीमेंट उद्योग में उपयोग।
- 2023-24 में अनुमानित आय: ₹7,000-₹8,500 करोड़।
- मुख्य खनिज:
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खनिज ब्लॉकों की नीलामी:
खनिज खदानों की नीलामी से राज्य सरकार को एकमुश्त भुगतान और वार्षिक आय होती है।- नीलामी से आय: लगभग ₹1,000-₹1,500 करोड़।
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DMF (District Mineral Foundation) और NMET (National Mineral Exploration Trust):
खनन कंपनियों से DMF और NMET के माध्यम से अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होता है, जिसका उपयोग स्थानीय विकास और पुनर्वास के लिए किया जाता है।
प्रमुख खनिज क्षेत्रों और योगदान:
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कोयला (Coal):
- छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा खनिज उत्पाद।
- SECL (South Eastern Coalfields Limited) और अन्य निजी कंपनियों द्वारा खनन।
- कुल राजस्व का लगभग 60% कोयले से आता है।
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लौह अयस्क (Iron Ore):
- NMDC और अन्य कंपनियों के माध्यम से खनन।
- विशेष रूप से बस्तर और दंतेवाड़ा क्षेत्र में।
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बॉक्साइट और अन्य खनिज:
- एल्युमिनियम उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण।
- राजस्व में 10-15% योगदान।
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चूना पत्थर और डोलोमाइट:
- सीमेंट और निर्माण उद्योग के लिए खनन।
- राजस्व में लगभग 5-8% योगदान।
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5. शराब (दारू) से राजस्व:
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शराब (दारू) छत्तीसगढ़ सरकार के राजस्व का एक प्रमुख स्रोत है। राज्य सरकार ने शराब की बिक्री को नियंत्रित और प्रबंधित करने के लिए विशेष व्यवस्था की है।
शराब से राजस्व का विवरण:
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सरकारी नियंत्रण:
- छत्तीसगढ़ सरकार ने शराब की खुदरा बिक्री को नियंत्रित किया है।
- शराब की बिक्री सरकारी दुकानों (Chhattisgarh State Marketing Corporation Limited) के माध्यम से की जाती है।
- यह व्यवस्था शराब के अवैध कारोबार को रोकने और राजस्व में बढ़ोतरी के लिए की गई है।
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2023-24 का अनुमानित राजस्व:
- 2023-24 में शराब की बिक्री से राज्य सरकार ने लगभग ₹6,000-₹7,000 करोड़ का राजस्व अर्जित किया।
- यह राजस्व प्रति वर्ष बढ़ता जा रहा है, क्योंकि शराब की खपत में वृद्धि हो रही है।
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6. अन्य शुल्क और कर:
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छत्तीसगढ़ में अन्य शुल्क और करों से प्राप्त होने वाली आय भी राज्य के कुल राजस्व में महत्वपूर्ण योगदान करती है। इन स्रोतों से प्राप्त होने वाली आय के प्रमुख विवरण निम्नलिखित हैं:
1. स्टांप ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क
- स्टांप ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क राज्य सरकार को संपत्ति की खरीद-फरोख्त पर राजस्व प्राप्त करने का एक महत्वपूर्ण तरीका है। जब कोई व्यक्ति संपत्ति खरीदता है या बेचता है, तो उस पर स्टांप ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क वसूला जाता है।
- 2023-24 में अनुमानित आय: लगभग ₹2,000-₹3,000 करोड़। यह आय राज्य के आर्थिक गतिविधियों और रियल एस्टेट के विकास को दर्शाती है, विशेष रूप से शहरी क्षेत्रों में।
2. मोटर वाहन कर
- मोटर वाहन कर वाहनों की खरीद और पंजीकरण पर लागू होता है। इस कर को वाहन मालिकों से राज्य सरकार द्वारा वसूला जाता है।
- 2023-24 में अनुमानित आय: लगभग ₹1,000-₹1,500 करोड़। यह आय वाहन पंजीकरण, रोड टैक्स, और वाहन लाइसेंस शुल्क से प्राप्त होती है।
3. अन्य प्रमुख शुल्क और कर
इसके अलावा, छत्तीसगढ़ में अन्य कई शुल्क और करों के माध्यम से भी आय होती है, जैसे:
- वृद्धि कर (Property tax)
- खान और खनिज शुल्क
- पर्यटन शुल्क
- जलाशय शुल्क
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7. बिजली उत्पादन और वितरण से आय:
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छत्तीसगढ़ भारत के प्रमुख बिजली उत्पादक राज्यों में से एक है। राज्य अपनी कोयला आधारित बिजली उत्पादन क्षमता और ऊर्जा संसाधनों के कारण आत्मनिर्भर है। राज्य की आय बिजली उत्पादन और वितरण से संबंधित शुल्कों और टैक्स के माध्यम से होती है।
बिजली उत्पादन से राजस्व:
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बिजली उत्पादन कंपनियां:
छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी (CSPGCL) और अन्य निजी बिजली उत्पादक कंपनियां बड़े पैमाने पर बिजली उत्पादन करती हैं।- कोयला आधारित थर्मल पावर: राज्य की अधिकांश बिजली कोयला आधारित पावर प्लांट्स से आती है।
- नवीकरणीय ऊर्जा: सौर ऊर्जा और हाइड्रोपावर जैसे क्षेत्रों में भी योगदान बढ़ रहा है।
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बिजली का निर्यात:
छत्तीसगढ़ पड़ोसी राज्यों और राष्ट्रीय ग्रिड को अतिरिक्त बिजली बेचता है।- 2023-24 में बिजली निर्यात से राजस्व का एक बड़ा हिस्सा आया।
बिजली वितरण से राजस्व:
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बिजली उपभोक्ताओं से शुल्क:
राज्य बिजली वितरण के माध्यम से घरेलू, वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं से शुल्क वसूलता है।- औद्योगिक क्षेत्र, जैसे स्टील और सीमेंट उद्योग, बिजली खपत का बड़ा हिस्सा हैं।
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संचरण और वितरण कंपनियां:
छत्तीसगढ़ स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी (CSPTCL) और वितरण कंपनी (CSPDCL) उपभोक्ताओं तक बिजली पहुंचाती हैं।- इन कंपनियों के माध्यम से राज्य सरकार को नियमित शुल्क और कर प्राप्त होते हैं।
2023-24 में अनुमानित राजस्व:
- बिजली उत्पादन और बिक्री:
₹1,000-₹1,200 करोड़ (बिजली बेचने से हुई आय)। - बिजली वितरण और उपभोक्ता शुल्क:
₹500-₹800 करोड़।
कुल मिलाकर बिजली उत्पादन और वितरण से राज्य को ₹1,500-₹2,000 करोड़ के आसपास की आय हुई।
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8. पर्यटन और अन्य राजस्व:
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पर्यटन और ऐतिहासिक धरोहरों से छत्तीसगढ़ की सरकार को आय की एक महत्वपूर्ण लेकिन सीमित धारा प्राप्त होती है। राज्य में कई प्राकृतिक और ऐतिहासिक स्थल हैं जो पर्यटकों को आकर्षित करते हैं, जैसे कि चित्रकूट जलप्रपात, कांकेर और बस्तर के क्षेत्र, और कुल्हारी किला, लेकिन इस क्षेत्र में और अधिक वृद्धि की संभावना है।
1. पर्यटन से आय:
- प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन: छत्तीसगढ़ में बहुत सी प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहरों का समावेश है, जैसे कि कांकेर, बस्तर, रायगढ़, सूरजपुर, और चित्रकूट जलप्रपात। इन क्षेत्रों में बढ़ते हुए घूमने-फिरने वाले पर्यटकों से आय में इजाफा हो रहा है।
- धार्मिक पर्यटन: राज्य में महा केदारनाथ, मातारी देवी, राजिम कुम्भ, और अन्य धार्मिक स्थल भी आकर्षण का केंद्र हैं। यहां आने वाले तीर्थयात्रियों से भी राजस्व मिलता है।
हालांकि, पर्यटन से आय अब तक सीमित रही है, लेकिन राज्य सरकार द्वारा पर्यटन विभाग और सुरक्षा उपायों को बढ़ावा देने, इन्फ्रास्ट्रक्चर के सुधार और मार्केटिंग की योजनाओं के साथ इस क्षेत्र में वृद्धि की संभावना है। विशेष रूप से, बस्तर उत्सव जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रम भी पर्यटन को बढ़ावा देते हैं।
2. नगरपालिका कर और स्थानीय आय:
- नगरपालिका कर और स्थानीय कर राज्य और नगरपालिका क्षेत्रों से प्राप्त राजस्व का एक अन्य महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। यह मुख्य रूप से स्थानीय संपत्ति कर, व्यावसायिक कर, और संवेदनशील क्षेत्रों (जैसे उद्योग और व्यापार) पर लगाया जाता है।
- स्थानीय शुल्क और करों के माध्यम से नगर निगमों को राजस्व मिलता है, जिसका उपयोग स्थानीय सेवाओं और इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास में किया जाता है।
3. वन उत्पादों से आय:
- छत्तीसगढ़ का वन संसाधन भी राज्य के राजस्व का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। राज्य में लाख (lac), गोंद, तेंदूपत्ता, आंवला और अन्य वन उत्पादों की कटाई और बिक्री से आय प्राप्त होती है।
- वन विभाग इन उत्पादों का व्यापार और वितरण करता है, और इस पर वसूली जाने वाली फीस राज्य सरकार के राजस्व में योगदान करती है।
- इसके अलावा, वन्यजीव पर्यटन भी बढ़ता हुआ क्षेत्र है, जैसे कि कन्हा और बैलाडिला क्षेत्र, जो पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
4. छोटे उद्योगों से आय:
- राज्य में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (MSMEs) भी आर्थिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। इन उद्योगों से स्थानीय कर, उद्योग शुल्क और कर्मचारियों के वेतन पर कर राज्य को राजस्व प्राप्त करने में मदद करते हैं।
- हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों जैसे कुम्हारी कला, बस्तर की कांसे की मूर्तियां, और अन्य पारंपरिक उद्योग भी बढ़ती हुई आय का स्रोत हैं।
राजस्व का प्राथमिक वितरण:
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राजस्व का प्राथमिक वितरण छत्तीसगढ़ में विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के लिए किया जाता है। राज्य सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए इन क्षेत्रों में पर्याप्त संसाधन आवंटित करती है कि विकास योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू हों। यहां इसका विवरण है:
1. शिक्षा (Education):
- मुख्य उद्देश्य:
राज्य के शिक्षा क्षेत्र में सुधार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का विस्तार करना। - खर्च:
राज्य सरकार शिक्षा के लिए एक बड़ा बजट आवंटित करती है, जिसमें प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के लिए आवंटन शामिल होता है। - प्रमुख योजनाएं:
- मूलभूत शिक्षा योजना:
सभी बच्चों को मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए। - राजीव गांधी विज्ञान और प्रौद्योगिकी योजना:
विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देना।
- मूलभूत शिक्षा योजना:
2. स्वास्थ्य (Health):
- मुख्य उद्देश्य:
राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार और नागरिकों को स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करना। - खर्च:
राज्य सरकार ने अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों, दवाइयों और चिकित्सा उपकरणों के लिए बजट बढ़ाया है। - प्रमुख योजनाएं:
- मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना:
गरीब और वंचित वर्ग के लिए अस्पताल में इलाज की मुफ्त सुविधा। - जननी सुरक्षा योजना:
गर्भवती महिलाओं को प्रोत्साहन देने और सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने के लिए। - राजीव गांधी स्वास्थ्य योजना:
यह गरीबों के लिए इलाज के खर्च को कम करने की दिशा में काम करता है।
- मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना:
3. बुनियादी ढांचा (Infrastructure):
- मुख्य उद्देश्य:
राज्य के बुनियादी ढांचे में सुधार और नागरिक सुविधाओं को बढ़ावा देना। - खर्च:
सड़कें, पुल, पानी की आपूर्ति, सीवरेज, जल आपूर्ति और बिजली आपूर्ति जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए खर्च किया जाता है। - प्रमुख योजनाएं:
- मुख्यमंत्री सड़कों की मरम्मत योजना:
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सड़कों की स्थिति को सुधारने के लिए। - जल जीवन मिशन:
प्रत्येक घर में स्वच्छ जल की आपूर्ति सुनिश्चित करना। - शहरी और ग्रामीण जल आपूर्ति परियोजना:
शहरों और गांवों में जल आपूर्ति का विस्तार करना।
- मुख्यमंत्री सड़कों की मरम्मत योजना:
4. किसान सहायता योजनाएं (Farmer Welfare Schemes):
- मुख्य उद्देश्य:
किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार करना और उनकी जीवनशैली को बेहतर बनाना। - खर्च:
छत्तीसगढ़ सरकार किसानों के कल्याण के लिए विभिन्न योजनाओं पर खर्च करती है। - प्रमुख योजनाएं:
- राजीव गांधी किसान न्याय योजना:
यह योजना किसानों को सीधे वित्तीय सहायता प्रदान करती है, ताकि वे अपनी फसल की लागत और अन्य खर्चों को वहन कर सकें। - किसान क्रेडिट कार्ड योजना:
किसानों को सस्ती दरों पर ऋण उपलब्ध कराना। - कृषि सिंचाई योजना:
सूखा प्रभावित क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा प्रदान करना।
- राजीव गांधी किसान न्याय योजना:
5. सामाजिक कल्याण कार्यक्रम (Social Welfare Programs):
- मुख्य उद्देश्य:
समाज के कमजोर वर्गों, विशेष रूप से गरीब, दलित, आदिवासी और महिलाओं के लिए कल्याणकारी योजनाओं का विस्तार करना। - खर्च:
इन कार्यक्रमों के तहत राज्य सरकार विभिन्न सहायता योजनाओं और पेंशन योजनाओं के लिए बजट आवंटित करती है। - प्रमुख योजनाएं:
- मुख्यमंत्री बुढ़ापे की पेंशन योजना:
बुजुर्ग नागरिकों को वित्तीय सहायता प्रदान करना। - महिला सशक्तिकरण योजना:
महिलाओं के लिए स्व-रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य योजनाएं। - आदिवासी विकास योजना:
आदिवासी समुदाय के लिए विशेष योजनाएं, जिनमें शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार शामिल हैं।
- मुख्यमंत्री बुढ़ापे की पेंशन योजना:
6. ऊर्जा और जल संसाधन परियोजनाएं (Energy and Water Resource Projects):
- मुख्य उद्देश्य:
ऊर्जा और जल संसाधन परियोजनाओं के माध्यम से राज्य में ऊर्जा आपूर्ति और जल प्रबंधन को सुधारना। - खर्च:
छत्तीसगढ़ में बिजली उत्पादन और जल संरक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण बजट आवंटित किया जाता है। - प्रमुख योजनाएं:
- राज्य जलवायु परिवर्तन और जल संसाधन प्रबंधन योजना:
जल आपूर्ति और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को नियंत्रित करने के लिए। - बिजली वितरण सुधार योजना:
राज्य में बिजली वितरण को बेहतर बनाने के लिए।
- राज्य जलवायु परिवर्तन और जल संसाधन प्रबंधन योजना:
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