खबर वर्ल्ड न्यूज़ – हेमलता निषाद, दुर्ग l जब पूरा गाँव नींद की आगोश में होता है, तब कुछ चेहरे रात के अंधेरे का फायदा उठाकर धरती की कोख से रेत चुरा रहे होते हैं। जिला दुर्ग के पाटन ब्लॉक अंतर्गत ग्राम बोरेंदा में अवैध रेत खनन का यह खेल लंबे समय से जारी है, लेकिन प्रशासनिक चुप्पी और मिलीभगत के कारण अब यह व्यापार माफिया का रूप ले चुका है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, भागवत निषाद, गौतम कोरे, कृष्णा खरे, कामेश राजपूत, भोला यादव और सनत यादव नामक लोग इस गोरखधंधे में प्रत्यक्ष रूप से शामिल हैं। ये सभी रात्रि के अंधेरे में ट्रैक्टर और हाईवा की मदद से नदी किनारे से रेत निकालते हैं और सुबह तक रेत के ढेर गायब हो जाते हैं।
ग्रामवासियों का कहना है कि कई बार विरोध करने पर उन्हें धमकाया गया है। रात के समय जब गाँववाले सोते हैं, तब यह माफिया टोली मशीनों के शोर के साथ नदी किनारे पहुँच जाती है। इससे न केवल प्राकृतिक संसाधनों की लूट हो रही है, बल्कि नदी की धारा और पर्यावरण संतुलन पर भी गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
यह पूरा मामला तब उजागर हुआ जब मीडिया की एक टीम ने अपनी जान की परवाह किए बिना, रात के अंधेरे में जाकर इन अवैध गतिविधियों को अपने कैमरे में कैद किया। मीडिया की पैनी नज़र और ज़मीनी पड़ताल से यह स्पष्ट हो गया कि किस तरह संगठित तरीके से रेत माफिया सक्रिय हैं और किस प्रकार यह कार्यवाही चोरी-छिपे लगातार की जा रही है।
प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इससे यह संदेह और गहरा हो गया है कि कहीं न कहीं जिम्मेदार अधिकारी भी इस खेल में भागीदार हैं या आँख मूँद कर बैठे हैं।
यह मामला सिर्फ अवैध खनन का नहीं, बल्कि क़ानून व्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीणों की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। यदि समय रहते इस पर लगाम नहीं लगाई गई, तो आने वाले समय में इसका खामियाज़ा पूरे क्षेत्र को भुगतना पड़ सकता है।
अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन इन नामजद लोगों पर कार्रवाई करेगा या बोरेंदा जैसे गाँव रेत माफिया के कब्ज़े में आते रहेंगे?

