खबर वर्ल्ड न्यूज-राकेश पांडेय-कांकेर। मेहनत, धैर्य और सही मार्गदर्शन से कोई भी महिला अपने जीवन को बदल सकती है। आत्मविश्वास हो तो एक साधारण महिला भी अपने परिवार और समाज के लिए सफलता की नई मिसाल बन सकती है। ऐसे ही उत्तर बस्तर कांकेर जिले के जनपद पंचायत भानुप्रतापपुर के छोटे से गांव परवी की उजाला स्व-सहायता समूह की सदस्य श्रीमती क्रांतिबाई नेताम की कहानी संघर्ष, मेहनत और आत्मविश्वास की मिसाल है। साधारण परिवार में रहने वाली क्रांति बाई के जीवन में कई कठिनाइयां थी। परिवार की जिम्मेदारियां, सीमित संसाधन और आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी।
क्रांति बाई ने बताया कि शुरुआत में उनका जीवन केवल खेती और घर-परिवार तक सीमित थी। उनके चार बच्चों की जिम्मेदारी और एक अनिश्चित भविष्य था, उन्होंने अभावों के बीच स्वाभिमान की मशाल जलाए रखी। वर्ष 2013 में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर उनकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया और वे उजाला स्व-सहायता समूह की सदस्य बनीं। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें ऋण, बचत और आजीविका के नए अवसरों की जानकारी मिली, यही से उनके संघर्ष को नई दिशा मिली। क्रांति बाई ने अपनी 10 एकड़ जमीन में अलग-अलग प्रकार की खेती शुरू की। उन्होंने एसआरआई विधि से धान की खेती के अलावा उड़द और मौसमी सब्जियों की खेती अपनाई। साथ ही उन्होंने रासायनिक खाद के स्थान पर जीवामृत और वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग किया, जिससे खेती की लागत कम हुई और उत्पादन बढ़ा। खेती के साथ-साथ उन्होंने मुर्गी पालन, मछली पालन और लाख की खेती जैसे कार्य भी शुरू किया। उनकी मेहनत और लगन का परिणाम यह हुआ कि लाख उत्पादन से उन्हें अच्छी आमदनी मिलने लगी और उनके उत्पाद की कीमत लगभग 850 रूपए प्रति किलो तक मिलने लगी, इससे उनकी आय में लगातार वृद्धि होती गई।
उन्होंने समूह से 02 लाख 50 हजार रूपए का ऋण लेकर अपने कार्यों का विस्तार किया। आज उनकी मासिक आय लगभग 13,500 रूपए तक पहुंच गई है और वे एक सफल लखपति दीदी के रूप में पहचानी जाती है। क्रांति बाई की सफलता का असर केवल उनकी आय तक सीमित नहीं रहा। कभी मिट्टी का छोटा सा घर में रहने वाली कांतिबाई का एक पक्का मकान बन चुका है। आज उनके बच्चे कॉलेज और सरकारी सेवाओं में हैं, उनके बेटे स्वावलंबी बन रहे हैं और परिवार का जीवन स्तर बेहतर हो गया है। क्रांति बाई उजाला स्व-सहायता समूह की सक्रिय सदस्य होने के साथ-साथ गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन गई है। वे महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने, समूह से जुड़ने और मेहनत के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही है।
Trending
- बस्तर में एक दशक बाद बाघ की दस्तक: रिहायशी इलाकों में वन विभाग का हाई अलर्ट, ट्रैप कैमरों से निगरानी तेज
- रायपुर में अवैध निर्माण पर निगम का वज्रपात: कुशालपुर में 1500 वर्गफुट का अवैध व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स जमींदोज
- रामगोपाल अग्रवाल की गिरफ्तारी भाजपा का राजनीतिक षड्यंत्र– कांग्रेस
- छत्तीसगढ़ में अगले 4 दिनों तक ‘झमाझम’ बारिश का दौर: मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट, वज्रपात की भी आशंका
- उरला की फैक्ट्री दुर्घटना के बाद सख्त कार्रवाई, मृतक श्रमिकों के कंपनी प्रबंधन द्वारा परिजनों को 30-30 लाख रुपये का मुआवजा देने पर सहमति
- पद्मश्री और राज्य अलंकरण से सम्मानित कलाकारों, साहित्यकारों तथा संस्कृति जगत की विभूतियों ने मुक्तकाश मंच से पद्मविभूषण डॉ. तीजन बाई दी भावभीनी श्रद्धांजलि
- कर्मचारियों की गरिमा और आर्थिक सुरक्षा के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की बड़ी पहल
- डुमरतराई थोक बाजार से व्यापार एवं राेजगार दोनों को मिलेगा बढ़ावा – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय


