खबर वर्ल्ड न्यूज-आशीष कंठले-बेमेतरा। जिले में किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के उद्देश्य से भारत सरकार की प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) के अंतर्गत दलहन एवं तिलहन फसलों की खरीदी का कार्य लगातार गति पकड़ रहा है। जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में विभिन्न उपार्जन केंद्रों में खरीदी व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा रहा है, जिससे किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य सहजता से मिल सके।
इसी क्रम में विकासखंड नवागढ़ स्थित सेवा सहकारी समिति नवागढ़ में अरहर उपार्जन का विधिवत शुभारंभ किया गया। इससे पहले परपोड़ी एवं खंडसरा समितियों में भी खरीदी प्रारंभ की जा चुकी है, और अब नवागढ़ के जुड़ने से किसानों को और अधिक सुविधा उपलब्ध होगी। प्राइस सपोर्ट स्कीम (PSS) के तहत आज नवागढ़ समिति में अरहर खरीदी की शुरुआत की गई, जिसमें 4 किसानों से कुल 31.00 क्विंटल अरहर का उपार्जन किया गया। किसानों को उनकी उपज का मूल्य 8000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से प्रदान किया गया। समर्थन मूल्य पर खरीदी होने से किसानों में उत्साह का माहौल है और वे अधिकाधिक मात्रा में अपनी उपज उपार्जन केंद्रों तक ला रहे हैं।
खरीदी कार्य के दौरान वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी श्री आर. के. चतुर्वेदी, कृषि विकास अधिकारी श्री अहिरवार, श्री अश्वनी मांडिले, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी श्री संजय अनंत एवं समिति प्रबंधक श्री दिलहरण सोनकर सहित अनेक किसान उपस्थित रहे। अधिकारियों ने मौके पर किसानों से चर्चा कर उन्हें समर्थन मूल्य पर उपज विक्रय करने के लाभों के बारे में जानकारी दी और अधिकाधिक पंजीकरण कराने के लिए प्रेरित किया।
जिले में अधिसूचित उपार्जन केंद्रों के माध्यम से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर दलहन एवं तिलहन फसलों की खरीदी निरंतर संचालित है। अब तक जिले में 36.50 क्विंटल सोयाबीन एवं 115.50 क्विंटल अरहर की खरीदी की जा चुकी है, जो किसानों की बढ़ती जागरूकता और योजनाओं के प्रति विश्वास को दर्शाता है।
कृषि विभाग द्वारा लगातार किसानों को योजनाओं की जानकारी देकर उन्हें पंजीयन एवं विक्रय के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी के तहत जिले में अब तक 419 किसानों द्वारा सरसों फसल का पंजीयन कराया जा चुका है और शीघ्र ही सरसों का उपार्जन भी प्रारंभ किया जाएगा। सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य 6200 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। जिला प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे पंजीकृत उपार्जन केंद्रों में अधिक से अधिक संख्या में अपनी उपज विक्रय करें, ताकि उन्हें शासन द्वारा निर्धारित समर्थन मूल्य का पूरा लाभ मिल सके और उनकी आय में वृद्धि सुनिश्चित हो सके।
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