सत्ता पक्ष के विधायकों ने ही सरकार को घेरा, स्वास्थ्य मंत्री बोले— भविष्य में सभी कर्मचारियों का होगा चरित्र सत्यापन
खबर वर्ल्ड न्यूज़ – व्यास पाठक, रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में बुधवार को सरकारी संस्थानों में प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से नियुक्त आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के पुलिस सत्यापन का मुद्दा जोरदार ढंग से उठा। खास बात यह रही कि इस मामले में सत्ता पक्ष के विधायकों ने ही सरकार से जवाब तलब किया। स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने सदन को आश्वस्त किया कि भविष्य में आउटसोर्सिंग के सभी कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन अनिवार्य रूप से कराया जाएगा।
प्रश्नकाल के दौरान भाजपा विधायक धरमलाल कौशिक ने सरकार से पूछा कि क्या प्लेसमेंट एजेंसी के कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन अनिवार्य है, अब तक कितने कर्मचारियों का सत्यापन कराया गया है और नियमों का पालन नहीं करने वाली एजेंसियों के खिलाफ क्या कार्रवाई का प्रावधान है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब टेंडर की शर्तों में पुलिस सत्यापन अनिवार्य है, तो इसका पालन क्यों नहीं हो रहा।
जवाब में स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग में प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से सुरक्षा गार्ड, सफाईकर्मी और वाहन चालक जैसे पदों पर कर्मचारियों की नियुक्ति की जाती है। उन्होंने कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय (मेकाहारा) और मेडिकल कॉलेजों में व्यवस्था अलग-अलग है। डीकेएस अस्पताल और रायपुर मेडिकल कॉलेज में आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का शत-प्रतिशत पुलिस सत्यापन कराया जा चुका है, जबकि अंबेडकर अस्पताल में यह व्यवस्था अभी लागू नहीं है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वर्तमान में पुलिस सत्यापन नहीं होने पर भुगतान रोकने का कोई प्रावधान नहीं है।
इस दौरान भाजपा विधायक अजय चंद्राकर और धरमलाल कौशिक ने सभी आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का चरित्र सत्यापन अनिवार्य किए जाने की मांग की। जवाब में स्वास्थ्य मंत्री ने सदन को भरोसा दिलाया कि भविष्य में आउटसोर्सिंग के माध्यम से नियुक्त सभी कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन सुनिश्चित किया जाएगा। इससे सरकारी अस्पतालों और संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था और पारदर्शिता को और मजबूत किया जा सकेगा।


