नई दिल्ली। बरसात के मौसम में बाजारों में मिलने वाली हरी-ताजी तोरई सिर्फ स्वादिष्ट सब्जी ही नहीं, बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद मानी जाती है। आयुर्वेद में तोरई को हल्का, आसानी से पचने वाला और शरीर को ठंडक पहुंचाने वाला खाद्य पदार्थ बताया गया है। इसमें कई ऐसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। हालांकि किसी भी बीमारी के इलाज के लिए केवल तोरई पर निर्भर नहीं रहना चाहिए और गंभीर समस्या होने पर डॉक्टर या आयुर्वेदिक विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।
वैद्य विष्णु दत्त प्रजापति ने बताया कि तोरई में विटामिन ए, विटामिन सी, फाइबर, पोटैशियम, मैग्नीशियम और कई जरूरी खनिज तत्व पाए जाते हैं। इसमें पानी की मात्रा भी अधिक होती है, इसलिए यह शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करती है। गर्मी और बरसात के मौसम में इसका सेवन शरीर को तरोताजा बनाए रखने में सहायक माना जाता है।
पाचन तंत्र के लिए लाभकारी : तोरई पाचन तंत्र के लिए लाभकारी होती है। इसमें मौजूद फाइबर भोजन को आसानी से पचाने में मदद करता है। नियमित रूप से संतुलित मात्रा में तोरई का सेवन करने से कब्ज की समस्या कम हो सकती है और पेट साफ रहने में सहायता मिलती है। जिन लोगों को अपच या गैस की परेशानी रहती है, उनके लिए भी हल्के भोजन के रूप में तोरई एक अच्छा विकल्प मानी जाती है।
वजन नियंत्रित रखने में मददगार: तोरई वजन नियंत्रित रखने में भी मददगार हो सकती है। इसमें कैलोरी कम और फाइबर अधिक होता है, जिससे लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस होता है। यही कारण है कि वजन कम करने वाले लोग भी इसे अपने भोजन में शामिल करते हैं।
डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद : मधुमेह यानी डायबिटीज के मरीजों के लिए भी तोरई लाभकारी मानी जाती है। इसमें प्राकृतिक रूप से शर्करा कम होती है और फाइबर अधिक होने के कारण यह रक्त में शुगर के स्तर को संतुलित रखने में सहायक हो सकती है। हालांकि डायबिटीज के मरीज अपने आहार में कोई बड़ा बदलाव करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
तोरई का सेवन हृदय स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा माना जाता है। इसमें मौजूद पोटैशियम रक्तचाप को संतुलित रखने में मदद करता है। इसके साथ ही फाइबर शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में सहायक हो सकता है, जिससे हृदय स्वस्थ रखने में मदद मिलती है।
विष्णु दत्त प्रजापति बताते हैं कि आयुर्वेद में तोरई को शरीर की गर्मी कम करने वाला भोजन माना गया है। इसका नियमित सेवन शरीर को ठंडक पहुंचाने और पानी की कमी से बचाने में सहायक माना जाता है। बरसात और गर्मी के मौसम में इसका सेवन विशेष रूप से लाभदायक माना जाता है।
विशेषज्ञ का कहना है कि तोरई का सबसे अधिक लाभ तब मिलता है, जब इसे कम मसालों और कम तेल में पकाकर खाया जाए। ज्यादा तेल और मसालों का उपयोग इसके पोषण मूल्य को कम कर सकता है। ताजी और हरी तोरई का सेवन अधिक लाभकारी माना जाता है। तोरई एक ऐसी हरी सब्जी है, जो स्वाद, पोषण और स्वास्थ्य तीनों का अच्छा मेल है। यदि इसे संतुलित आहार का हिस्सा बनाया जाए, तो यह शरीर को कई आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करने के साथ स्वस्थ जीवनशैली बनाए रखने में भी मदद कर सकती है। आयुर्वेद में तोरई के कई लाभ बताए गए हैं, लेकिन यह किसी बीमारी का निश्चित इलाज नहीं है। यदि किसी व्यक्ति को गंभीर बीमारी या लंबे समय से कोई स्वास्थ्य समस्या है, तो उसे डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही उपचार कराना चाहिए।
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