खबर वर्ल्ड न्यूज-राकेश पांडेय-सुकमा। कोंटा विकासखंड के गोलापल्ली गांव का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें आराेपित शिकारियाें द्वारा तीन मृत गिलहरियों और एक बंदर के साथ दिख रहे थे। वायरल वीडियो में वन्य जीव शिकार की आशंका को गंभीरता से लेते हुए वन विभाग ने तत्काल संज्ञान लेकर जांच शुरू की। सुकमा वनमंडल की टीम ने जांच के दाैरान वीडियो में दिख रहे व्यक्तियों की पहचान कर जांच टीम ने इस मामले पर ग्राम गोलापल्ली में कार्रवाई करते हुए कुल 7 आरोपियों 1. मड़कम आनंद, निवासी गोलापल्ली, 2. सोड़ी बिच्चैया, निवासी माड़ीगुड़ा, 3. माड़वी राजू, निवासी माड़ीगुड़ा, 4. माड़वी चलपनी, निवासी माड़ीगुड़ा, 5. सुकमा सोमैया, निवासी माड़ीगुड़ा, 6. उईका इशाक, निवासी लक्ष्मीपुरम, 7. मल्लम चन्द्रा, निवासी सिंगाराम को गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने विशाल भारतीय गिलहरियों का शिकार किया था और उनका मांस भी खाया था। आरोपियों के कब्जे से एक देसी निर्मित हथियार, 2 गुलेल और घटना से संबंधित मोबाइल फोन जब्त किए गए है। इन सभी आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 2 (16), 2(36), 9, 39, 50 और 51 के तहत अपराध दर्ज किया गया है। आरोपियों के विरूद्ध कार्यवाही उपरांत आज शुक्रवार काे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें 15 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। मामले की वैज्ञानिक जांच सुनिश्चित करने के लिए घटनास्थल से प्राप्त बालों के नमूने और जब्त मोबाइल फोन को फोरेंसिक परीक्षण के लिए भेजा जा रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
सुकमा वनमंडल को इंस्टाग्राम पर वायरल हुए वीडियो की जानकारी मिली थी, जिसमें कोंटा विकासखंड के ग्राम गोलापल्ली के कुछ व्यक्तियों को 3 मृत विशाल भारतीय गिलहरियों (Indian Giant Squirrel) और एक बंदर के साथ देखा गया था। विशाल भारतीय गिलहरी (Ratufa indica) भारत की सबसे बड़ी वृक्षवासी गिलहरियों में से एक है। यह प्रजाति वन पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और बीजों के प्रसार के माध्यम से वनों के प्राकृतिक पुनर्जनन में सहायता करती है। यह प्रजाति वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-II के अंतर्गत संरक्षित है। इसका शिकार, पकड़ना, घायल करना या इसके किसी अंग का व्यापार करना कानूनन अपराध है, जिसके लिए कठोर दंड और कारावास का प्रावधान है। वनमंडल ने आम नागरिकों से अपील की है कि वन्यजीव संरक्षण में सहयोग करें और किसी भी प्रकार के अवैध शिकार या वन्य अपराध की सूचना तत्काल वन विभाग को दें।
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