सनातन धर्म में पुरुषोत्तम मास को भगवान विष्णु का सबसे प्रिय महीना माना जाता है और अब 15 जून को इस मास का समापन हो जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पवित्र माह में श्रीहरि नारायण की पूजा, भक्ति और दर्शन करने से कई गुना अधिक पुण्य फल प्राप्त होता है। यही कारण है कि देशभर के विष्णु मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। ऐसे ही प्राचीन और अत्यंत पूजनीय मंदिरों में से एक है चेन्नई का श्री पार्थसारथी मंदिर, जो भगवान विष्णु के श्रीकृष्ण स्वरूप को समर्पित है। धार्मिक मान्यता है कि इस मंदिर में दर्शन करने मात्र से ही भक्तों की सभी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं और हर कष्ट से मुक्ति मिलती है। आइए भगवान कृष्ण के इस मंदिर के बारे में खास बातें…
108 दिव्य देशमों में इस मंदिर की गणना
तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई के त्रिपलीकेन क्षेत्र में स्थित यह मंदिर वैष्णव परंपरा के प्रमुख तीर्थस्थलों में गिना जाता है। इसकी गणना 108 दिव्य देशमों में की जाती है, जिनका उल्लेख तमिल संतों द्वारा रचित पवित्र ग्रंथों में मिलता है। माना जाता है कि यहां भगवान विष्णु स्वयं भक्तों को आशीर्वाद देने के लिए विभिन्न स्वरूपों में विराजमान हैं।
यहां मूंछों वाले स्वरूप में भगवान कृष्ण
पार्थसारथी नाम का अर्थ है अर्जुन के सारथी। महाभारत में भगवान श्रीकृष्ण ने युद्ध के दौरान अर्जुन के रथ का संचालन किया था, उसी स्वरूप को यहां विशेष रूप से पूजा जाता है। मंदिर की सबसे अनोखी विशेषता यह है कि यहां भगवान कृष्ण को मूंछों वाले स्वरूप में दर्शाया गया है। साथ ही उनके हाथों में कोई अस्त्र-शस्त्र नहीं दिखाई देता, जो इस मंदिर को अन्य विष्णु मंदिरों से अलग बनाता है।
पांच स्वरूपों में भगवान के दर्शन
इस प्राचीन मंदिर का निर्माण पल्लव शासकों के समय माना जाता है। बाद के वर्षों में चोल और विजयनगर राजाओं ने भी इसके विकास और विस्तार में योगदान दिया। मंदिर परिसर में भगवान विष्णु के पांच प्रमुख स्वरूपों की पूजा की जाती है। इनमें पार्थसारथी (श्रीकृष्ण), योग नरसिंह, श्रीराम, गजेंद्र वरदराज और रंगनाथ स्वरूप शामिल हैं। यही वजह है कि यह मंदिर वैष्णव श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है।
मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा
मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथाएं भी इसकी महिमा को और बढ़ाती हैं। मान्यता है कि राजा सुमति ने भगवान विष्णु से उनके पार्थसारथी स्वरूप के दर्शन की इच्छा व्यक्त की थी। तब भगवान ने उन्हें इसी स्थान पर आने का निर्देश दिया। कहा जाता है कि यह क्षेत्र कभी तुलसी के घने वन और सुंदर पुष्पों से भरे सरोवरों से घिरा हुआ था।
सप्त ऋषियों ने यहीं की थी तपस्या
धार्मिक मान्यता के अनुसार, सप्त ऋषियों सहित कई महान ऋषियों ने इसी स्थान पर तपस्या की थी। इसी कारण यह क्षेत्र आध्यात्मिक साधना और भक्ति का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। मंदिर के पवित्र सरोवर को भी अत्यंत शुभ माना जाता है, जहां श्रद्धालु पूजा-अर्चना से पहले दर्शन करते हैं। मंदिर की द्रविड़ शैली की वास्तुकला भी श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करती है। विशाल गोपुरम, सुंदर नक्काशी और भव्य मंडप इसकी विशेष पहचान हैं। यहां वर्षभर कई धार्मिक उत्सव आयोजित किए जाते हैं, लेकिन वैकुंठ एकादशी और अन्य विष्णु उत्सवों के दौरान मंदिर में विशेष रौनक देखने को मिलती है।
पार्थसारथी मंदिर एक विशेष तीर्थस्थल
जो श्रद्धालु पुरुषोत्तम मास में भगवान नारायण के दर्शन का पुण्य प्राप्त करना चाहते हैं, उनके लिए श्री पार्थसारथी मंदिर एक विशेष तीर्थस्थल है। चेन्नई शहर के बीचोंबीच स्थित होने के कारण यहां हवाई, रेल और सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है। मंदिर प्रतिदिन सुबह और शाम श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खुला रहता है।
Trending
- मोदी सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने पर मुंगेली में आयोजित हुआ विकसित भारत संकल्प, प्रबुद्धजन सम्मेलन एवं प्रदर्शनी
- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने किया ‘तेरा राज नहीं आएगा रे’ पुस्तक का विमोचन
- उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने 2500 किलोलीटर क्षमता के पानी टंकी निर्माण का किया भूमिपूजन
- संत गाडगे बाबा के आदर्शों पर चलकर समरस, स्वच्छ और विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण करें – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
- कयाकिंग-कैनोइंग को आगे बढ़ाने हरसंभव सहयोग देगी सरकार – अरुण साव
- धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा रेल परियोजना से जशपुर के विकास को मिलेगी नई गति: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
- प्रगति पथ कार्यक्रम के तहत विधायक मोहले ने किया विकास कार्यों का निरीक्षण
- ग्राम नवागांव (घु) पहुंचे विधायक पुन्नूलाल मोहले, ग्रामीणों की समस्याएं सुन विकास कार्यों को दी प्राथमिकता


