खबर वर्ल्ड न्यूज-राकेश पांडेय-जगदलपुर। बस्तर संभाग के सातों जिले को हाईटेक टेक्नोलॉजी से लैस कुल 31 डायल-112 वाहन मिली हैं, जिनमें सिर्फ बस्तर जिले के लिए 11 गाड़ियां शामिल हैं। दावा है कि शहरी क्षेत्र में 10 मिनट और ग्रामीण क्षेत्र में महज 25 से 30 मिनट के अंदर ये गाड़ी पहुंचेगी। इन वाहनों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि एक ही गाड़ी पुलिस सहायता, प्राथमिक चिकित्सा और फायर रिस्पॉन्स जैसी मल्टी-इमरजेंसी सुविधाओं से लैस है। जीपीएस, लाइव ट्रैकिंग, कंट्रोल रूम कनेक्टिविटी और सोशल मीडिया रिस्पॉन्स सिस्टम जैसी तकनीकों से लैस ये वाहन अब शहर से लेकर दूरस्थ ग्रामीण इलाकों तक तेजी से मदद पहुंचाएंगे। इस वाहन में एक पायलट और एक पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे। डायल- 112 गाड़ियों के संचालन से सड़क हादसे, आगजनी, मारपीट, महिलाओं से जुड़ी घटनाएं, स्वास्थ्य आपातकाल और अन्य संकट की स्थिति में लोगों को तत्काल सहायता मिल सकेगी।
नई डायल-112 गाड़ियों को मल्टी-रिस्पॉन्स व्हीकल के रूप में तैयार किया गया है। यानी एक ही वाहन में पुलिस सहायता, प्राथमिक चिकित्सा और आग लगने जैसी घटनाओं में शुरुआती रिस्पॉन्स देने की क्षमता मौजूद है। वाहनों में पीटीजेड कैमरा, बेसिक फायर सेफ्टी उपकरण, फर्स्ट एड किट, स्ट्रेचर, ऑक्सीजन सपोर्ट, इमरजेंसी लाइटिंग सिस्टम और आधुनिक संचार उपकरण लगाए गए हैं। किसी सड़क दुर्घटना या गंभीर स्थिति में पुलिस टीम मौके पर पहुंचकर प्राथमिक उपचार देने के साथ जरूरत पड़ने पर एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड से भी तुरंत संर्पक कर सकेगी।
किसी भी आपात स्थिति में नागरिक सीधे डायल-112 नंबर पर कॉल कर सकते हैं। कॉल रिसीव होते ही कंट्रोल रूम घटना की लोकेशन ट्रैक करेगा और सबसे नजदीकी वाहन को मौके के लिए रवाना किया जाएगा। इसके अलावा पुलिस के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और डिजिटल माध्यमों से भी सूचना दी जा सकती है। बस्तर संभाग का बड़ा हिस्सा अंदरूनी क्षेत्र हैं, जहां कई बार पुलिस या मेडिकल सहायता पहुंचने में समय लग जाता था। नई डायल-112 गाड़ियों को ऐसे इलाकों में तेजी से पहुंचने लायक बनाया गया है। मजबूत सस्पेंशन, हाई ग्राउंड क्लीयरेंस और ग्रामीण सड़कों के तहत डिजाइन होने से ये वाहन खराब रास्तों में भी आसानी से चल सकेंगे। महिलाओं से जुड़े अपराध, घरेलू हिंसा, छेड़छाड़ और रात के समय सुरक्षा जैसी घटनाओं में सेवा काफी अहम मानी जा रही है। बुजुर्ग, अकेले रहने वाले लोग और जरूरतमंद नागरिक भी सीधे हेल्पलाइन पर संपर्क कर तुरंत मदद प्राप्त कर सकेंगे।
बस्तर आईजी सुंदरराज पी. ने बताया कि इन डायल- 112 वाहनों में हाईटेक जीपीएस सिस्टम लगाया गया है, जिससे कंट्रोल रूम हर वाहन की लाइव लोकेशन ट्रैक कर सकेगा। जैसे ही कोई कॉल कंट्रोल रूम में पहुंचेगी, सबसे नजदीकी वाहन को अलर्ट भेजा जाएगा। इससे रिस्पॉन्स टाइम कम होगा और मदद तेजी से पहुंचेगी। वाहनों में हाई फ्रीक्वेंसी वायरलेस सिस्टम, डिजिटल कम्युनिकेशन डिवाइस और रियल टाइम डेटा शेयरिंग तकनीक भी दी गई है। इससे पुलिस कंट्रोल रूम और फील्ड स्टाफ के बीच बेहतर समन्वय बना रहेगा। नई व्यवस्था में सोशल मीडिया को भी इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम से जोड़ा गया है। यानी किसी घटना की जानकारी लोग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, पुलिस हेल्पलाइन या ऑनलाइन माध्यम से भी दे सकेंगे। कंट्रोल रूम तक सूचना पहुंचते ही डायल-112 वाहन को तत्काल रवाना किया जाएगा। कई बार लोग फोन कॉल नहीं कर पाते, ऐसे में डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए मदद मांगने का विकल्प काफी कारगर साबित होगा।
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