खबर वर्ल्ड न्यूज-संतोष कुमार-बीजापुर। इन्द्रावती फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी प्राइवेट लिमिटेड (एफपीओ) और जिला प्रशासन के बीच सी-मार्ट एवं गारमेंट फैक्ट्री संचालन को लेकर विवाद अब गहरा गया है। किसानों की संस्था ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर आर्थिक अनियमितता, अधिकारों से वंचित करने और संचालन में कथित भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। संस्था ने कलेक्टर से पूरे मामले की पारदर्शी जांच, दोषियों पर कार्रवाई, सी-मार्ट भवन की मरम्मत तथा किसानों और स्थानीय उत्पादकों के हित में एफपीओ को पुनः संचालन का अवसर देने की मांग की है।
एफपीओ का कहना है कि वर्ष 2022 से संस्था किसानों और स्थानीय उत्पादकों के हित में कार्य कर रही थी तथा वर्ष 2023 से सी-मार्ट और गारमेंट फैक्ट्री का संचालन भी संस्था के माध्यम से किया जा रहा था। संस्था के अनुसार तीन पक्षों के बीच हुए समझौता ज्ञापन में लाभ-हानि साझा करने का प्रावधान था, लेकिन एफपीओ को उसका लाभ नहीं मिला।संस्था ने आरोप लगाया कि वर्ष 2022 से 2025 तक ब्लैंक चेक पर हस्ताक्षर करवाकर राशि निकाली जाती रही। विरोध करने पर संस्था को बैंक सिग्नेटरी से हटा दिया गया। एफपीओ ने सवाल उठाया कि जब समझौता ज्ञापन, दस्तावेज, बिजली कनेक्शन और संचालन संबंधी आधार संस्था के नाम पर हैं, तो गौरव पांडेय को किस आधार पर सिग्नेटरी बनाया गया। ज्ञापन में कौशल विकास विभाग पर बिना अनुमति दूसरा जीएसटी तैयार कराने का आरोप भी लगाया गया है। एफपीओ का दावा है कि योजनाबद्ध तरीके से किसानों के संगठन को हटाकर किसी अन्य पक्ष को लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
संस्था ने सी-मार्ट भवन की खराब स्थिति का मुद्दा भी उठाया है। एफपीओ के मुताबिक भवन की छत से लगातार पीओपी गिरता रहा, जिसकी मरम्मत संस्था अपने खर्च पर कराती रही। लगातार खर्च और संसाधनों की कमी के चलते संस्था आर्थिक रूप से कमजोर होती गई, जिससे कर्मचारियों के मानदेय और संचालन पर असर पड़ा। एफपीओ ने बताया कि बैंक ऋण लेने के लिए लीज एग्रीमेंट आवश्यक था। इसके लिए जिला पंचायत और प्रशासन को कई बार आवेदन दिए गए, लेकिन केवल आश्वासन मिलता रहा। बाद में प्रशासन द्वारा सी-मार्ट संचालन के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की जानकारी मिलने पर किसानों में नाराजगी बढ़ गई।
संस्था के अनुसार फरवरी 2026 में जिला पंचायत अधिकारियों ने बंद पड़े सी-मार्ट का निरीक्षण किया और डेमो उत्पादों को एक्सपायरी बताते हुए नोटिस जारी कर दिया। एफपीओ का आरोप है कि संतोषजनक जवाब का अवसर दिए बिना परिसर खाली कराने की कार्रवाई शुरू कर दी गई, जिसके खिलाफ संस्था ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। संस्था का दावा है कि न्यायालय से स्थगन आदेश प्राप्त हो चुका है। एफपीओ ने कहा कि जिस भूमि पर गारमेंट फैक्ट्री संचालित हो रही है, उसकी ग्राम पंचायत अनापत्ति, दस्तावेज और बिजली बिल इन्द्रावती एफपीओ के नाम पर हैं। इसके बावजूद संस्था को संचालन से अलग कर दिया गया।
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