नारायणपुर के युवा साहित्यकार मनीष तिवारी को विशेष सम्मान
KWNS – नारायणपुर,ब्यूरो । अबूझमाड़ की मिट्टी, उसकी खुशबू और वहां के जनजीवन की सच्चाई को शब्दों में पिरोकर एक युवा साहित्यकार ने ऐसा प्रभाव छोड़ा कि वह सीधे प्रदेश के मुख्यमंत्री तक पहुंच गया। नारायणपुर जिले के उभरते साहित्यकार मनीष कुमार तिवारी की कविता “अबूझमाड़ संदेश” ने न केवल पाठकों का दिल जीता, बल्कि मुख्यमंत्री को भी गहराई से प्रभावित किया इस कविता में अबूझमाड़ की वास्तविकता, संघर्ष, आदिवासी जीवन, संवेदनाएं और उम्मीदों को बेहद सहज और प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया गया है। यही कारण रहा कि यह रचना चर्चा का विषय बन गई और प्रदेश स्तर पर सराहना बटोरने लगी।

मुख्यमंत्री ने भेजा प्रशंसा संदेश
मुख्यमंत्री ने मनीष तिवारी की इस रचना की सराहना करते हुए उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दीं। अपने संदेश में उन्होंने लिखा कि“अबूझमाड़ संदेश” एक संवेदनशील और प्रेरणादायक रचना है, जो समाज को नई दिशा देने का कार्य करती है,उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की साहित्यिक अभिव्यक्तियां समाज का दर्पण होती हैं, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बनती हैं।
अबूझमाड़ की असल तस्वीर को शब्दों में ढाला
मनीष तिवारी की कविता की खासियत यह है कि इसमें अबूझमाड़ केआदिवासी जीवन,संस्कृति और परंपरा,संघर्ष और उम्मीद,और बदलते सामाजिक परिवेश को बेहद संवेदनशील तरीके से उकेरा गया है। यह कविता केवल एक साहित्यिक रचना नहीं, बल्कि बस्तर अंचल की आत्मा को जीवंत रूप में प्रस्तुत करने वाली अभिव्यक्ति बनकर उभरी है।
युवा वर्ग और साहित्य जगत में उत्साह
इस उपलब्धि के बाद युवा साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। क्षेत्र के लोगों का मानना है कि मनीष तिवारी की लेखनी में अपनी मिट्टी के प्रति गहरा जुड़ाव और संवेदनशीलता है, जो उन्हें अलग पहचान देती है,स्थानीय लोगों ने उम्मीद जताई है कि वे भविष्य में भी इसी तरह की रचनाओं के माध्यम से बस्तर की संस्कृति, जनजीवन और वास्तविकताओं को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाते रहेंगे।
नारायणपुर के लिए गौरव का क्षण
नारायणपुर जैसे दूरस्थ क्षेत्र से निकलकर एक युवा साहित्यकार का प्रदेश स्तर पर सम्मानित होना पूरे जिले के लिए गर्व की बात है। यह उपलब्धि न केवल मनीष तिवारी के लिए, बल्कि उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है जो अपनी प्रतिभा के दम पर पहचान बनाना चाहते हैं।अबूझमाड़ की धरती से निकली यह आवाज़ अब प्रदेशभर में गूंज रही है—यह साबित करते हुए कि सच्ची संवेदना और जमीनी हकीकत से जुड़ी लेखनी हमेशा दिलों तक पहुंचती है।


