खबर वर्ल्ड न्यूज-व्यास पाठक-रायपुर। छत्तीसगढ़ में लंबे समय से जारी धर्मांतरण के विवादों और सियासी घमासान के बीच विष्णुदेव साय सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। गुरुवार को विधानसभा में ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2026’ पेश किया गया। यह नया कानून 58 साल पुराने ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम 1968’ की जगह लेगा। नए विधेयक में सजा और जुर्माने के इतने कड़े प्रावधान किए गए हैं कि यह देश के सबसे सख्त धर्मांतरण विरोधी कानूनों में से एक माना जा रहा है।
क्यों पड़ी नए कानून की जरूरत?
सरकार का तर्क है कि 1968 का पुराना कानून वर्तमान तकनीकी और सामाजिक परिवेश में अपर्याप्त साबित हो रहा था। डिजिटल माध्यमों से प्रलोभन और नई तरह की धोखाधड़ी को रोकने के लिए एक व्यापक कानूनी ढांचे की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।
पुराने बनाम नए कानून में प्रमुख अंतर
| विशेषता | पुराना कानून (1968) | नया विधेयक (2026) |
| अपराध की प्रकृति | संज्ञेय और जमानतीय | संज्ञेय और गैर-जमानतीय |
| सूचना प्रक्रिया | धर्मांतरण के बाद DM को सूचना | धर्मांतरण से पूर्व DM को सूचना अनिवार्य |
| सजा का प्रावधान | साधारण कारावास | 7 साल से आजीवन कारावास तक |
| सुनवाई | सामान्य न्यायालय | विशेष न्यायालय |
कड़े दंड और भारी जुर्माने का विश्लेषण
विधेयक में अपराध की गंभीरता के आधार पर सजा को तीन मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है:
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सामान्य अवैध धर्मांतरण: बल, कपट या लालच से धर्मांतरण कराने पर 7 से 10 साल की जेल और न्यूनतम 5 लाख रुपये जुर्माना।
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संवेदनशील वर्गों के मामले: यदि पीड़ित नाबालिग, महिला, SC/ST या OBC वर्ग से है, तो सजा 10 से 20 साल की जेल और न्यूनतम 10 लाख रुपये जुर्माना।
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सामूहिक धर्मांतरण: सबसे कठोर प्रावधान सामूहिक धर्मांतरण के लिए हैं, जिसमें 10 साल से लेकर आजीवन कारावास और न्यूनतम 25 लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान है।
विधेयक की 5 सबसे बड़ी खास बातें
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स्वैच्छिक धर्मांतरण की कड़ी प्रक्रिया: यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से धर्म बदलना चाहता है, तो उसे जिला मजिस्ट्रेट (DM) को पूर्व सूचना देनी होगी। इस सूचना को सार्वजनिक किया जाएगा और 30 दिनों तक आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी।
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डिजिटल धर्मांतरण पर लगाम: पहली बार ‘डिजिटल माध्यमों’ के जरिए किए जाने वाले धर्मांतरण और प्रलोभन को स्पष्ट रूप से परिभाषित कर कानून के दायरे में लाया गया है।
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विवाह और धर्मांतरण: अंतरधार्मिक विवाह कराने वाले धार्मिक गुरुओं (पादरी, पंडित, मौलवी आदि) को 8 दिन पहले घोषणापत्र देना होगा। यदि विवाह का एकमात्र उद्देश्य धर्मांतरण पाया गया, तो उसे अवैध घोषित किया जा सकेगा।
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घर वापसी को छूट: विधेयक में स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई व्यक्ति अपने ‘पैतृक धर्म’ में वापस लौटता है, तो उसे धर्मांतरण नहीं माना जाएगा और उस पर यह कानून लागू नहीं होगा।
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महिमामंडन पर रोक: किसी धर्म विशेष का झूठा महिमामंडन कर या दूसरे धर्म के प्रति भ्रामक जानकारी देकर धर्म परिवर्तन कराना अब दंडनीय अपराध होगा।


