खबर वर्ल्ड न्यूज-राकेश पांडेय-जगदलपुर। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत बस्तर जिले में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण और ग्रामीण स्तर पर इसकी पहुंच को डिजिटल रूप से मजबूत करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। इसी कड़ी में शनिवार 14 मार्च को जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त तत्वावधान में टोरेंट प्रोजेक्ट (टेली मॉनिटरिंग फॉर रूरल हेल्थ ऑर्गनाइजर्स ऑफ छत्तीसगढ़) विषय पर एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम बस्तर कलेक्टर आकाश छिकारा के मार्गदर्शन और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय बसाक के नेतृत्व में आयोजित किया गया, जिसमें जिले की स्वास्थ्य अधोसंरचना को तकनीक से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया।
कार्यशाला के दौरान जिला नोडल अधिकारी और मास्टर ट्रेनर डॉ. ऋषभ साव ने राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम की बारीकियों को साझा करते हुए बताया कि टोरेंट प्रोजेक्ट छत्तीसगढ़ के ग्रामीण स्वास्थ्य आयोजकों के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। इस प्रोजेक्ट के माध्यम से टेली-मॉनिटरिंग की सुविधा विकसित की जा रही है, जिससे दूरस्थ अंचलों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति, मरीजों की पहचान और उपचार की निरंतरता पर सीधी नजर रखी जा सकेगी। जिला कार्यक्रम प्रबंधक डॉ. रीना लक्ष्मी की उपस्थिति में आयोजित इस सत्र में विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि कैसे तकनीक के समन्वय से मानसिक रोगों के प्रबंधन में आने वाली भौगोलिक बाधाओं को दूर किया जा सकता है।
प्रशिक्षण में बस्तर जिले के विभिन्न विकासखंडों से आए कुल 156 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें चिकित्सा अधिकारी, ग्रामीण चिकित्सा सहायक और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी शामिल रहे। इन जमीनी स्तर के अधिकारियों को टोरेंट प्रणाली के संचालन और डिजिटल डेटा प्रबंधन का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया, ताकि वे अपने क्षेत्रों में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का त्वरित समाधान कर सकें। इस आयोजन ने न केवल स्वास्थ्य कर्मियों की तकनीकी दक्षता को बढ़ाया है, बल्कि बस्तर जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की रियल-टाइम मॉनिटरिंग के एक नए युग की शुरुआत भी की है। जिला प्रशासन को उम्मीद है कि इस नवाचार से जिले के अंतिम व्यक्ति तक उच्च स्तरीय मानसिक स्वास्थ्य परामर्श और सेवाएं सुलभ हो सकेंगी।
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