खबर वर्ल्ड न्यूज-राकेश पांडेय-कांकेर। जिले के भानुप्रतापुर स्थित मुल्ला चौगेल पुनर्वास केंद्र में रंग, गुलाल और ढोल की थाप के बीच आत्मसमर्पित नक्सली अपनों के साथ खुशियां बांटते नजर आए, हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटे युवाओं ने इस बार बुधवार काे पहली बार खुलकर होली का पर्व मनाया। कभी जिन हाथों में एके-47 और आईईडी हुआ करते थे, उन्हीं हाथों में इस बार गुलाल और पिचकारी नजर आई। आत्मसमर्पित नक्सलियों ने रंग-अबीर उड़ाते हुए एक-दूसरे को गले लगाया और नई जिंदगी की शुरुआत का जश्न मनाया। इसके साथ ही उन्होंने पुलिस कर्मियों को भी रंग लगाया। इस दौरान आत्मसमर्पित नक्सली जमकर थिरकते नजर आए।
दरअसल, मुल्ला चौगेल पुनर्वास केंद्र में टोटल 40 आत्मसमर्पित नक्सली हैं। कौशल प्रशिक्षण (सिलाई, ड्राइविंग, मैकेनिक कार्य) दिया जा रहा है, ताकि वे नई जिंदगी शुरू कर सकें। सालों तक जंगलों में डर और दबाव के बीच जीवन बिताने के लिए मजबूर आत्मसमर्पित नक्सलियों ने एक दूसरे को रंग-गुलाल लगाते हुए समाज में लौटने की खुशी जाहिर की। इस मौके पर प्रशासनिक अधिकारी भी पुनर्वास केंद्र पहुंचे और मुख्यधारा में लौटे युवाओं को होली की शुभकामनाएं दीं। अधिकारियों ने कहा कि शासन की पुनर्वास नीति का उद्देश्य भटके हुए युवाओं को समाज में सम्मानपूर्वक पुनर्स्थापित करना है, ताकि वे आत्मनिर्भर बनकर सामान्य जीवन जी सकें।
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