नई दिल्ली। सर्दियां खत्म हो चुकी हैं और धीरे-धीरे गर्मियों की शुरुआत हो रही है। हमारे शरीर को बदलते तापमान के साथ तालमेल बिठाने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। चिलचिलाती धूप और गर्म हवाएं न केवल असुविधा पैदा करती हैं, बल्कि कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण भी बन सकती हैं। गर्मियों में उमस और पसीने के कारण शरीर में पानी की कमी और बैक्टीरिया का पनपना आम बात है, जिससे बीमार पड़ने का खतरा दोगुना हो जाता है। अगर आप गर्मी के मौसम में स्वस्थ रहना चाहते हैं, तो अभी से अपनी लाइफस्टाइल और खानपान में कुछ बदलाव कर लें।
दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और सीनियर फिजीशियन डॉ. अनिल बंसल ने बताया कि गर्मियों की सबसे गंभीर समस्या हीट स्ट्रोक यानी लू लगना है। जब शरीर का आंतरिक तापमान बहुत अधिक बढ़ जाता है और पसीने के जरिए खुद को ठंडा रखने में विफल रहता है, तो व्यक्ति बेहोश हो सकता है या उसे तेज बुखार आ सकता है। इससे बचने के लिए दोपहर 12 से 4 बजे के बीच घर से बाहर निकलने से बचें. अगर बाहर जाना जरूरी हो, तो सिर को कपड़े या टोपी से ढंकें और सूती कपड़े पहनें. घर से निकलते समय पानी या कोई ठंडा पेय पदार्थ पीकर ही निकलें, ताकि लू से बचाव हो सके।
डॉक्टर ने बताया कि तेज गर्मी में पसीने के माध्यम से शरीर का पानी और जरूरी मिनरल्स तेजी से बाहर निकल जाते हैं, जिससे डिहाइड्रेशन हो जाता है। इसके कारण चक्कर आना, कमजोरी और सिरदर्द जैसी समस्याएं कॉमन हैं। इससे बचने का सबसे अच्छा तरीका है कि प्यास लगने का इंतजार न करें और दिन भर थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहें। अपनी डाइट में नारियल पानी, नींबू पानी, छाछ और ओआरएस के घोल को शामिल करें। ये चीजें शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स बैलेंस बनाए रखने में मदद करती हैं।
एक्सपर्ट ने बताया कि गर्मियों में खाना बहुत जल्दी खराब हो जाता है, जिससे बैक्टीरिया पनपने लगते हैं और फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ जाता है। गर्मी के कारण हमारी पाचन शक्ति थोड़ी धीमी हो जाती है, जिससे दस्त, उल्टी और एसिडिटी जैसी समस्याएं होने लगती हैं। इस मौसम में बाहर के खुले खाने और तली-भुनी चीजों से परहेज करना चाहिए। हमेशा ताजा बना हुआ घर का खाना खाएं और अपनी डाइट में ठंडी तासीर वाली चीजें जैसे लौकी, तोरई, खीरा और तरबूज शामिल करें।
गर्मी में लगातार पसीना आने और धूल-मिट्टी के कारण त्वचा के रोमछिद्र बंद हो जाते हैं, जिससे घमौरियां, खुजली और फंगल इंफेक्शन की समस्या बढ़ जाती है। साथ ही सूरज की यूवी किरणें सनबर्न और टैनिंग का कारण बनती हैं। इनसे बचने के लिए दिन में कम से कम दो बार नहाएं और ढीले, आरामदायक सूती कपड़े पहनें। बाहर निकलते समय सनस्क्रीन का उपयोग करना न भूलें और कोशिश करें कि पसीने वाले कपड़े ज्यादा देर तक न पहने रखें। त्वचा को हाइड्रेटेड रखने के लिए एलोवेरा जेल का इस्तेमाल भी काफी फायदेमंद हो सकता है।
एक्सपर्ट की मानें तो गर्मी में तेज धूप और धूल के कारण आंखों में जलन, ड्राइनेस और कंजंक्टिवाइटिस का खतरा बढ़ जाता है। ठंडे पानी और एसी से बार-बार धूप में आने-जाने से तापमान में अचानक बदलाव होता है, जो मौसमी फ्लू और गले में खराश का कारण बनता है। आंखों की सुरक्षा के लिए अच्छी क्वालिटी वाले धूप के चश्मे लगाएं और ठंडे पानी से आंखें धोते रहें। पसीने में लथपथ होने पर तुरंत ठंडा पानी पीने या एसी में बैठने की गलती न करें। गर्मियों का आनंद तभी लिया जा सकता है, जब आप अपनी सेहत के प्रति सजग रहें।
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