खबर वर्ल्ड न्यूज-संतोष कुमार-बीजापुर। जिले बीजापुर में संविधान की पांचवीं अनुसूची, पेसा कानून एवं पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम लागू होने के बावजूद आदिवासियों की पैतृक जमीनों पर कब्ज़ा और फर्जी नामांतरण का मामला गरमा गया है। बुधवार को जिला मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विधायक विक्रम मंडावी ने राज्य सरकार पर आदिवासी भूमि को “भूमाफियाओं के हवाले करने” का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बीजापुर में सुनियोजित तरीके से आदिवासियों की जमीन छीनी जा रही है।
विधायक मंडावी ने कहा,
“बीजापुर जिला अनुसूचित क्षेत्र है। यहाँ आदिवासी अपनी भूमि को माँ की तरह पूजते हैं। लेकिन आज छल, कपट और कूटरचित दस्तावेज़ों के जरिए गैर-आदिवासी तत्वों के नाम पर सदियों पुरानी पैतृक जमीनें दर्ज कराई जा रही हैं — यह सिर्फ जमीन नहीं, आदिवासी अस्मिता और अस्तित्व पर हमला है।”
संकनपल्ली की 41 हेक्टेयर भूमि का फर्जी हस्तांतरण का आरोप
मंडावी के अनुसार तहसील उसूर के ग्राम संकनपल्ली में लगभग 41 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि जो वर्षों से आदिवासी परिवारों के नाम दर्ज थी, पहले गैर-आदिवासी रामसिंग यादव के नाम कर दी गई। इसके बाद जगदलपुर निवासी कमलदेव झा और अन्य को बेच दी गई।
विधायक ने दावा किया कि संबंधित खसरा नंबर जिन आदिवासी परिवारों के नाम दर्ज थे, उनमें — बतक्का यालम, यालम लक्ष्मीनारायण, कामेश यालम, धरमैया यालम, पवन, राजैया, गौरैया, बसवैया जव्वा, शांता जव्वा, मोहन जव्वा, दशरथ जव्वा, नागैया यालम, बिचमैया टिंगे, शिवैया और हनुमंत यालम — सहित कई परिवार शामिल हैं।
ग्राम सभा को नहीं मिली जानकारी, पूरी प्रक्रिया गुपचुप तरीके से पूरी?
विधायक मंडावी ने कहा कि जमीन फर्जी तरीके से हस्तांतरित कर रजिस्ट्री और नामांतरण किए जाने के दौरान न ग्राम सभा को सूचना दी गई, न ही पंचायत को खबर मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि तहसीलदार, पटवारी और उप-पंजीयक की मिलीभगत से पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया गया और अब क्रेता कमलदेव झा द्वारा पटवारी पर ऑनलाइन रिकॉर्ड दर्ज करने दबाव बनाया जा रहा है, जिससे आगे और बड़ी जमीन सौदों का रास्ता साफ हो सके।
विधायक ने सरकार से पूछे सवाल
मंडावी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार के समक्ष कई सवाल रखे — गैर-आदिवासी कमलदेव झा के नाम अनुसूचित क्षेत्र की जमीन कैसे दर्ज हुई? दर्जनों खसरा नंबरों की जमीन एक ही बार में कैसे खरीदी और बेची गई? बिना ग्राम सभा की अनुमति रजिस्ट्री और नामांतरण कैसे हो गया? ऑनलाइन करने के लिए दबाव किस वजह से डाला जा रहा है? क्या इसके पीछे और बड़ी साजिश है?
कांग्रेस की मांग — न्यायिक जांच और FIR हो और विधायक विक्रम मंडावी ने सरकार से मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च-स्तरीय न्यायिक जांच हो ,भूमाफियाओं और दोषी अधिकारियों पर FIR दर्ज हो, सभी अवैध नामांतरण एवं रजिस्ट्री निरस्त की जाएं , जमीन वापस प्रभावित आदिवासी परिवारों को दिलाई जाए , भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने कठोर कानून बनाया जाए
ग्रामीणों में आक्रोश — जमीन नहीं लौटाई गई तो आंदोलन की चेतावनी संकनपल्ली के ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी पैतृक भूमि वापस नहीं की गई तो वे बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। ग्रामीणों का कहना है कि “यह मामला सिर्फ संकनपल्ली का नहीं, पूरे बस्तर के आदिवासियों के अस्तित्व से जुड़ा है।
प्रेस वार्ता के दौरान पीड़ित ग्रामीणों सहित जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष लालू राठौर, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष शंकर कुड़ियम, पूर्व उपाध्यक्ष कमलेश कारम, पीसीसी सदस्य आर. वेणुगोपाल राव, प्रवीण डोंगरें, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी उसूर अध्यक्ष मनोज अवलम, जिला महामंत्री जितेंद्र हेमला, पूर्व पालिका उपाध्यक्ष पुरुषोत्तम सल्लूर, नगर कांग्रेस अध्यक्ष पुरुषोत्तम खत्री, एजाज सिद्दीकी, बबीता झाड़ी, कविता यादव, बोधि ताती, श्यामू गुप्ता, लक्ष्मण कड़ती सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।


