भारत में खेती सिर्फ एक काम नहीं, बल्कि एक परंपरा और जीवनशैली है। किसान जब खेत तैयार करता है तो वह सिर्फ बीज नहीं बोता, वह अपने परिवार के भविष्य को आकार देता है। ऐसे में अगर कुछ बुनियादी बातों का ध्यान रखा जाए तो मेहनत के साथ-साथ किस्मत भी साथ देती है। इनमें सबसे ज़रूरी होता है खेत में पानी का सही प्रबंध और उसका स्थान। कैसे आइए जानते हैं इंदौर निवासी ज्योतिषी, वास्तु विशेषज्ञ एवं न्यूमेरोलॉजिस्ट हिमाचल सिंह से…
जब कोई किसान अपने खेत में कुआं, बोरिंग या ट्यूबवेल बनवाता है, तो आमतौर पर वह सिर्फ इस बात का ख्याल रखता है कि पानी जल्दी मिल जाए, लेकिन यह जानना भी ज़रूरी है कि पानी का स्रोत खेत में किस दिशा में है। मान्यता के अनुसार अगर कुआं या बोरिंग उत्तर दिशा में होता है तो यह शुभ और फायदेमंद माना जाता है। इसकी तुलना में अगर पानी का स्रोत दक्षिण दिशा में होता है, तो यह समय के साथ नुकसान भी पहुंचा सकता है।
अगर किसी वजह से खेत में पहले से ही कुआं या बोरिंग दक्षिण दिशा में बना हुआ है, तो उसे हटाना संभव नहीं होता। ऐसे में एक आसान तरीका यह है कि खेत को दो बराबर हिस्सों में बांट दिया जाए। बीच में मिट्टी डालकर या कोई चिह्न बनाकर यह बांट की जा सकती है। इससे नकारात्मक असर कम हो जाता है और खेती पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता।
एक और अहम बात यह है कि खेत में पानी का बहाव उत्तर की ओर हो। यानी अगर पानी किसी नाली या पाइप के ज़रिये खेत से गुजरता है, तो उसका रुख दक्षिण से उत्तर की ओर हो। ऐसा करने से खेत में ऊर्जा का सही संतुलन बना रहता है और पैदावार में भी सुधार देखने को मिलता है।
जहां तक बात है रेस्ट करने की जगह या देखरेख के लिए बनाये गए छोटे कमरे की, तो वह पश्चिम या दक्षिण दिशा में बने तो अच्छा रहता है। इससे न सिर्फ आराम की जगह सही दिशा में होती है, बल्कि पूरा खेत भी संतुलित ढंग से व्यवस्थित होता है।
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