नई दिल्ली। गर्मी के मौसम में ठंडे-ठंडे पानी से नहाना बहुत अच्छा लगता है। कई लोग तो घंटों स्विमिंग पूल में बिता देते हैं और बाहर निकलने का मन ही नहीं करता है। गर्मी में नहाने की इच्छा खूब करती है और लोग मौका मिलते ही नहाना शुरू कर देते हैं। कई लोग दिन में 2-3 बार नहा लेते हैं, जबकि कई लोग सिर्फ 1 बार नहाते हैं। ऐसे में पसीना आने पर उनके शरीर से दुर्गंध आने लगती है। अब सवाल है कि गर्मी में लोगों को रोज कितनी बार नहाना चाहिए? चलिए इस बारे में डॉक्टर से जानने की कोशिश करते हैं।
डॉ. युगल राजपूत ने बताया कि गर्मियों में तापमान बढ़ जाता है और शरीर से ज्यादा पसीना निकलता है। इसकी वजह से बैक्टीरिया और गंदगी स्किन पर जम जाती है। ऐसे में बीमारियों से बचने के लिए नहाना अच्छा ऑप्शन होता है। नहाने से शरीर की सफाई हो जाती है और लोग ताजगी महसूस करते हैं। नहाने से शरीर ठंडा होता है और थकान दूर होती है। इसके अलावा नहाने से स्किन के पोर्स साफ रहते हैं। गर्मियों में आमतौर पर दिन में दो बार नहाना फायदेमंद माना जाता है। एक बार सुबह और एक बार शाम को नहाना चाहिए। सुबह नहाने से शरीर में ताजगी आती है और दिन भर की शुरुआत साफ-सफाई के साथ होती है। जबकि शाम को नहाने से दिन भर की धूल, पसीना और गंदगी साफ हो जाती है, जिससे स्किन इंफेक्शन से बचाव होता है।
डॉक्टर ने बताया कि कुछ लोग एक दिन में कई बार नहा लेते हैं, लेकिन ज्यादा साबुन या बॉडी वॉश का उपयोग करने से त्वचा की नेचुरल नमी खत्म हो सकती है, जिससे ड्राइनेस, खुजली या रैशेज की समस्या पैदा हो सकती है। ऐसे में अगर आप बार-बार नहाते हैं, तो हर बार साबुन का उपयोग करने से बचें और केवल पानी से नहाएं। गर्मियों में शरीर की दुर्गंध और पसीने की वजह से संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है। ऐसे में नियमित रूप से दिन में दो बार नहाना शरीर की दुर्गंध को दूर करता है और फंगल इन्फेक्शन से बचाता है। खासतौर पर जो लोग बाहर काम करते हैं या दिनभर धूप में रहते हैं, उन्हें शाम को भी नहाना चाहिए।
एक्सपर्ट की मानें तो हर उम्र के हिसाब से भी नहाने की संख्या कम या ज्यादा हो सकती है। जो लोग जिम जाते हैं या नियमित व्यायाम करते हैं, उन्हें ज्यादा पसीना आता है। ऐसे लोगों को वर्कआउट के बाद जरूर नहाना चाहिए। एक बार सुबह और एक बार शाम को एक्सरसाइज के बाद नहाना, त्वचा और मांसपेशियों दोनों के लिए फायदेमंद होता है। इसके अलावा बच्चों को दिन में एक बार अच्छी तरह से नहलाना पर्याप्त होता है। बुजुर्गों को ठंडे पानी से नहाने की बजाय गुनगुने पानी से नहाना चाहिए और एक बार नहाना पर्याप्त रहता है। अगर पसीना बहुत ज्यादा आए, तब शाम को भी नहा सकते हैं।
अगर आयुर्वेद की दृष्टि से देखें, तो नहाने से शरीर के त्रिदोष यानी वात, पित्त, कफ संतुलित होते हैं। गर्मियों में शरीर के अंदर पित्त दोष बढ़ जाता है, इसलिए सुबह ठंडे या गुनगुने पानी से स्नान करने से पित्त शांत होता है। आयुर्वेद में भी दिन में दो बार नहाने को उचित माना गया है, खासकर तब जब लोगों को पसीना ज्यादा आता हो या जो लोग धूप में बाहर काम करते हैं। हालांकि अत्यधिक नहाने से त्वचा की नमी खत्म हो सकती है, जबकि बहुत कम नहाने से संक्रमण और बदबू की समस्या हो सकती है। मौसम, शारीरिक गतिविधि और व्यक्तिगत स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए नहाने की आदत बनानी चाहिए।
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