खबर वर्ल्ड न्यूज-गरियाबंद। सुशासन तिहार, जिसे शासन-प्रशासन की समस्याओं के समाधान हेतु आयोजित किया गया था, अब व्यक्तिगत जिंदगी से जुड़ी अपीलों का भी मंच बन गया है। गरियाबंद जिले से एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां आठ युवाओं ने अपनी शादी के लिए शासन-प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है। इनमें से कुछ युवाओं ने जीवन संगिनी के रूप में विधवा, तलाकशुदा या अनाथ गरीब कन्या को भी अपनाने की इच्छा जताई है।
36 वर्षीय चंदन साहनी, जो राजिम नगर पंचायत के ब्रह्मचर्य वार्ड का निवासी है, ने प्रशासन को पत्र लिखकर दुल्हन दिलाने की मांग की है। चंदन ने अपने आवेदन में भावुक अपील करते हुए लिखा है कि वह अकेले जीवन से ऊब चुका है और अब उसे एक जीवन साथी की सख्त जरूरत है। आवेदन में उन्होंने साफ तौर पर लिखा –
“अगर कोई विधवा, तलाकशुदा या अनाथ गरीब परिवार की लड़की हो तो भी बिना किसी शर्त के उसे जीवनसाथी बनाने को तैयार हूं।”
इसी तरह, फिंगेश्वर ब्लॉक के चैत्रा पंचायत के एक युवक ने भी सरकार से दुल्हन दिलाने की गुहार लगाई है।
महिला एवं बाल विकास विभाग ने दी प्रतिक्रिया
महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी अशोक पांडेय ने जानकारी दी कि:
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अब तक 8 युवाओं ने ऐसे आवेदन प्रस्तुत किए हैं।
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इनमें से कुछ ने शादी के लिए आर्थिक सहायता की भी मांग की है।
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विभाग ने सभी आवेदकों को “उचित समय पर योजना से जोड़कर लाभान्वित करने” का जवाब देकर आवेदन का निराकरण कर दिया है।
सरकारी योजनाएं और संभावनाएं
हालांकि फिलहाल सीधे तौर पर दुल्हन दिलाने जैसी कोई सरकारी योजना नहीं है, लेकिन महिला बाल विकास विभाग के माध्यम से कुछ ऐसी योजनाएं हैं जिनसे इन युवाओं को भविष्य में सहायता मिल सकती है:
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मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना: इस योजना के तहत पात्र परिवारों के युवक-युवतियों का सामूहिक विवाह कराया जाता है, जिसमें आर्थिक सहयोग भी दिया जाता है।
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अनाथ बेटियों के पुनर्वास योजना: अनाथ लड़कियों के विवाह हेतु सरकार कुछ आर्थिक सहायता उपलब्ध कराती है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी ने संकेत दिया कि भविष्य में पात्रता और आवश्यक शर्तों के अनुसार इन्हें ऐसी योजनाओं से जोड़ा जा सकता है।
सामाजिक नजरिया
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी व्यक्तिगत मांगें अब शासन के कार्यक्रमों में सामने आने लगी हैं, जो ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक संरचना में आए बदलाव और विवाह योग्य युवाओं में बढ़ती असुरक्षा को भी दर्शाती हैं।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में ग्रामीण क्षेत्रों में 30-40 वर्ष आयु वर्ग के 10% से अधिक पुरुष अब भी अविवाहित रह जाते हैं, जो शिक्षा, आर्थिक स्थिति और सामाजिक कारणों से विवाह नहीं कर पाते।

