Khabarworld24.com –नई दिल्ली: विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय अर्थव्यवस्था इस साल भी दुनिया की सबसे तेज रफ्तार से बढ़ती रहेगी, हालांकि वैश्विक आर्थिक स्थिति कमजोर बनी रहेगी। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि दक्षिण एशिया के जीडीपी को स्थिर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
भारत की आर्थिक वृद्धि दर
भारत की जीडीपी वृद्धि दर 2024-25 के तीसरी तिमाही में 5.4% तक गिर गई है, जो पिछले दो सालों में सबसे निचला स्तर है। इसके बावजूद, भारत की आर्थिक वृद्धि में मजबूती बनी रहेगी। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) के आंकड़ों के अनुसार, भारत की वृद्धि दर वर्तमान वित्तीय वर्ष के दौरान भी अधिकतम दर से बढ़ने की उम्मीद जताई गई है, और यह 2024 के अंत तक वैश्विक अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
वैश्विक आर्थिक दृष्टिकोण
वहीं, डब्ल्यूईएफ ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता जताई है। 56% अर्थशास्त्रियों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की स्थिति को कमजोर होने की संभावना जताई है। सिर्फ 17% अर्थशास्त्रियों को इस वर्ष वैश्विक आर्थिक सुधार की उम्मीद है।
- दक्षिण एशिया: डब्ल्यूईएफ की रिपोर्ट में कहा गया कि दक्षिण एशिया की जीडीपी वृद्धि सबसे मजबूत रही है, और यह भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का नतीजा है। 61% मुख्य अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि मजबूत बनी रहेगी।
- चीन की स्थिति: चीन की अर्थव्यवस्था में मंदी की संभावना जताई गई है। उपभोक्ता मांग में कमी और कम उत्पादकता के कारण आने वाले महीनों में चीन की वृद्धि दर घट सकती है।
- यूरोप: यूरोप के लिए आर्थिक परिदृश्य निराशाजनक बना हुआ है। 74% अर्थशास्त्रियों ने यूरोपीय देशों में कमजोर वृद्धि की आशंका जताई है।
- अमेरिका: अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 2025 में मजबूत वृद्धि की उम्मीद जताई गई है, जहां रोजगार और महंगाई के आंकड़े भी सकारात्मक रुझान दिखा रहे हैं।
वैश्विक व्यापार की स्थिति
रिपोर्ट में वैश्विक व्यापार के बढ़ने की उम्मीद भी जताई गई है। 48% अर्थशास्त्रियों ने वैश्विक व्यापार में वृद्धि का अनुमान लगाया है। हालांकि, संरक्षणवाद को प्राथमिकता देने के कारण वैश्विक व्यापार संबंधों में तनाव की संभावना भी व्यक्त की गई है।
फिक्की का अनुमान
उद्योग मंडल फिक्की ने भारत की वृद्धि दर अनुमान को घटाकर 6.4% कर दिया है। यह अनुमान 2023-24 के लिए पहले के 8.2% के अनुमान से काफी कम है। फिक्की का कहना है कि अमेरिका के चुनावी परिणाम और डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों का भारतीय अर्थव्यवस्था पर अल्पकालिक असर हो सकता है।
निष्कर्ष
भारत के आर्थिक प्रदर्शन को देखते हुए, दक्षिण एशिया की जीडीपी के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण बना हुआ है, जबकि वैश्विक अर्थव्यवस्था में विभिन्न क्षेत्रों में चुनौतियाँ बनी हुई हैं। भारतीय अर्थव्यवस्था की गति 2025 में भी तेज बनी रह सकती है, लेकिन वैश्विक परिस्थितियाँ जैसे चीन की मंदी और यूरोप में निराशाजनक परिदृश्य, भारत के समक्ष चुनौती के रूप में उभर सकते हैं।
बालकृष्ण साहू – सोर्स विभिन्न आर्टिकल्स

