Khabarworld24.com -कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के ‘सच्ची आजादी’ वाले बयान पर तीखा हमला किया है। राहुल गांधी ने भागवत के बयान को न केवल स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान बताया बल्कि इसे देशद्रोह के समान करार दिया। दिल्ली में कांग्रेस के नए मुख्यालय ‘इंदिरा गांधी भवन’ के उद्घाटन के मौके पर राहुल ने इस विषय पर खुलकर अपने विचार रखे और कहा कि यदि ऐसा बयान किसी अन्य देश में दिया गया होता, तो उस व्यक्ति को तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाता।
राहुल गांधी का बयान:
राहुल गांधी ने कहा, “मोहन भागवत लगातार स्वतंत्रता संग्राम और भारतीय संविधान के महत्व को कम करने का प्रयास करते रहते हैं। उनका यह बयान यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि वह 1947 में मिली आजादी को खारिज करते हैं। यह बयान देश के हर नागरिक का अपमान है। यदि इस तरह का बयान किसी और देश में दिया जाता तो बयान देने वाले को तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाता और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होती।”
राहुल ने आरएसएस प्रमुख के बयान को सीधे-सीधे देशद्रोह की संज्ञा दी और कहा कि यह सिर्फ राजनीतिक बयान नहीं है, बल्कि देश के संविधान और स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान का निरादर है।
शिवसेना और विपक्ष की प्रतिक्रिया:
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के इस बयान के बाद सियासी गलियारों में हलचल मच गई है। कांग्रेस के साथ-साथ शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने भी भागवत के बयान की आलोचना की। संजय राउत ने कहा, “राम लला के नाम पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। मोहन भागवत का बयान निराधार है और इसे गंभीरता से लेना चाहिए।”
कांग्रेस के अन्य नेताओं ने भी इस बयान की निंदा की और कहा कि भागवत का यह बयान राष्ट्रीय एकता और संविधान की भावना के खिलाफ है।
भाजपा ने किया राहुल गांधी के बयान पर पलटवार:
राहुल गांधी ने उद्घाटन समारोह के दौरान बीजेपी और आरएसएस पर भी जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा और आरएसएस ने देश की सभी संस्थाओं पर कब्जा कर लिया है। उन्होंने इसे “इंडियन स्टेट” के खिलाफ कांग्रेस की लड़ाई बताया। राहुल के इस बयान को भाजपा ने मुद्दा बनाते हुए कड़ा विरोध जताया। भाजपा नेता जेपी नड्डा ने इस पर ट्वीट कर कहा, “राहुल गांधी ने खुलकर यह बात कही है, जो कांग्रेस के एजेंडे को बेनकाब करती है। कांग्रेस भारत सरकार के खिलाफ ही साजिश रच रही है।”
पृष्ठभूमि:
मोहन भागवत ने हाल ही में एक बयान दिया था जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत को सच्ची स्वतंत्रता अब तक नहीं मिली है और देश को ‘वास्तविक स्वतंत्रता’ के लिए अभी और संघर्ष करना होगा। उनके इस बयान ने राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है और कांग्रेस के साथ अन्य विपक्षी दलों ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। भागवत के बयान को लेकर संसद में भी हंगामा होने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि विपक्षी दल इसे संसद के आगामी सत्र में प्रमुख मुद्दा बनाने की योजना बना रहे हैं।
सियासी आंकड़े और प्रभाव:
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आरएसएस की भूमिका: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का प्रभाव वर्तमान सरकार पर स्पष्ट है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, आरएसएस की विचारधारा का भाजपा के नेतृत्व और नीतियों पर गहरा प्रभाव पड़ता है। इससे राजनीतिक विवादों में आरएसएस के बयान अक्सर प्रमुख मुद्दे बन जाते हैं।
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राहुल गांधी की प्रतिक्रिया: राहुल गांधी का बयान भाजपा और आरएसएस के खिलाफ चल रही कांग्रेस की पुरानी रणनीति का हिस्सा है। कांग्रेस ने हमेशा संघ पर भारतीय लोकतंत्र और संविधान को कमजोर करने का आरोप लगाया है, और यह बयान उसी दिशा में एक और प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
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राजनीतिक परिणाम: राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी चुनावों के मद्देनजर इस विवाद का असर हो सकता है। विपक्ष इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाकर भाजपा और आरएसएस पर सवाल उठाने की योजना बना रहा है, वहीं भाजपा इसे कांग्रेस की कमजोरियों को उजागर करने का अवसर मान रही है।
समाप्ति:
भागवत के ‘सच्ची आजादी’ वाले बयान ने एक बार फिर से सियासी महौल को गरमा दिया है। कांग्रेस और शिवसेना समेत अन्य विपक्षी दल इसे स्वतंत्रता सेनानियों और संविधान का अपमान मानते हुए इसके खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, जबकि भाजपा ने राहुल गांधी के बयान को कांग्रेस की विफल नीतियों का पर्दाफाश करार दिया है। आगामी दिनों में इस मुद्दे पर सियासी पारा और चढ़ सकता है।
बालकृष्ण साहू – सोर्स विभिन्न आर्टिकल्स

