Khabarworld24.com -महाकुंभ 2025 के अवसर पर मंगलवार को मकर संक्रांति के दिन श्रद्धालुओं और साधुओं का सैलाब त्रिवेणी संगम में उमड़ा। इस पवित्र दिन को लेकर खास आकर्षण नागा साधुओं की उपस्थिति रही, जिन्होंने हाथों में त्रिशूल और तलवारें थामे, शरीर पर भस्म लगाए, अमृत स्नान किया। इन साधुओं ने भगवान शिव के जयकारे के साथ संगम में डुबकी लगाई, और धर्मिक परंपराओं को जीवित रखा।
इस मौके पर करीब 1.60 करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम में आकर पवित्र डुबकी लगाई। मकर संक्रांति के दिन त्रिवेणी संगम पर विशेष श्रद्धालु स्नान की परंपरा रही है, और इसे महाकुंभ के सबसे महत्वपूर्ण स्नान दिवसों में से एक माना जाता है।
नागा साधुओं का महत्व
नागा साधु, जो प्राचीन हिन्दू साधना पद्धतियों के अनुसरणकर्ता होते हैं, विशेष रूप से शिव के अनुयायी माने जाते हैं। वे अपनी तपस्वी जीवनशैली और शक्ति की पहचान के रूप में भस्म और त्रिशूल का उपयोग करते हैं। महाकुंभ में उनकी उपस्थिति विशेष रूप से ध्यान आकर्षित करती है, क्योंकि वे महात्माओं और साधकों के प्रतीक माने जाते हैं। इस अवसर पर, नागा साधु संगम पर आते हैं और गंगा, यमुन और सरस्वती के संगम में स्नान करके अपने पापों से मुक्ति की कामना करते हैं।
श्रद्धालुओं का आस्था का जश्न
महाकुंभ में श्रद्धालुओं का उमड़ा हुआ सैलाब एक धार्मिक उत्सव की तरह था। मकर संक्रांति का यह दिन विशेष रूप से नदियों में स्नान करने का होता है, जो श्रद्धालुओं के लिए पुण्य अर्जित करने का अवसर प्रदान करता है। यह दिन उन लाखों लोगों के लिए अद्वितीय महत्व रखता है जो अपने जीवन की बुराइयों को धोने और पुण्य कमाने के लिए इस पवित्र स्थान पर आते हैं।
संख्या और आकड़े
- 1.60 करोड़ श्रद्धालु ने इस दिन त्रिवेणी संगम पर स्नान किया।
- नागा साधु के साथ अन्य धार्मिक गुरु और साधक भी इस अवसर पर मौजूद थे।
- महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में हर दिन वृद्धि होती जा रही है, जो इस धार्मिक मेला के महत्व को दर्शाता है।
- अगले कुछ दिनों में और भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना है, खासकर जब प्रमुख स्नान अवसरों का आयोजन होगा।
संक्षेप में: महाकुंभ 2025 में मकर संक्रांति का महत्व विशेष रूप से उभरकर सामने आया, जहां 1.60 करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम में पवित्र स्नान किया और नागा साधुओं ने अपनी धार्मिक आस्था का प्रदर्शन करते हुए त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाई। यह दिन महाकुंभ के इतिहास में एक और यादगार अध्याय बन गया।
बालकृष्ण साहू – सोर्स विभिन्न आर्टिकल्स

