खबर वर्ल्ड न्यूज-अजय शर्मा-जांजगीर चांपा। सनातन धर्म एक आदर्श शासन को राम राज्य मानती है। रामराज से तात्पर्य एक ऐसे सुशासन से है, जिसमें लोकतंत्र एक परिमार्जित रूप में स्थापित होती है। जहां न कोई क्लेश हो ना दुख हो, ना दर्द हो,ना गरीबी हो,और ना ही किसी भी प्रकार की कोई कठिनाई हो। जनता अपने राजा के प्रति और राजा अपने जनता के प्रति स्नेह रखता हो।मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के सिंहासन पर आसीन होते ही सर्वत्र हर्ष व्याप्त हो गया, सारे भय–शोक दूर हो गए एवं दैहिक, दैविक और भौतिक तापों से मुक्ति मिल गई। कोई भी अल्पमृत्यु, रोग–पीड़ा से ग्रस्त नहीं था, सभी स्वस्थ, बुद्धिमान, साक्षर, गुणज्ञ, ज्ञानी तथा कृतज्ञ थे।
राम राज बैठे त्रैलोका।
हरषित भए गए सब सोका।।
दैहिक दैविक भौतिक तापा।
राम राज नहिं काहुहि ब्यापा।।
वाल्मीकि रामायण में भरत जी रामराज्य के विलक्षण प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहते हैं, “राघव! आपके राज्य पर अभिषिक्त हुए एक मास से अधिक समय हो गया। तब से सभी लोग निरोग दिखाई देते हैं। बूढ़े प्राणियों के पास भी मृत्यु नहीं फटकती है। स्त्रियां बिना कष्ट के प्रसव करती हैं। सभी मनुष्यों के शरीर हृष्ट–पुष्ट दिखाई देते हैं। राजन! पुरवासियों में बड़ा हर्ष छा रहा है। मेघ अमृत के समान जल गिराते हुए समय पर वर्षा करते हैं। हवा ऐसी चलती है कि इसका स्पर्श शीतल एवं सुखद जान पड़ता है। राजन नगर तथा जनपद के लोग इस पुरी में कहते हैं कि हमारे लिए चिरकाल तक ऐसे ही प्रभावशाली राजा रहें।
राम राज्य को एक आदर्श राज्य के रूप में वर्णित किया गया है जिसमें सभी नागरिक समर्थन और समान अवसर प्राप्त करते हैं और सबकी सुख-शांति बनी रहती है। वर्तमान समय में क्या राम राज्य की कल्पना की जा सकती है? जब हम बात करते हैं राम राज्य की वर्तमान परिदृश्य में परिकल्पना करने की, तो इसका मतलब होता है कि हम एक आदर्श समाज की विचारधारा के बारे में सोचते हुए वर्तमान समय की समस्याओं के साथ उन्हें कैसे संबद्ध कर सकते हैं।
ऐसे समाज का चित्रण जिसमें सभी लोग एक दूसरे के साथ भाईचारे और शांति से रहते हैं, जहाँ लोग सामूहिक रूप से काम करते हैं और सभी का अधिकार होता है। राज्य की अधिकारिता सभी लोगों के हितों के लिए एक उच्चतम सत्य होती है, जहाँ कानून व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाती है और अनुशासन और संयम को सर्वोपरि माना जाता है।
राम राज्य के सिद्धांतों के आधार पर, वर्तमान समय की कुछ महत्वपूर्ण समस्याओं का समाधान निम्नलिखित तरीकों से किया जा सकता है:
भ्रष्टाचार: राम राज्य में, भ्रष्टाचार को बहुत गंभीरता से लिया जाएगा। सभी नेताओं और अधिकारियों को निष्पक्षता के साथ अपने काम करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
शिक्षा: राम राज्य में शिक्षा सभी के लिए समान होती थी। वर्तमान में हमें शिक्षा समानता के बिना उपलब्ध नहीं है। इसलिए, राम राज्य की वर्तमान परिदृश्य में परिकल्पना करते हुए हमें शिक्षा के माध्यम से समानता और भाईचारे को बढ़ावा देना होगा।
न्याय: राम राज्य में न्याय नियमित रूप से व्यवस्थित होता था। वर्तमान में हमें न्याय व्यवस्था को सुधारने की आवश्यकता है ताकि लोगों को उचित न्याय मिल सके।समाज की असुरक्षितता: राम राज्य में समाज की असुरक्षितता को दूर करने के लिए कई कदम उठाए जाते थे। वर्तमान में, हमें समाज की असुरक्षितता को दूर करने के लिए निर्णय से पूर्व गहन समान अधिकार: राम राज्य में, सभी नागरिकों को समान अधिकार मिलते हैं, चाहे वे किसी भी जाति, धर्म, लिंग, वर्ग, व्यवसाय या शौक के हों। किसी के वस्त्र, भोजन, आवास और शिक्षा की कमी नहीं होती है।
ऐसा समाज का चित्रण जिसमें सभी लोग एक दूसरे के साथ भाईचारे और शांति से रहते हैं, जहाँ लोग सामूहिक रूप से काम करते हैं और सभी का अधिकार होता है। राज्य की अधिकारिता सभी लोगों के हितों के लिए एक उच्चतम सत्य होती है, जहाँ कानून व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाती है और अनुशासन और संयम को सर्वोपरि माना जाता है।
रामराज्य तभी संभव है जब इन बातों को ध्यान दिया जाए और एक कुशल नेतृत्व का चुनाव किया जाए। वर्तमान समय में निसंदेह एक कुशल मार्गदर्शक के साथ हमारा देश राम राज्य के स्थापना की ओर अग्रसर हो रहा है।

