खबर वर्ल्ड न्यूज़ – प्रिया पाठक, रायपुर। त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले ही आम लोगों की रसोई का बजट बिगड़ने लगा है। पिछले दो सप्ताह में किराना बाजार में रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले कई खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी आई है। शक्कर, गुड़, खाद्य तेल, चावल और दाल के साथ-साथ व्रत में इस्तेमाल होने वाली सामग्री के दाम भी बढ़ गए हैं। ऐसे में त्योहारों के दौरान मिठाई, पकवान और उपवास की सामग्री खरीदना लोगों की जेब पर पहले के मुकाबले ज्यादा भारी पड़ सकता है।
शक्कर के दाम में सबसे ज्यादा उछाल
बाजार में शक्कर की कीमतों में सबसे ज्यादा तेजी देखने को मिल रही है। कारोबारियों के मुताबिक करीब दो सप्ताह पहले तक शक्कर खुदरा बाजार में लगभग 45 रुपये प्रति किलो बिक रही थी, जो अब बढ़कर करीब 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। वहीं थोक बाजार में भी इसके भाव बढ़े हैं। करीब 20 दिन पहले थोक में शक्कर 50 से 52 रुपये किलो के आसपास थी, जो अब लगभग 60 रुपये किलो तक पहुंच गई है।
गोल बाजार व्यापारी संघ के पूर्व अध्यक्ष दिनेश साहू के मुताबिक पिछले दो सप्ताह से किराना बाजार में कई वस्तुओं के भाव बढ़े हुए हैं। वहीं गोल बाजार मर्चेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष सतीश जैन ने बताया कि शक्कर की कीमतों में करीब 30 से 35 प्रतिशत तक तेजी आई है। त्योहारों के दौरान शक्कर की खपत बढ़ने से आने वाले दिनों में कीमतों पर दबाव बने रहने की आशंका है।
गुड़ और खाद्य तेल भी हुए महंगे
शक्कर के साथ गुड़ की कीमत में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। करीब 60 रुपये किलो बिकने वाला गुड़ अब लगभग 80 रुपये किलो तक पहुंच गया है। इसी तरह खाद्य तेल की कीमतों में भी 10 से 15 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी बताई जा रही है। चावल और अन्य खाद्यान्नों के दामों में भी तेजी दर्ज की गई है।
व्रत की थाली पर भी महंगाई का असर
त्योहारों और व्रत के मौसम में इस्तेमाल होने वाली सामग्री भी महंगाई से अछूती नहीं है। व्यापारियों के अनुसार सिंघाड़ा करीब 150 रुपये से बढ़कर 240 रुपये किलो तक पहुंच गया है। साबूदाना के भाव भी लगभग 50 रुपये से बढ़कर 100 रुपये किलो हो गए हैं। फल्लीदाना 100 रुपये से बढ़कर करीब 140 रुपये किलो और गरम मसाला 100 रुपये से बढ़कर लगभग 150 रुपये किलो तक पहुंच गया है।
त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने के साथ अगर कीमतों में इसी तरह तेजी जारी रही, तो घरेलू बजट पर इसका सीधा असर पड़ना तय माना जा रहा है। खासकर मिठाई और पकवान बनाने वाले परिवारों के साथ व्रत रखने वाले लोगों को पहले की तुलना में अधिक खर्च करना पड़ सकता है।


