आज ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि दिन शनिवार है। हिंदू धर्म में शनिवार का दिन न्याय व कर्म के कारक ग्रह शनिदेव को समर्पित है। पंचांग और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर शनि की ढैय्या व साढ़ेसाती समेत कई दोषों से मुक्ति मिलती है।
पंचांग के अनुसार, आज ज्येष्ठ कृष्ण षष्ठी तिथि, श्रवण नक्षत्र, गर करण, कृष्ण पक्ष और चंद्रमा मकर उपरांत कुंभ राशि में तो सूर्य वृषभ राशि में रहने वाले हैं। माना जाता है कि शनिदेव कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं, जबकि हनुमानजी अपने भक्तों को भय, संकट और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा प्रदान करते हैं। हनुमानजी की आराधना करने से आत्मविश्वास बढ़ता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। माना जाता है कि हनुमानजी के भक्तों पर शनिदेव की विशेष कृपा बनी रहती है और ढैय्या व साढ़ेसाती का दोष भी नहीं लगता।
शनिवार की सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। सबसे पहले भगवान सूर्य को अर्घ्य दें। इसके बाद शनिदेव के मंदिर जाएं या घर में उनकी प्रतिमा के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाएं। शनिदेव को काले तिल, उड़द की दाल और नीले या काले पुष्प अर्पित करें। ॐ शं शनैश्चराय नमः मंत्र का जाप करें। इसके बाद हनुमानजी की पूजा करें। उन्हें चमेली का तेल, सिंदूर, लाल फूल और गुड़-चना अर्पित करें। हनुमान चालीसा, बजरंग बाण या सुंदरकांड का पाठ करना शुभ माना जाता है। शाम के समय पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना भी लाभकारी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनिवार के दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व है। जरूरतमंद लोगों को काले तिल, कंबल, भोजन या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
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