सनातन धर्म में एकादशी का व्रत बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। साल में 24 एकादशी का व्रत रखा जाता है। यानी कि प्रत्येक महीने दो एकादशी का व्रत होता है।ऐसी स्थिति में हिंदू पंचांग के अनुसार अधिक मास के दौरान ही परमा एकादशी का व्रत रखा जाता है। परमा एकादशी का व्रत अधिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। एकादशी तिथि के दिन भगवान श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि विधान पूर्वक पूजा आराधना की जाती है। लेकिन खास बात यह है कि परमा एकादशी का व्रत 3 साल में एक बार ही रखा जाता है। कहा जाता है इस दिन व्रत और पूजा पाठ करने से जीवन के समस्त पापों से मुक्ति मिलती है। और मोक्ष की प्राप्ति होती है ऐसी स्थिति में आईए जानते हैं कब है परमा एकादशी क्या है शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।
सर्वार्थ सिद्धि योग और शोभन योग
दरअसल, अयोध्या के ज्योतिष पंडित कल्कि राम बताते हैं कि हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह के अधिक मास महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 11 जून को प्रारंभ हो रहा है। ऐसी स्थिति में उदया तिथि के अनुसार परमा एकादशी का व्रत 11 जून दिन गुरुवार को रखा जाएगा। इस दिन कई शुभ योग का निर्माण भी हो रहा है, जिसमें सर्वार्थ सिद्धि योग और शोभन योग भी बन रहा है। जो शुभ कार्य के लिए बेहद शुभ माना जाता है।
पूजा-पाठ की विधि
एकादशी तिथि के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना चाहिए। पूजा घर को गंगाजल से छिड़काव करना चाहिए। एक चौकी पर पीला वस्त्र डाल कर भगवान श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा को स्थापित करना चाहिए। उसके बाद विधि विधान पूर्वक पूजा आराधना करनी चाहिए। भगवान विष्णु के सहस्त्र नाम का पाठ करना चाहिए। ऐसा करने से कहा जाता है जीवन की समस्त मनोकामना की पूर्ति होती है।
क्या है मान्यता
धार्मिक मान्यता के अनुसार परमा एकादशी का व्रत करने से जीवन के सभी दुख कष्ट और पाप से मुक्ति मिलती है। सुख समृद्धि में वृद्धि होती है व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। क्योंकि परमा एकादशी का व्रत प्रत्येक साल नहीं होता है यह हर 3 साल में एक बार आता है। ऐसी स्थिति में इस व्रत को करने से विधि विधान पूर्वक पूजा आराधना करने से भगवान श्री हरि विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
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