खबर वर्ल्ड न्यूज-आशीष कंठले-बेमेतरा। बेमेतरा जिले में कृषि के क्षेत्र में उन्नति के साथ-साथ भूमिगत जल स्रोतों का संरक्षण अब बेहद जरूरी हो गया है। जलशक्ति मंत्रालय द्वारा जिले के सभी ब्लॉकों को जल संकट के दृष्टिकोण से रेड जोन घोषित किया गया है। इनमें साजा ब्लॉक को सेमी-क्रिटिकल जोन और बेमेतरा, बेरला व नवागढ़ ब्लॉक को क्रिटिकल जोन में शामिल किया गया है। इस स्थिति में किसानों के लिए केवल खेती करना ही नहीं, बल्कि जल संरक्षण की दिशा में कदम उठाना भी अत्यंत आवश्यक हो गया है।
कृषि विभाग ने इस चुनौती का समाधान प्रस्तुत किया है। धान की फसल में पानी की खपत सबसे अधिक होती है, और इसके लिए विभाग ने विशेष किस्म का बीज तैयार किया है, जिसका नाम ‘विक्रम टीसीआर’ है। यह धान की नई किस्म शॉर्ट टाइम में उच्च पैदावारी देती है और 60 से 70 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन क्षमता के साथ उपलब्ध है। इस किस्म की खासियत यह है कि यह केवल 125 से 130 दिनों के भीतर तैयार हो जाती है, जिससे पानी की खपत कम होती है।
जल संरक्षण और फसल सुरक्षा में सहायक
उप संचालक कृषि मोरध्वज डडसेना ने बताया कि विक्रम टीसीआर’ की लंबाई कम है और उपज अधिक, जिससे यह तेज हवा और आंधी-तूफान में भी गिरती नहीं है। नई किस्म अन्य बीजों की तुलना में अधिक हवादार परिस्थितियों को सहन कर सकती है। जिले में 67 हेक्टेयर में इस नवीन धान किस्म का बीज कृषकों द्वारा तैयार किया जा रहा है। आदिवासी ग्राम झालम में भी पहली बार कृषकों के द्वारा इस किस्म का बीजोत्पादन कार्यक्रम लिया गया है। उत्पादित बीज किसानों द्वारा उच्च कीमत पर बीज निगम में विक्रय कर अगले वर्ष जिले के अन्य किसानों को खेती के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।
गत वर्ष केवल 16 हेक्टेयर में सुगंधित धान किस्म सीजी देवभोग का बीज तैयार किया गया था। इस वर्ष सीजी देवभोग के साथ-साथ विक्रम टीसीआर धान किस्म का बीज अधिक मात्रा में उत्पादित होगा। इसका परिणाम यह होगा कि बेमेतरा जिला नवीन किस्मों के बीज उत्पादन में आत्मनिर्भर बनेगा और किसानों को अधिक सुरक्षित, लाभकारी और कम जल खपत वाली फसल के विकल्प मिलेंगे। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि ‘विक्रम टीसीआर’ न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करेगा बल्कि जल संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा। यह कदम बेमेतरा जिले में आधुनिक और सतत कृषि की दिशा में एक बड़ी पहल के रूप में देखा जा रहा है।
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