khbarworld24-भारत को हाल ही में फोर्ब्स द्वारा जारी 2025 की दुनिया के शीर्ष 10 सबसे शक्तिशाली देशों की सूची से बाहर रखने पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस रैंकिंग ने भारत की विशाल जनसंख्या, सैन्य ताकत और आर्थिक प्रगति के बावजूद उसे टॉप-10 में जगह नहीं दी, जिससे विशेषज्ञों और जनता के बीच नाराजगी बढ़ गई है। कई लोगों का मानना है कि यह फैसला भारत के वैश्विक प्रभाव को सही ढंग से आकलित नहीं करता है।
भारत की स्थिति पर सवाल: दुनिया की चौथी सबसे बड़ी सेना और पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था
भारत की चौथी सबसे बड़ी सेना और पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के बावजूद उसे इस सूची में स्थान नहीं मिलना चौंकाने वाला है। भारत की विशाल 141 करोड़ की जनसंख्या, उसकी सैन्य ताकत और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था को नजरअंदाज किया जाना फोर्ब्स की रैंकिंग पद्धति पर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को नजरअंदाज करना, वैश्विक स्तर पर भारत के प्रभाव को कमतर आंकने जैसा है, खासकर जब भारत दुनिया में तेजी से उभरती हुई ताकतों में से एक है।
रैंकिंग मॉडल और रिसर्च टीम: पद्धति पर उठे सवाल
यह रैंकिंग बीएवी ग्रुप द्वारा तैयार की गई है, जो डब्ल्यूपीपी की एक यूनिट है। रिसर्च टीम का नेतृत्व पेंसिल्वेनिया विश्वविद्यालय के व्हार्टन स्कूल के प्रोफेसर डेविड रीबस्टीन ने किया। इस सूची को तैयार करने के लिए पांच मुख्य पैमाने उपयोग किए गए हैं:
- किसी देश का नेता
- आर्थिक प्रभाव
- राजनीतिक प्रभाव
- मजबूत अंतर्राष्ट्रीय गठबंधन
- मजबूत सेना
2025 के दुनिया के शीर्ष 10 शक्तिशाली देश: भारत की अनुपस्थिति
भारत को टॉप-10 से बाहर रखना इस सूची के बाद सबसे अधिक चर्चा का विषय बन गया है। सूची में अमेरिका, चीन, रूस जैसे बड़े देशों ने अपनी स्थायी जगह बनाई है, जबकि भारत जैसे उभरते हुए देश को शामिल नहीं किया गया। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह रैंकिंग पद्धति में दोष हो सकता है, जिससे भारत की अंतर्राष्ट्रीय पहचान और बढ़ते प्रभाव को कमतर आंका गया है।
2025 के टॉप 10 शक्तिशाली देशों की सूची:
रैंक | देश | जीडीपी (2025) | जनसंख्या | क्षेत्र |
---|---|---|---|---|
1 | अमेरिका | 30.34 ट्रिलियन डॉलर | 345 करोड़ | अमेरिका |
2 | चीन | 19.53 ट्रिलियन डॉलर | 141.9 करोड़ | एशिया |
3 | रूस | 22 ट्रिलियन डॉलर | 14.4 करोड़ | यूरोप |
4 | यूके | 3.73 ट्रिलियन डॉलर | 6.91 करोड़ | यूरोप |
5 | जर्मनी | 4.92 ट्रिलियन डॉलर | 8.45 करोड़ | यूरोप |
6 | दक्षिण कोरिया | 1.95 ट्रिलियन डॉलर | 5.17 करोड़ | एशिया |
7 | फ्रांस | 3.28 ट्रिलियन डॉलर | 6.65 करोड़ | यूरोप |
8 | जापान | 4.39 ट्रिलियन डॉलर | 12.37 करोड़ | एशिया |
9 | सऊदी अरब | 1.14 ट्रिलियन डॉलर | 3.39 करोड़ | एशिया |
10 | इजरायल | 550.91 बिलियन डॉलर | 93.8 लाख | एशिया |
विश्लेषकों की प्रतिक्रिया
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की लगातार आर्थिक और सैन्य प्रगति को ध्यान में रखते हुए, उसे इस सूची में शामिल नहीं करना एक बड़ा चूक है। भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति में उसकी प्रमुख भूमिका को देखते हुए उसे इस रैंकिंग में उचित स्थान मिलना चाहिए था। इसके अलावा, भारत की बढ़ती भूमिका और वैश्विक गठबंधन भी इसे एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाने के लिए पर्याप्त हैं।
फोर्ब्स की रैंकिंग पर बढ़ती आलोचना
इस सूची को लेकर आलोचकों ने सवाल उठाया है कि आखिरकार भारत जैसे उभरते हुए शक्ति-सम्पन्न देश को नजरअंदाज क्यों किया गया। भारत की वैश्विक राजनीति में लगातार बढ़ती भूमिका और दुनिया की प्रमुख शक्तियों के साथ उसकी कूटनीतिक साझेदारी को देखते हुए यह रैंकिंग निष्पक्ष प्रतीत नहीं होती। कई विश्लेषक यह मानते हैं कि भारत को इस सूची में जगह मिलनी चाहिए थी, और इसकी अनुपस्थिति से फोर्ब्स की रैंकिंग प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।
स्रोत: फोर्ब्स, बीएवी ग्रुप, यूएस न्यूज रिपोर्ट
बालकृष्ण साहू - सोर्स विभिन्न न्यूज़ आर्टिकल